वर्ल्ड डॉटर्स डे यानी विश्व बेटी दिवस, जो हमारे देश के लिए और भी ख़ास तब बन जाता है, जब हमारी सरकार ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ जैसे नारों को प्राथमिकता देती है। जहां एक ओर हमारा समाज पितृसत्तात्मक सोच रखता है, वहीं हमारे परिवार में बेटियों को दोहरा संघर्ष करना पड़ता है। न सिर्फ प्रोफेशनल, बल्कि पर्सनल लेवल पर देश की लड़कियों को लड़कों के मुकाबले कई संघर्षों से गुज़ारना पड़ता है। ऐसे में उनके मानसिक स्वास्थ्य और व्यक्तित्व को सबसे ज़्यादा हानि होती है। इस डॉटर्स डे पर दोहरे संघर्षों को झेलनेवाली उन बेटियों के लिए कुछ ऐसी बातें लेकर आए हैं, जो न सिर्फ उनके मानसिक स्वास्थ्य का ख़्याल रखेंगी, बल्कि उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित भी करेंगी।

क्या कहती हैं अदिति माथुर कुमार?

बेटियां ईश्वर के आशीर्वाद की तरह होती हैं

पेशे से एक ऑथर और कई फेमस किताबों की रचयिता अदिति एक आर्मी वाइफ है। आर्मी परिवार को समझने और उस परिवार का सम्बल कैसे बनाया जा सकता है, अदिति ये बेटियों को सिखाती हैं। वे कहती हैं कि बेटियां ईश्वर के आशीर्वाद की तरह होती है। किसी भी बेटी के विकास में मां का ख़ास योगदान होता है, इसलिए बेटियों की परवरिश के दौरान हर मां को ये बात समझनी होगी कि मानसिक स्वास्थ्य जैसे विषय को लेकर बेटियों में सकारात्मक सोच का निर्माण करने की ज़रुरत है। आजकल के बढ़ते तनाव के दौर में ज़रूरी है कि बेटियों को स्वावलंबी बनाया जाए। एक मां ही अपनी बेटियों के ज़रिये समाज का ढांचा बदलने की ताकत रखती है। यदि वे आज बेटियों के ज़रिये एक अच्छी सामाजिक नींव रखेंगी, तो हमारा भविष्य ज़रूर मज़बूत बनेगा।

मानसिक स्तर पर बनें मज़बूत

मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना किसी भी व्यक्ति के लिए बेहद ज़रूरी होता है। ऐसे में जब हम बात करते हैं बेटियों की, तो उनके कंधों पर खुद के अलावा परिवार की भी ज़िम्मेदारी होती है। ऐसे में उन्हें अपने मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाते रहने की बेहद ज़रुरत पड़ती है। मुंबई के फेमस मनोचिकित्सक सतीश नागरगोरजे की मानें, तो हमारे देश में महिलाओं को खास तौर पर अपने मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने की आवश्यकता है। इसलिए डॉ सतीश बेटियों को कुछ खास बातों का ख़्याल रखने की सलाह देते हैं। आइये जानते हैं कौन सी हैं ये टिप्स।

आत्मविश्वास के ज़रिये आप और भी बड़े लक्ष्य को प्राप्त कर सकते है

क्षमता के अनुसार करें काम

हर महिला को अपनी क्षमता के अनुसार काम करने की ज़रुरत है। आपको ध्यान रखने की ज़रुरत है कि हर व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार काम करता है। इसलिए यदि आप एक आदर्श काम करने की दौड़ में पीछे भी रह जाएं, तो इसके लिए अपराधबोध महसूस ना करें। दूसरों की मदद करने के साथ-साथ आपको अपनी भी मदद करनी चाहिए। इसलिए खुद की स्वास्थ्य सीमाओं का ध्यान रखते हुए काम करना चाहिए।

क्षमता को तराशें

जिस तरह आपको ज़रुरत से ज़्यादा और क्षमताओं से परे काम नहीं करना चाहिए, उसी तरह आपके व्यक्तित्व में सुधार करना भी आपकी ही ज़िम्मेदारी है। अपनी क्षमताओं को निखारने के लिए हमेशा कार्यरत रहना चाहिए। जब आप खुद के व्यक्तित्व को और बेहतर बनाने की कोशिश करते हैं, तब आपका आत्मविश्वास बढ़ता है। इस आत्मविश्वास के ज़रिये आप और भी बड़े लक्ष्य को प्राप्त कर सकते है। इसलिए बेटियों को खुद को हमेशा बेहतर बनाने की कोशिश करते रहना चाहिए।

कृतज्ञ रहें

ध्यान रखें कि आपकी सफलताओं के लिए यूनिवर्स ने आपका साथ दिया है। इसलिए आपने अब तक जो भी हासिल किया है, उसके लिए ग्रेटीट्यूड रखें यानी कि आभारी रहें। जब आप अपनी सफलताओं के लिए आभार व्यक्त करते हैं, तो आपकी सोच सकारात्मक बनती है। ऐसी सकारात्मक सोच के साथ और भी बेहतर काम करने लगते हैं और ये आपके मानसिक संतोष का कारण बनती है। इससे आप तनाव मुक्त रहते हैं और खुद के विकास पर ध्यान दे पाते हैं।

व्यक्तिगत उद्देश्य की ज़रुरत

आपको प्रेरणा तब ही मिल सकती है, जब आपका कोई व्यक्तिगत उद्देश्य यानी कि पर्सनल एम हो। ये उद्देश्य आपके करियर या निजी जीवन से जुड़ा हुआ हो सकता है। जब आप किसी और व्यक्ति के अनुसार चलते हैं, तो आप पर किसी और के उद्देश्यों को पूरा करने का दबाव बना रहता है। इसलिए दूसरों के लिए काम करने के साथ-साथ खुद के लिए भी एक उद्देश्य बनाएं, जिससे आपका सही विकास हो और आप हमेशा आगे बढ़ते रहें।

इस डॉटर्स डे पर हम देश की उन सभी बेटियों में आगे बढ़ने और कभी ना रुकने का उत्साह जगाना चाहते हैं और चाहते हैं कि वे मानसिक रूप से सम्बल बनें।

मेरी आवाज़ ही पहचान है! संगीत मेरी कल्पना को पंख देता है.. किताबी कीड़ा, अडिग, जिद्दी, मां की दुलारी.. प्राणी प्रेम ऐसा कि लोग मुझे लगभग पागल समझते हैं! खाने के लिए जीनेवाली और हद दर्जे की बातूनी.. लेकिन मेरा लेखन आपको बोर नहीं करेगा..