अक्सर आपने लोगों को कहते सुना होगा कि हंसने से खून बढ़ता है या हंसने से सेहत को कई फायदे होते हैं। लेकिन आप शायद नहीं जानते कि रोने से भी आपकी सेहत को नुकसान नहीं, बल्कि फायदा ही होता है। आपको शायद यकीन न आए, लेकिन ये सच है। क्योंकि रोना एक अभिव्यक्ति है, जिसकी मदद से आप स्वस्थ रह सकते हैं। आइये जानते हैं रोने के उन फायदों के बारे में, जिसके बारे में आपको आज तक किसी ने नहीं बताया।

कितने प्रकार के आंसू?

इंसान ही एक ऐसा जीव है, जो तीन तरह से रो सकता है

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आज एक बात और आपको हैरान कर सकती है, जो है आंसुओं के प्रकार। जी हां, आंसू भी तीन प्रकार के होते हैं, रेफलेक्सिव, इमोशनल और साइकिक, जो अलग-अलग समय पर आते हैं। इंसान ही एक ऐसा जीव है, जो तीन तरह से रो सकता है। लेकिन इन तीनों प्रकारों में से इमोशनल होकर रोना आपके लिए बेहद फायदेमंद है। आइये जानते हैं कैसे।

मूड को बनता है अच्छा

आपको शायद सुनने में ये अजीब लगे, लेकिन ये सच है कि रोने से आपका मूड अच्छा हो सकता है। दरअसल जब आप रोते हैं, तो आपके मन का बोझ उतर जाता है और आप हल्का महसूस करते हैं। यदि आप मूड खराब होने के बाद रोते हैं, तो उसे 90 मिनट के बाद आपका मूड खुद ब खुद अच्छा हो जाएगा। ये हम नहीं कह रहे। बल्कि ये नीदरलैंड में वैज्ञानिकों द्वारा की गई एक स्टडी में पाया गया है।

तनाव होता है उड़न छू

यदि आप दिन भर की थकान के कारण तनाव महसूस कर रहे हैं, तो घर जाकर ज़रूर रोइये। क्योंकि ऐसा करने पर तनाव की वजह से शरीर में बननेवाले कैमिकल बाहर निकल जाते हैं और कुछ देर रोने के बाद आप अच्छा महसूस करने लगते हैं। इससे दिमाग और हृदय को क्षति नहीं पहुंचती और आप तनाव की स्थिति से बाहर निकल जाते हैं। साथ ही आप कुछ देर बाद ख़ुशी महसूस करते हैं।

आंखों के लिए फायदेमंद

आंसुओं में लाइसोज़ाइम नामक तत्व होता है, जो एंटी बैक्टेरियल और एंटी वायरल होता है

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जी हां, रोना आंखों को हानि नहीं, बल्कि फायदा पहुंचाती है। प्रदुषण की वजह से कई हानिकारक तत्व आंखों के आसपास जमा होने लगते हैं, ऐसे में रोने की वजह से ये सभी तत्व बाहर निकल जाते हैं। आंसुओं में लाइसोज़ाइम नामक तत्व होता है, जो एंटी बैक्टेरियल और एंटी वायरल होता है। इसलिए रोने से आंखें साफ़ हो जाती हैं।

क्यों महिलाऐं रोती हैं और पुरुष नहीं?

यदि आप ऐसा मानते हैं कि महिलाऐं कमज़ोर होती हैं इसलिए रोती हैं और पुरुष नहीं, तो आपको ये बात ज़रूर जाननी चाहिए। असल में महिलाओं के शरीर में प्रोलैक्टिन नामक हार्मोन होता है, जो उन्हें रोने के लिए प्रेरित करता है। वहीं पुरुषों में प्रोलैक्टिन की जगह टेस्टोस्टेरोन होता है, इसलिए ज़रुरत पड़ने पर भी पुरुष रो नहीं पाते। लेकिन इससे भी ज़्यादा पुरुषों में न रोने की वजह लैंगिक है, जो उन्हें रोने से होनेवाले फायदों से वंचित रखता है।

इसलिए रोने से कतराना नहीं चाहिए और ज़रुरत पड़ने पर दिल खोल कर रो लेना चाहिए।

मेरी आवाज़ ही पहचान है! संगीत मेरी कल्पना को पंख देता है.. किताबी कीड़ा, अडिग, जिद्दी, मां की दुलारी.. प्राणी प्रेम ऐसा कि लोग मुझे लगभग पागल समझते हैं! खाने के लिए जीनेवाली और हद दर्जे की बातूनी.. लेकिन मेरा लेखन आपको बोर नहीं करेगा..