सूर्य और चन्द्रमा की वजह से हमारा जीवन सुचारु रूप से चलता है। ज़ाहिर है इनका असर हमारे आसपास के वातावरण पर पड़ता है। इन्ही की वजह से पृथ्वी पर दिन और रात होते हैं और इन्ही के अनुसार साल का विभाजन किया गया है। लेकिन चनद्रमा के पृथ्वी के पास होने की वजह से खास तौर पर हमारे आसपास कई परिवर्तन होते हैं। वहीं यह भी देखा गया है कि चन्द्रमा का असर पृथ्वी पर सबसे ज़्यादा पूर्णिमा के दिन पड़ता है क्योंकि इस दिन चंद्रमा पृथ्वी के एकदम करीब तो होता ही हैं, साथ ही इस दिन चंद्रमा पूर्ण भी रहता है। यह साबित हो चुका है कि इसका असर इंसानों पर भी पड़ता है। इसलिए हमारी सेहत पर भी इसका असर साफ़ देखा जा सकता है। आज हम आपको पूर्णिमा यानी कि पूरे चन्द्रमा के रूप का असर हमारी सेहत पर कैसे पड़ता है ये बताएंगे।

सूर्य और चन्द्रमा की गति के अनुसार विभाजन

चन्द्रमा के अनुसार दो पक्षों- कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष का निर्माण किया गया है

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जहां एक ओर सूर्य की गति के अनुसार हमने दो अयन- उत्तरायण और दक्षिणायन बनाए हैं, उसी प्रकार चन्द्रमा के अनुसार दो पक्षों- कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष का निर्माण किया गया है। ये पक्ष महीने के 30 दिनों को चन्द्रमा की गति के अनुसार दो भागों में विभाजित करते हैं। 15-15 दिनों के इन पक्षों में अमावस्या और पूर्णिमा आती हैं। पूर्णिमा ही वह दिन होता है जब हमारे स्वास्थ्य में बड़े बदलाव देखे जाते हैं। आइये जानते हैं कैसे।

कैसे पड़ता है पूर्णिमा का असर?

दरअसल पूर्णिमा के दिन चांद पृथ्वी के सबसे नज़दीक होता है और ये पूरा चांद पृथ्वी के पानी के स्तर को ऊपर खींचता है। इससे ही हाय टाइड या ज्वार-भाटा कहा जाता है। इसी तरह मनुष्य का शरीर भी 85 प्रतिशत पानी से बना हुआ है, इसलिए मनुष्य के शरीर में भी पानी की गति और गुण बदल जाते हैं। इसका असर सीधा हमारी सेहत पर पड़ता है। इसकी वजह से मन में बैचेनी और नींद की कमी के साथ-साथ भावनात्मक असंतुलन देख जा सकता है। इसका असर हमारे पाचन तंत्र को भी प्रभावित करता है। साथ ही लोगों को सिरदर्द और माइग्रेन की समस्या हो सकती है।

क्या कहते हैं वैज्ञानिक?

पूर्णिमा के दिन मनुष्य के शरीर के रक्त के न्यूरॉन सेल्स में तेज़ी देखी जाती है

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वैज्ञानिकों की माने तो चन्द्रमा का प्रभाव मनुष्य शरीर पर तेज़ी से पड़ता है। पूर्णिमा के दिन मनुष्य के शरीर के रक्त के न्यूरॉन सेल्स में तेज़ी देखी जाती है, जिससे सामान्य की तुलना में उत्तेजना में बढ़ोतरी हो जाती है। ये असर हर पूर्णिमा को देखा जा सकता है।

पाचन-तंत्र पर पड़ता है गहरा प्रभाव

जिनकी पाचन क्रिया सामान्य की तुलना में मंद होती है और जिन लोगों को खाने के बाद नींद और नशे जैसा महसूस होता है, ऐसे लोगों पर पूर्णिमा का प्रभाव मुख्य रूप से देखा जाता है। पूरे चांद की वजह से इन लोगों के शरीर में न्यूरॉन सेल्स और भी कम गति से काम करते हैं, जिसकी वजह से पाचन-तंत्र में समस्या उत्पन्न हो जाती है। इसलिए पूरे चांद की स्थिति में इन लोगों को डिटॉक्सिफिकेशन या उपवास करने की सलाह दी जाती है।

इस तरह पूर्णिमा के दिन चन्द्रमा की स्थिति का मनुष्य के शरीर पर साफ़ तौर पर प्रभाव देखा जा सकता है।

मेरी आवाज़ ही पहचान है! संगीत मेरी कल्पना को पंख देता है.. किताबी कीड़ा, अडिग, जिद्दी, मां की दुलारी.. प्राणी प्रेम ऐसा कि लोग मुझे लगभग पागल समझते हैं! खाने के लिए जीनेवाली और हद दर्जे की बातूनी.. लेकिन मेरा लेखन आपको बोर नहीं करेगा..