मिर्गी यानी एपिलेप्सी के बारे में बहुत बातें और चर्चाएं होती हैं, लेकिन फिर भी हमें इससे जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें नहीं पता होती। दरअसल मिर्गी एक तंत्रिकातंत्रीय विकार यानी न्युरॉजिकल डिसॉर्डर है, जिसमें मस्तिष्क में गड़बड़ी के कारण रोगी को बार बार दौरे पड़ते है।

आज नेशनल एपीलेप्सी डे पर हमने कोशिश की है कि हम इससे जुड़े पांच मिथक और भ्रम के बारे में लोगों को बताएं। आप इस लेख को पढ़ कर इस विकार के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

पहला भ्रम- क्या मिर्गी एक दिमागी बीमारी हैं?

मिर्गी दिमागी गड़बड़ी के कारण है, लेकिन यह एक दिमागी बीमारी नहीं। हालांकि मिर्गी के शिकार कुछ लोगों में डिप्रेशन, एनजाइटी, ऑटिज़्म और अल्ज़ाइमर जैसे सिनड्रोम पाए गए है।

दूसरा भ्रम – क्या यह आनुवांशिक है

इस बात में कोई दो राय नहीं कि यह रोग आनुवांशिक हो सकता है, लेकिन सिर्फ यही इसका कारण नहीं। यह किसी भी इंसान को कभी भी और किसी भी उम्र में हो सकता है। यह 5 साल से लेकर 60 साल उम्र में कभी भी हो सकता है। हालांकि इसके पीछे के कारण का पता लगाना मुश्किल है, लेकिन ब्रेन ट्यूमर, दिमाग पर लगी गंभीर चोट , दिल की बीमारी या फिर किसी तरह का आघात इसके कारण हो सकते हैं।

तीसरा भ्रम – दौरे आसपास के लोगों के लिए खतरनाक हो सकते हैं

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हालांकि मिर्गी के दौरे कब आएंगे इसका कोई समय निश्चित नहीं और ना ही दौरों से पहले किसी तरह की चेतावनी या लक्षण देखे जा सकते हैं, लेकिन एक बात निश्चित है कि इन दौरों से आसपास के लोगों को कोई खतरा नहीं होता। हर बार आने वाले दौरों का समय, अंतराल और लक्षण अलग अलग होते हैं। दौरों के दौरान आपको यह भयानक ज़रुर लगे, लेकिन यह खतरनाक बिल्कुल नहीं।

चौथा भ्रम – मिर्गी से पीड़ित व्यक्ति को स्ट्रेस वाले पेशे में नहीं जाना चाहिए

मिर्गी का मतलब यब बिल्कुल नहीं कि व्यक्ति अपाहिज है। मिर्गी वाला व्यक्ति भी एक सामान्य ज़िंदगी जी सकता है। हालांकि कुछ लोगों के साथ ऐसा होता है कि उन्हें बहुत ही गंभीर दौरे पड़ते हो, लेकिन अक्सर देखा गया है कि इससे पीड़ित लोग अपने पेशे में उतना ही बेहतर प्रदर्शन करते है, जितने की सामान्य लोग।

पांचवा भ्रम – मिर्गी संक्रामक रोग है

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मिर्गी से पीड़ित व्यक्ति के संपर्क में आ जाने के आपको यह बीमारी नहीं हो सकती

एपिलेप्सी यानी मिर्गी एक संक्रामक रोग नहीं। यह किसी के छूने, ख़ासी करने या फिर इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति की चीज़ो का इस्तेमाल करने से नहीं फैलता। कई लोगों को यह भी भ्रम है कि इसका इलाज दवाई से नहीं किया जा सकता। जबकि सच्चाई यही है कि डॉक्टर की सलाह पर दी गई दवाइयों के सेवन से इस पर एक हद तक काबू पाया जा सकता है।

दरअसल इस विकार के बारे में खुद को एजुकेट करके ही इसका निदान खोजा जा सकता है। हालांकि मिर्गी के बारे में जागरुकता फैलाने में थोड़ा समय ज़रुर लगेगा, लेकिन इस बात का हमेशा ध्यान रहे कि इस विकार से पीड़ित व्यक्ति के साथ किसी भी तरह का भेदभाव ना किया जाए। वो भी आपकी और हमारी ही तरह है।