इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप कैसे स्मोक करते हैं, तम्बाकू आपके स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। एसीटोन और टार से निकोटीन और कार्बन मोनोऑक्साइड तक तम्बाकू प्रोडक्ट्स में किसी भी तरह का कोई सेफ सब्सटेंस नहीं है। आप जिन पदार्थों को सांस के जरिए अंदर लेते हैं, वे सिर्फ आपके फेफड़ों को प्रभावित नहीं करते हैं बल्कि आपकी पूरे शरीर को प्रभावित करते हैं।

सिद्धांत रेडक्रॉस हॉस्पिटल,भोपाल के डॉक्टर सुबोध वार्ष्णे के मुताबिक, स्मोकिंग से शरीर में कई तरह के कॉम्प्लिकेशन हो सकते हैं, साथ ही आपके शरीर की प्रणाली पर लंबे समय तक प्रभाव भी पड़ सकता हैं। स्मोकिंग कई सालों तक आपकी कई तरह की समस्याओं का खतरा बढ़ा सकता है, लेकिन कुछ शारीरिक प्रभाव तत्काल होते हैं। सिगरेट में लगभग 600 तत्व होते हैं, जो सिगार और हुक्के में भी पाए जाते हैं। अमेरिकन लंग एसोसिएशन के अनुसार जब ये तत्व जलते है, तो वे 7,000 से अधिक कैमिकल्स जनरेट करते हैं। इनमें से ज्यादातर कैमिकल्स जहरीले होते हैं और उनमें से कम से कम 69 कैंसर से जुड़े हैं। वर्ल्ड एंटी तंबाकू डे पर नजर डालते हैं शरीर पर धूम्रपान से होने वाले नुकसानों के बारे में

हड्डियां भी होती हैं कमजोर

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स्मोकिंग आपको थोड़े देर के लिए अच्छे मूड में ले जाती है लेकिन इस पर निर्भर रहने से इसके साइड इफेक्ट्स होते हैं, तो आप चिड़चिड़ापन और उदास महसूस करते हैं। स्मोकिंग करने की वजह से तम्बाकू आपके बालों और कपड़ों में भी चिपक जाती है। इसकी वजह से आपके कपड़े और बालों में से भी बदबू आती है।
यदि आपके दांत पीले और ब्राउन कलर के हैं तो इससे साफ जाहिर होता है कि आप लंबे समय से स्मोकिंग कर रहे हैं। स्मोकिंग करने से ये रिस्क बढ़ जाती है कि आपके दांत और हड्डियां टूट सकते हैं। स्मोकर्स में ब्रोंकाइटिस हाई रेट में पाया जाता है। स्मोकिंग की वजह से इसके बढ़ने की संभावना ज्यादा होती है। ये बच्चों को भी इफेक्ट करता है। स्मोकिंग से टीबी और निमोनिया होने का खतरा ज्यादा रहता है।

स्मोक करने की वजह से एचडीएल कोलेस्ट्रोल कम होता है। ये ओवरऑल कोलेस्ट्रोल भी बढ़ाता है, जिससे आपके खून में फैट बढ़ता है।

प्रेग्नेंसी के दौरान स्मोकिंग करने से मिसकैरेज होने की संभावना बढ़ जाती है। यहीं नहीं अस्थमा, ईयर इन्फेक्शन्स और नवजात बच्चे की मौत भी हो सकती है। इससे बच्चों के ऑक्सीजन लेने, बढ़ने और कई फिजिकल प्रॉबल्म हो सकती है।

स्मोकिंग से आपकी बॉडी में ब्लड क्लोटिंग भी हो सकती है। ब्लड क्लोटिंग होने से हार्ट के लिए खतरा बढ़ जाता है।
तंबाकू का धुआं आपके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। स्मोकिंग करने का कोई सिक्योर तरीका नहीं है। सिगार, पाइप या हुक्का के साथ अपनी सिगरेट को बदलने से आपको स्वास्थ्य के खतरे से बचने में मदद नहीं मिलेगी।

इन अंगों पर पड़ता है असरइन अंगों पर पड़ता है असर

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सेंट्रल नर्वस सिस्टम

तम्बाकू के इंग्रीडेंट में से एक मूड अल्टरिंग ड्रग्स है, जिसे निकोटीन कहा जाता है। निकोटीन आपके ब्रेन तक मात्र सेकंड में पहुंचता है और आपको थोड़ी देर के लिए अधिक ऊर्जावान महसूस कराता है। लेकिन जैसा ही यह प्रभाव खत्म होता है, आप थका हुआ महसूस करते हैं। निकोटीन एक आदत बनाने वाला ड्रग है, यही वजह है कि लोगों को स्मोकिंग छोड़ना मुश्किल लगता है।

रेस्पीरेटरी सिस्टम

जब आप स्मोकिंग करते हैं, तो आप उन पदार्थों को ले रहे हैं जो आपके फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। समय के साथ, यह डेमेज कई प्रकार की समस्याओं को जन्म देती है। बढ़े हुए इन्फेक्शन के साथ, जो लोग अपनी रिस्क पर स्मोकिंग करते हैं उन्हें अपने खराब फेफड़ों की स्थिति के लिए जोखिम उठाते हैं, जैसे—

– एम्फायसेमा (फेफड़ों में अवरोध), हवा का विनाश आपके फेफड़ों में होता है
– क्रोनिक ब्रोंकाइटिस, स्थाई सूजन जो फेफड़ों की श्वास नलियों को प्रभावित करती है
– फेफड़े के रोगों का एक समूह क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिसीज (COPD)
– फेफड़ों का कैंसर

जिन बच्चों के माता-पिता स्मोकिंग करते हैं, उन बच्चों में खांसी और अस्थमा के दौरे पड़ने की संभावना अधिक होती है। उनमें निमोनिया और ब्रोंकाइटिस भी हायर रेट पर होते हैं। स्मोकिंग आपके पूरे कार्डियोवेस्कुलर सिस्टम को नुकसान पहुंचाता है। निकोटीन ब्लड वेसल्स को कसने का कारण बनता है, जो ब्लड फ्लो को रोकता है। समय के साथ, ब्लड वेसल्स को नुकसान के साथ-साथ पेरिपेहरल अर्टरी डिजीस का कारण बन सकती है।

स्मोकिंग भी ब्लड प्रेशर बढ़ाता है, ब्लड वेसल्स की दीवारों को कमजोर करता है और खून के थक्कों को बढ़ाता है। साथ में यह आपके स्ट्रोक का खतरा बढ़ाता है। यदि आपकी पहले से ही हार्ट की बाईपास सर्जरी, दिल का दौरा पड़ने या ब्लड वेसल्स में स्टेंट है, तो आपकी हार्ट डिसीज के बिगड़ने का खतरा बढ़ जाता है।

स्मोकिंग न केवल आपके दिल के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, बल्कि आपके आसपास के उन लोगों के स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है जो स्मोकिंग नहीं करते हैं। सेकेंड हैंड धुएं के संपर्क में आने वाले व्यक्ति को स्मोकिंग करने वाले की तरह ही खतरा हो सकता है। इसमें स्ट्रोक, दिल का दौरा और हार्ट डिसीज शामिल हैं।

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