आज 7 मई को लोग विश्व अस्थमा दिवस मनाते हैं और इस दिन लोगों को अस्थमा से जुड़ी समस्याओं के प्रति जागरूक करने की कोशिश करते हैं। अस्त-व्यस्त लाइफ स्टाइल और बिगड़ते मौसम के चलते आज कल बड़ी संख्या में लोग इस समस्या से जूझ रहे हैं। खास तौर पर बच्चे प्रदूषण की वजह से इस समस्या की चपेट में आ रहे हैं। यदि आप इस समस्या से बचना चाहते हैं, तो अस्थमा से जुड़ी इन बातों को आपको ज़रूर जानना चाहिए।

ये हैं अस्थमा के लक्षण

हवा में मौजूद पराग कणों से भी अस्थमा की समस्या हो सकती हैं

अस्थमा के लक्षण तब दिखाई देते हैं, जब मौसम में अचानक बदलाव आता है। इसके अलावा अस्थमा के और भी कई कारण हो सकते हैं। हवा में मौजूद पराग कणों से भी अस्थमा की समस्या हो सकती हैं। यह छोटे कण सांस के ज़रिए शरीर में जाकर गड़बड़ी पैदा करते हैं। वहीं जिन लोगों को स्मोकिंग की आदत होती है, ऐसे लोग अस्थमा से जल्द ही ग्रस्त हो सकते हैं।

ये आप ध्यान दें, तो आज के युवाओं में इनडोर गेम का चलन बढ़ गया है। ऐसे में जब भी बाहर जाकर युवा खुले वातावरण में नहीं खेलते, तो उनमें इम्यूनिटी की कमी हो जाती है। साथ ही इनडोर गेम्स खेलने के दौरान वह घर पर मौजूद डस्ट पार्टिकल, जिसमें पर्दे, चादर, कुर्सियों में मौजूद पार्टिकल, इत्यादि युवाओं के लिए अस्थमा का कारण बन रहे हैं।

आपको जानकर हैरानी होगी कि मौसम में हुए अचानक बदलाव की वजह से आपको अस्थमा की समस्या हो सकती हैं। जिन लोगों को अस्थमा की समस्या पहले से है, उन्हें खास तौर पर मौसम में बदलाव का ख्याल रखना चाहिए। साथ ही अस्थमा एक अनुवांशिक बीमारी है। यदि आपके घर में कोई व्यक्ति इस समस्या से जूझ रहा है, तो अनुवांशिकी के ज़रिए यह आपको भी हो सकती है।

कैसे होती है अस्थमा की शुरुआत?

आपको जानकर हैरानी होगी कि अस्थमा की शुरुआत सामान्य वायरल इंफेक्शन से हो सकती है। यदि किसी व्यक्ति को बार-बार सर्दी और बुखार हो या एलर्जी के संकेत दिखाई दे, तो उस व्यक्ति को अस्थमा की चपेट में आने से रोकना मुश्किल हो सकता है। इस एलर्जी और वायरल इनफेक्शन का सही समय पर इलाज ना कराया जाए और लाइफस्टाइल में बदलाव ना लाया जाए, तो अस्थमा की चपेट में आप आसानी से आ सकते हैं। लंबे समय तक ऐसी समस्याओं से जूझने की वजह से रेस्पिरेट्री सिस्टम को नुकसान पहुंचता है, जो व्यक्ति को अस्थमा की ओर ले जा सकता है।

अस्थमा के अटैक से बचने के ये हैं उपाय

अस्थमा का अटैक आपको कभी भी आ सकता है, जिसकी वजह से सांस लेने में दिक्कत हो सकती है

शायद आप नहीं जानते कि अस्थमा का कोई भी इलाज नहीं है। इसके अटैक से खुद का बचाव करके ही हम स्वस्थ रह सकते हैं। सबसे पहले आपको आपके शरीर के अनुसार अस्थमा से जुड़ी हुई बातों का ध्यान रखना होगा। ज़्यादा गर्मी या ज़्यादा ठंडे वातावरण में रहना अस्थमा के मरीजों के लिए तकलीफदेह हो सकता है। साथ ही आंधी और तूफान की अवस्था में घर से बाहर निकलना टालना चाहिए। आंधी और तूफान के समय मिट्टी के छोटे कण आपके सांस के ज़रिए फेफड़ों में पहुंच सकते हैं और इससे आपको अस्थमा अटैक हो सकता है।

मुंबई में कार्यरत डॉ शिनॉय की माने तो अस्थमा के मरीज़ों के लिए यह बेहद ज़रूरी है कि वह अपनी दवाई साथ रखें। अस्थमा के मरीजों को उनकी ज़रूरत के मुताबिक इनहेलर दिया जाता है, जिसे हमेशा अपने साथ कैरी करना चाहिए। अस्थमा का अटैक आपको कभी भी आ सकता है, जिसकी वजह से सांस लेने में दिक्कत हो सकती है। ऐसे में दवाई साथ ना रखने पर आपको अस्पताल का रुख करना पड़ेगा।

यदि आपके बच्चे को अस्थमा की समस्या है, तो आपको उसके दोस्तों और स्कूल में अध्यापकों को ज़रूर बताना चाहिए कि अटैक की स्थिति में क्या कर सकते हैं। अन्यथा बच्चे की जान को खतरा भी हो सकता है। यदि आप घर से ज़्यादा बाहर रहते हैं, तो आपको हमेशा अपने साथ स्कार्फ कैरी करना चाहिए। इससे आप हवा में मौजूद धूल के कणों और पालन ग्रेन्स से बच सकते हैं।

साथ ही इस बात का ध्यान रखें कि घर साफ सुथरा हो और घर के अंदर किसी प्रकार का धुंआ ना फैले। हर व्यक्ति को अस्थमा की समस्या अलग अलग तरह से हो सकती है. इसीलिए अपने शारीरिक स्थिति को समझकर अस्थमा से बचाव आपको खुद तय करना होगा।इस तरह अस्थमा दिवस पर अस्थमा के बारे ज़्यादा जानकारी आपको भविष्य में होनेवाली समस्याओं से बचा सकती है।

मेरी आवाज़ ही पहचान है! संगीत मेरी कल्पना को पंख देता है.. किताबी कीड़ा, अडिग, जिद्दी, मां की दुलारी.. प्राणी प्रेम ऐसा कि लोग मुझे लगभग पागल समझते हैं! खाने के लिए जीनेवाली और हद दर्जे की बातूनी.. लेकिन मेरा लेखन आपको बोर नहीं करेगा..