आज कल बहुत से यंग लड़के-लड़कियों ने पिलाटे एक्सरसाइज़ करना शुरू किया है। इसका कारण है कि पिलाटे से आपका पेल्विक सिस्टम मज़बूत होता है, शरीर स्वस्थ (aligned) रहता है, मांसपेशियां मज़बूत होती है, स्केलेटल सिस्टम में सुधार आता है और सांस लेने में आसानी होती है। इन सबके अलावा भी पिलाटे एक्सरसाइज़ के कई फायदे होते हैं। आइये देखें –

पिलाटे एक्सरसाइज़ करना क्यों है ज़रूरी

पिलाटे से आपका पोस्चर और मांसपेशियों बेहतर होती है और काम में फोकस बढ़ता है।

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यह एक्सरसाइज़ सिर्फ आपकी मांसपेशियों या शरीर को मज़बूत करने के लिए नहीं है, बल्कि पिलाटे से आपके पूरे शरीर को फायदे होते हैं। पिलाटे एक्सरसाइज़ आपके शरीर को रोज़-मर्रा की ज़िन्दगी के मुश्किल कामों को अच्छे से पूरा करने के लिए मज़बूत बनाती है। इतना ही नहीं, पिलाटे से आपके मसल मूवमेंट में सुधार आता है और शरीर में ज़ख्म होने की संभावना भी कम होती है। सबसे महत्वपूर्ण बात, पिलाटे से शरीर का पोस्चर बेहतर होता है।

किस तरह से किया जाता है पिलाटे

पिलाटे करते समय हमेशा मैट का उपयोग करें

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पिलाटे करते समय इन दो चीज़ों का ख़ास ध्यान रखें – एक तो मैट, यानी आसन और दूसरा आपका ध्यान यानी फोकस। आप चाहे तो कहीं पर भी पिलाटे की एक्सरसाइज़ कर सकते हैं। बस आपके पास उतनी जगह होनी चाहिए कि आप वहां अपना मैट आराम से बिछाकर पिलाटे कर सकें। याद रखें कि पिलाटे करने के लिए मैट का होना बहुत ज़रूरी होता है।

पिलाटे करने की सही पोज़िशन

पिलाटे की न्यूट्रल पोज़िशन है सबसे सही

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हर पिलाटे इंस्ट्रक्टर इस न्यूट्रल पोज़िशन पर सबसे ज़्यादा ध्यान देता है। इस पोज़िशन से आपके शरीर को सीधे रहने में मदद मिलती है। साथ ही, इसका सकारात्मक प्रभाव आपके पोस्चर पर भी पड़ता है। न्यूट्रल पोज़िशन में पिलाटे करने से आपकी रीढ़ मज़बूत होती है और साथ ही, आपके पीठ के दर्द में भी सुधार आता है। इसके अलावा आसान स्ट्रेचेस करने से आपकी फ्लेक्सिबिलिटी भी बढ़ती है।

इस न्यूट्रल पोज़िशन में पिलाटे करने से आपके मसल्स अच्छे से काम करते हैं और आपकी ब्रीथिंग भी बेहतर होती है। इसके अलावा, शरीर में ब्लड फ्लो को बनाए रखने के लिए आप दवाईयां लेने के बजाय, पिलाटे एक्सरसाइज़ कर सकते हैं। पिलाटे से शरीर में पूरे दिन एनर्जी बनी रहती है, और तो और आप शारीरिक और मानसिक, दोनों रूप से एक साथ विकास कर सकते हैं

पिलाटे करने का तरीका हर जगह अलग होता है

एक्सरसाइज़ की तकनीक बदलने से उससे होनेवाले फायदे नहीं बदलते

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आमतौर पर हर व्यक्ति पिलाटे को अपने शरीर की ज़रूरत के अनुसार करता है। जैसे, कुछ लोग शुरुआत में मैट, बॉल या फिर रिंग्स की मदद से पिलाटे करते हैं। हालांकि, आगे चलकर शरीर की ज़रूरत के अनुसार आप बैरल, कैडिलैक और रिफॉर्मर जैसी स्प्रिंग-लोडेड मशीनों का उपयोग कर पिलाटे कर सकते हैं।

सबसे ज़रूरी बात यह है कि आपको कभी भी इंटरनेट पर वीडियोज़ देखकर पिलाटे नहीं करना चाहिए। इससे आपकी सेहत को नुकसान पहुंच सकता है। बेहतर होगा कि आप किसी सर्टिफाइड ट्रेनर से पिलाटे सीखें।