आज का दिन पूरी दुनिया में सुसाइड प्रिवेंशन डे के रूप में मनाया जाता है। हर साल 10 सितम्बर के दिन लोगों में सुसाइड प्रिवेंशन यानी कि आत्महत्या रोकने के लिए अवेयरनेस फैलाई जाती है। हमारे देश में जहां एक ओर डिप्रेशन और एनज़ाइटी जैसी मानसिक स्थिति को लेकर लोगों में जागरूकता कम है, वहीं लोगों को बढ़ते तनाव की वजह से मानसिक समस्याओं में इज़ाफा हो रहा है। वैसे तो ज़िन्दगी को कुदरत की अनमोल देन माना जाता है, लेकिन इसके बाद भी लोग ज़रूरी मदद ना मिलने की वजह से अपनी ज़िन्दगी ख़त्म कर लेते हैं। आज के इस सुसाइड प्रिवेंशन डे पर हम आत्महत्या से जुड़ी कुछ ऐसी बातों को लेकर बात करेंगे, जो हर शख्स के लिए जानना बेहद ज़रूरी है।

आत्महत्या के कई कारण

कई बार मूड स्विंग की वजह से लोग आपको गलत भी समझ सकते हैं

मुंबई की जानीमानी सायकोलॉजिस्ट ऐश्वर्या नातेकर ने आत्महत्या से जुड़ी कुछ खास बातों को विस्तार में बताया है। वे कहती है कि आत्महत्या करने के कई कारण हो सकते हैं, कई ऐसी बातें हैं जो आपके मन में नकारात्मक विचार पैदा करती है। इनमें लंबी बीमारी, लंबे समय तक रहने वाला फिजिकल पेन, किसी से शारीरिक जुड़ाव, किसी क़रीबी प्रियजन की मौत, कर्ज़, एग्जाम स्ट्रेस ये सभी चीज़ें किसी भी व्यक्ति के मन में नकारात्मक विचार पैदा कर उसे आत्महत्या की ओर बढ़ने पर मजबूर कर सकते हैं। इसीलिए इस समस्या को लेकर बात करना बेहद जरूरी है। इसके बारे में बात करने को लेकर किसी भी तरह का संकोच मन में ना रखें, लोगों से बात करें और उन्हें सोचने पर मजबूर करें। कई बार मूड स्विंग की वजह से लोग आपको गलत भी समझ सकते हैं, लेकिन इसके बाद भी कोशिश करते रहें। साथ ही साथ डॉक्टर के पास जाकर प्रोफेशनल मदद लें। डॉक्टर ही एक ऐसा व्यक्ति है, जो आपको बिना आपको जज करे आपकी मदद करेगा।

कैसे पहचाने इसकी आहट?

व्यक्ति के विचारों और तकलीफों को मान्यता दें

मानसिक समस्या से जूझ रहे व्यक्ति के आसपास के लोगों की ज़िम्मेदारी है कि वे उस व्यक्ति के बदलते व्यवहार को समझें। यदि आपको लगता है कि कोई व्यक्ति सुसाइडल है, तो सबसे पहले उनके प्रियजनों को इस बारे में बताना बेहद ज़रूरी है। अक्सर लोग इस विषय पर बात करना पसंद नहीं करते, लेकिन आपको यह समझना बेहद जरूरी है कि सुसाइडल थॉट्स या कहें आत्महत्या के विचार सच में लोगों के मन में घर कर जाते हैं और यह व्यक्ति के लिए बेहद तकलीफदेह हो जाता है। इसके बाद उस व्यक्ति के विचारों और तकलीफों को मान्यता दें। अक्सर लोग सफलता प्राप्त कर चुके लोगों का उदाहरण देकर उस व्यक्ति की बातें सुनने से इनकार कर देते हैं, जो बिल्कुल गलत है। यदि आप उस व्यक्ति के बातों को मान्यता देते हैं, तो इससे आप पर उसका भरोसा बढ़ता है और वह बिना किसी झिझक के आपसे बात कर सकता है।

जरूरी नहीं कि हर बार आप उन्हें इसका कोई सोल्यूशन दें, इसीलिए सबसे पहले व्यक्ति की बात सुनना ज़रूरी होता है। व्यक्ति के सुइसाइडल होने पर आपको इसके लक्षण साफ़ नज़र आएंगे। यदि व्यक्ति अपनी पसंदीदा चीजों से दूर होने लगे या पसंदीदा एक्टिविटी को ना करना चाहे, उसमें जीने की इच्छा खत्म हो जाए, वो अपनी पसंदीदा चीजों को बांटने लगे या अकेले रहने लगे, तो समझना चाहिए कि व्यक्ति ज़िंदगी से निराश होता जा रहा है।

लोगों का संकोच करना होगा दूर

‘यारदोस्त एनजीओ’ के मार्केटिंग मैनेजर सुयश कुमार की माने, तो सुसाइड के बारे में बात करके ही हम इससे लोगों को बचा सकते हैं। यह इकलौती ऐसी मौत है जिस पर काबू पाया जा सकता है। इससे जुड़ा संकोच ही लोगों को इसके बारे में बात नहीं करने देता, यही वजह है कि आत्महत्या के मामले आए दिन सुनाई देते हैं। यदि लोगों में अवेयरनेस हो, तो आत्महत्याओं को रोका जा सकता है। यदि हम लोगों में इस संकोच को तोड़ पाए और उन्हें बात करने के लिए मना पाए, तो सुसाइड जैसी समस्या से निजात पाया जा सकता है।

तो चलिए, वर्ल्ड सुसाइड प्रिवेंशन डे पर हम सभी इस बात का निर्णय लेते है कि आप भी अपनों का ख्याल रखेंगे। आपको कभी भी लगे कि कोई आपका करीबी अकेला है, डिप्रेशन का शिकार है और ऐसी किसी भी स्थिति से गुज़र रहा है, तो उसे अपना समय और साथ ज़रुर दे। आपका थोड़ा समय किसी की ज़िंदगी बचा सकता है।

मेरी आवाज़ ही पहचान है! संगीत मेरी कल्पना को पंख देता है.. किताबी कीड़ा, अडिग, जिद्दी, मां की दुलारी.. प्राणी प्रेम ऐसा कि लोग मुझे लगभग पागल समझते हैं! खाने के लिए जीनेवाली और हद दर्जे की बातूनी.. लेकिन मेरा लेखन आपको बोर नहीं करेगा..