एस्ट्रोजन महिला और पुरुषों में मौजूद होते हैं । यह एक हार्मोन है जो प्रजनन विकास को बढ़ावा देता है। महिलाओं में, मासिक धर्म यानी पीरियड्स साइकिल को बनाए रखने से लेकर स्तनों के विकास तक, इसमें कई कई महत्वपूर्ण कार्य होते हैं। जब एस्ट्रोजेन का स्तर कम हो जाता है, तो महिलाएं रजोनिवृत्ति के दौरान परेशानी अनुभव करती हैं। हालांकि, एक डाइटरी एस्ट्रोजन जिसे फाइटोएस्ट्रोजन के रूप में जाना जाता है, जो इस समस्या से जूझने में मदद कर सकता है क्योंकि यह एस्ट्रोजेन के समान कार्य ही कर सकता है, और इसे शरीर ही पैदा करता है। फाइटोएस्ट्रोजन शरीर में बनता रहे इसके लिए ज़रूरी है कि डाइट का भी काफी ध्यान रखा जाए। कई ऐसे फ़ूड प्रोडक्ट्स हैं, जिन्हें डाइट में शामिल करने से एस्ट्रोजन का स्तर शरीर में बनाया रखा जा सकता है। आइए आपको बताते हैं कुछ ऐसे ही फूड्स के बारे में…

सोया दही: डायटीशियन मंजरी ताम्रकार के मुताबिक, सोया दही को बीन दही के नाम से भी जाना जाता है और इसे सोया दूध से बनाया जाता है। यही कारण है कि यह फाइटोएस्ट्रोजेन का एक अच्छा स्रोत भी होता है। इसे अपनी डाइट में शामिल करें या फलों और नट्स के साथ इसका आनंद लें।

अखरोट: सभी मेवों में से सबसे अधिक कारगर अखरोट हैं। फाइटोएस्ट्रोजेन से भरपूर इन नट्स में प्रोटीन, ओमेगा -3 फैटी एसिड और कई पोषक तत्व भी होते हैं। इन्हें ऐसे ही खाएं या उन्हें अपने फलों के सलाद या आइसक्रीम के लिए ऊपर डालें।

मूंगफली: मूंगफली के बारे में सबसे अच्छी बात यह है कि वे आसानी से हर जगह उपलब्ध हैं। ये फाइटोस्ट्रोजेन में रिच होने के साथ -साथ स्वाद से भी भरपूर होते हैं। आप इन्हें कच्चा,उबालकर या रोस्टेड खा सकते हैं या फिर पीनट बटर के रूप में भी इसका उपयोग कर सकते हैं।

सूखे फल: सूखे मेवे का सेवन कभी भी, कहीं भी किया जा सकता है। ये स्वादिष्ट और पौष्टिक होते हैं। इनमें विभिन्न फाइटोएस्ट्रोजेन भी होते हैं । फाइटोएस्ट्रोजेन का उच्च स्तर होने के कारण, खजूर, छुहारे और सूखे खुबानी का सेवन अवश्य करें। साथ ही फाइबर के लिए भी आपको नियमित रूप से सूखे फल का सेवन करना चाहिए।

एस्ट्रोजन का स्तर शरीर में बनाए रखते हैं ये फूड्स

फाइबर से भरपूर होती है अलसी

Image Credit: ndtvimg.com

तिल के बीज: तिल के बीज आकार में छोटे हो सकते हैं, लेकिन ये फाइबर का एक समृद्ध स्रोत हैं। इससे भी महत्वपूर्ण बात, वे फाइटोएस्ट्रोजेन से भरे हुए होते हैं। एक अध्ययन के अनुसार तिल के बीज के पाउडर का सेवन रजोनिवृत्ति के बाद की महिलाओं में एस्ट्रोजन के स्तर पर प्रभाव डालता है। जो लोग रोजाना पांच सप्ताह तक इसका सेवन करते हैं उनमें एस्ट्रोजन का स्तर अधिक पाया गया। यह उनके कोलेस्ट्रॉल के स्तर को सुधारने में भी मदद करता है।

अलसी का बीज: ये छोटे बीज लिग्नन्स के रूप में जाने वाले केमिकल कंपाउंड्स का एक समृद्ध स्रोत हैं, जो फाइटोएस्ट्रोजेन की तरह काम करते हैं। अलसी में अन्य खाद्य पदार्थों की तुलना में अधिक लिग्नन होते हैं। कुछ स्टडीज से पता चलता है कि अलसी के बीज में पाए जाने वाले फाइटोएस्ट्रोजेन स्तन कैंसर के खतरे को कम करने में मदद कर सकते हैं।

सोयाबीन: सोयाबीन में प्रोटीन, विटामिन और खनिजों का एक समृद्ध स्रोत हैं। इनमें आइसोफ्लेवोन्स की मात्रा भी उच्च होती है, जो फाइटोएस्ट्रोजेन होते हैं। सोया आइसोफ्लेवोन्स नेचुरल एस्ट्रोजन के प्रभाव की तरह ही रक्त एस्ट्रोजन के स्तर को कम या बढ़ा सकते हैं। टोफू भी सोयाबीन से बनाए जाते हैं। आप इन्हें भी डाइट में शामिल कर सोयाबीन का फायदा उठा सकते हैं।

This is aawaz guest author account