वर्कप्लेस पर पुरुषों और महिलाओं की बराबर सैलरी देश ही क्या दुनिया में एक डिबेट का विषय रहा है। काफी समय से देखा जा रहा है कि महिलाओं को पुरुषों के बराबर सैलरी देने की बात तो की जाती है, लेकिन हकीकत में ऐसा होता नहीं है। दुनिया में ऐसी कोई भी जगह नहीं है जहां सैलरी की बात आने पर साफ़-साफ़ जेंडर गैप नज़र आता है। इंडिया की बात करें तो 2017 में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, यहां पुरुषों के मुकाबले महिलाओं को 20 प्रतिशत कम सैलरी दी जाती है। ऐसे में मैनेजमेंट भले ही कोई कदम उठाए या नहीं उठाए, अगर आप एक वर्किंग वुमन हैं तो अपने अधिकारों के प्रति खुद ही सचेत रहें और जहां पर भी सैलरी में बराबरी के हक की बात हो तो बात ज़रूर करें। इस आर्टिकल के माध्यम से आज हम आपको बताते हैं कि बराबर सैलरी पाने के लिए क्या करें…

मेल डोमिनेटेड करियर चुनें: अगर पुरुषों के बराबर सैलरी पाना चाहती हैं तो ऐसा करियर ऑप्शन चुनें जिसमें पुरुषों का वर्चस्व हो। ऐसे में मुकाबला भले ही तगड़ा रहे लेकिन सैलरी में बराबरी का हक़ मिलने के चांसेस भी बढ़ जाते हैं। वहीं, अगर आप लड़कियों के लिहाज से ठीक माने जाने वाले करियर चुनेंगी तो हो सकता है आप करियर में उतनी ग्रोथ न पकड़ पायें जितनी कि आपने सोची थी। ऐसा सोचा जाता है कि नर्सिंग और टीचिंग महिलाओं के लिहाज से बढ़िया प्रोफेशन हैं,वहीं इंजीनियरिंग और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट को मेल डोमिनेटेड माना जाता है, तो जाहिर है कि अगर आप किसी सॉफ्टवेयर कंपनी में काम करेंगी तो आपको टीचिंग से ज्यादा ही पैसे मिलेंगे।

शुरुआत में ही नेगोसिएशन करें: कई स्टडीज में ये कहा गया है कि सिर्फ 7 प्रतिशत महिलाएं ही अपनी फर्स्ट सैलरी को लेकर नेगोसिएशन करती हैं। वहीं, 57 प्रतिशत पुरुष नेगोसिएशन में आगे रहते हैं इसलिए उन्हें अधिक सैलरी मिलने की सम्भावना बढ़ जाती है। इसलिए शुरुआत में ही अगर नेगोसिएशन करेंगी तो यह आगे तक करियर में फायदेमंद साबित होगा और कंपनी भी आपसे कम सैलरी पर काम नहीं करवा पाएगी।

जागरुकता ज़रुरी

खुलकर कहें अपनी बात

Image Credit: livemint.com

खुद उठाएं आवाज़: कई बार कहा जाता है कि अपनी मदद इंसान को खुद ही करनी पड़ती है। यहाँ भी यह बात शत-प्रतिशत लागू होती है इसलिए जहां भी लगे कि आप पुरुषों के बराबर रोल निभा रही हैं। कम्पनी को पुरुषों के बराबर टारगेट डिलिवर करके दे रही हैं और फिर भी आपको गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है और न ही पुरुषों के बराबर सैलरी दी जा रही है तो अपने बॉस से क्लियर बात करें। अगर वहां बात नहीं बनती तो एचआर से इस बात को समझें कि आपके साथ यह भेदभाव क्यों किया जा रहा है। जब आप सतर्क रहेंगी तो कम्पनी भी आपके हितों से कन्नी नहीं काट पाएगी।

पहले ही करें प्रमोशन की बात: जैसे ही अप्रेजल साइकिल की शुरुआत होने वाली हो, अपनी परफॉरमेंस का रिव्यू अपने स्तर पर करके क्लियर हो जाएं कि मौजूदा जॉब में अब आपको क्या सैलरी हाइक के साथ प्रमोशन की भी ज़रूरत है? अगर हां, तो बॉस के मन में यह बात डालने में देर न करें और उन्हें बातों ही बातों में अपने इरादे ज़ाहिर कर दें। कई रिसर्च में ये सामने आया है कि महिलाएं प्रमोशन की मांग ही नहीं करती हैं इसलिए वह पांच-पांच साल तक एक ही पोजीशन पर काम करती रहती हैं और इसी वजह से पुरुषों से पीछे रह जाती हैं।

This is aawaz guest author account