आपने मसल्स स्पाज़म के बारे में तो सुना ही होगा, मांसपेशियों से जुड़ी अन्य समस्याओं के बारे में आप जानते होंगे, लेकिन क्या कभी आपने टेक्स्ट नेक के बारे में सुना है? यह नाम सुनकर आप क्या समझ पाते हैं? दरअसल एक रिसर्च के बाद इस शब्द को लोगों के सामने लाया गया है। ऑस्ट्रेलिया में करीब ढाई सौ लोगों पर की गई एक रिसर्च में वैज्ञानिकों ने जाना कि आजकल लोगों को कई ऐसी शारीरिक समस्याएं हो रही हैं, जिसकी वजह आपका मोबाइल फोन है। टेक्स्ट नेक भी ऐसी ही शारीरिक समस्या है, जिससे आजकल की युवा पीढ़ी के साथ-साथ कई कामकाजी लोग भी जूझ रहे हैं। आइए जानते हैं इस समस्या के बारे में कुछ और।

क्या थी यह रिसर्च?

इस तरह मांसपेशियों में हुए दर्द को टेक्स्ट नेक या टेक्स्ट सिंड्रोम का नाम दिया गया है

दरअसल ऑस्ट्रेलिया में वैज्ञानिकों ने ढाई सौ लोगों पर एक रिसर्च की, जिसके अनुसार उन्होंने यह निष्कर्ष निकाला कि मोबाइल फोन के इस्तेमाल की वजह से आपकी गर्दन और पीठ पर बुरा असर होता है। मोबाइल इस्तेमाल करते वक्त हमारी गर्दन झुकी हुई होती है और पीठ सिकुड़ जाती है, जिसकी वजह से शरीर में दर्द रहने की शुरुआत होती है। इस तरह मांसपेशियों में हुए दर्द को टेक्स्ट नेक या टेक्स्ट सिंड्रोम का नाम दिया गया है। इस रिसर्च से पता चला है कि इस समस्या से पीड़ित लोग अब धीरे-धीरे बढ़ते जा रहे हैं। वैज्ञानिकों की मानें तो कुल आबादी के 50 फ़ीसदी लोग टेक्स्ट नेक से जूझ रहे हैं।

जब लोगों को लगता है कि उन्हें गर्दन और कंधे में दर्द है, तो वे यह समझ नहीं पाते इसकी वजह उनका मोबाइल है और वे टेक्स्ट नेक सिंड्रोम के शिकार हो चुके हैं। जिसकी वजह से उन्हें अंत में जाकर फिज़ियोथेरेपी करवानी पड़ती है और वे लगातार मांसपेशियों में थकान और दर्द के शिकार बने रहते हैं।

मोबाइल की गिरफ्त में लोग

इसी रिसर्च के दौरान यह बात सामने आई है कि भारत में प्रति व्यक्ति 3 घंटे मोबाइल का इस्तेमाल किया जाता है। वहीं अमेरिका इसमें सबसे आगे है। अमेरिका में मोबाइल के इस्तेमाल की अवधि 5 से 6 घंटों की होती है।वहीं दूसरी ओर चीन एक ऐसा देश है, जहां लोग 3 से 4 घंटे मोबाइल में बिताते हैं। इस तरह टेक्स्ट सिंड्रोम आज की युवा पीढ़ी को ही नहीं, बल्कि ऑफिस में काम करने वाले लोगों को भी अपनी गिरफ्त में ले रहा है।

क्या कहते हैं डॉक्टर?

इस तरह मांसपेशियों में हुए दर्द को टेक्स्ट नेक या टेक्स्ट सिंड्रोम का नाम दिया गया है

डॉक्टर शिनॉय की माने तो टेक्स्ट नेक का इलाज ना करने पर रीढ़ की हड्डी में हमेशा के लिए समस्या हो सकती है। मांसपेशियों में अकड़न और ऐंठन के साथ साथ दर्द रहने पर हाथों और गर्दन में के कुछ हिस्सों में झुनझुनाहट का एहसास होता है, जिससे आपको लंबे समय में गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। आगे चलकर टेक्स्ट सिंड्रोम सर्वाइकल जैसी समस्या में भी परिवर्तित हो सकता है। काम करते वक्त सही पोश्चर का इस्तेमाल ना किया जाए तो गर्दन के आसपास तनाव बढ़ता है, जिसकी वजह से हड्डियों में टेम्पररी समस्या हो सकती है। यदि लंबे समय तक इस समस्या को नज़रअंदाज़ किया गया, तो आपको स्लिप डिस्क जैसी समस्या से भी जूझना पड़ सकता है।

क्या है इलाज?

यदि किसी भी व्यक्ति को टेक्स्ट सिन्ड्रोम के बारे में पता चले, तो जल्द से जल्द इसे फिज़ियोथैरेपी और दवाइयों के ज़रिए ठीक किया जा सकता है। लेकिन यदि यह लंबे समय तक रहे, तो ऐसे मामलों में सर्जरी की मदद लेनी पड़ सकती है। जैसा कि आप सभी जानते हैं हमारे ऊपरी शरीफ का भार रीढ़ की हड्डी पर होता है, जिसकी वजह से यदि हम लगातार सिर को झुका कर और झुक कर बैठे, तो यह आपकी मांसपेशियों और रीढ़ की हड्डी को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसीलिए टेक्स्ट सिंड्रोम का इलाज आपके लिए बेहद ज़रूरी हो जाता है।

यदि आप भी मांसपेशियों में दबाव, ऐंठन, अकड़न और दर्द की समस्या से जूझ रहे हैं, तो डॉक्टर से इसका इलाज जल्द से जल्द करवाएं। जिससे आगे चलकर आपको रीढ़ की समस्या से जूझना ना पड़े।

मेरी आवाज़ ही पहचान है! संगीत मेरी कल्पना को पंख देता है.. किताबी कीड़ा, अडिग, जिद्दी, मां की दुलारी.. प्राणी प्रेम ऐसा कि लोग मुझे लगभग पागल समझते हैं! खाने के लिए जीनेवाली और हद दर्जे की बातूनी.. लेकिन मेरा लेखन आपको बोर नहीं करेगा..