अक्सर अपने लोगों को कहते सुना होगा कि बाई आंख फड़कने से आपके साथ कुछ अशुभ होने वाला है और दाई आंख फड़कने से आपका दिन शुभ जाएगा। लेकिन क्या सचमुच आंखें फड़कना शुभ-अशुभ की निशानी होती है? यदि आप इसके पीछे की सच्चाई जानना चाहते है, तो यह खबर आपके लिए ही है। दरअसल आंख फड़कने का कारण आपकी सेहत से जुड़ा होता है। सबसे पहली बात यह बात हम आपको बताना चाहते हैं कि कभी भी आंखें नहीं फड़कती, बल्कि पलके फड़कती हैं। आंखों के आसपास की मांसपेशियों में परिवर्तन की वजह से इसमें फड़फड़ाहट होती है। इसे यह एक अलग तरह का एक्शन होता है जो बिल्कुल आम बात है। पलकों के फड़कने को मायोकीमिया कहा जाता है। अगर आप जानना चाहते हैं कि आंखों के फड़कने की वजह क्या है? तो आइए हम आपको बताते हैं।

क्या है आंखों के फड़कने की वजह?

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आंखों के आसपास के मांसपेशियां अचानक जब सिकुड़ जाती है, तो पलक फड़कने लगती है

आंखों का फड़कना एक इंवॉलंटरी एक्शन है, जिसे मायोकीमिया कहा जाता है। इंवॉलंटरी एक्शन वह होता है, जो हमारे कंट्रोल में ना हो। इसीलिए पलकों के फड़कने को इससे जोड़ा जाता है। आंखों के आसपास के मांसपेशियां अचानक जब सिकुड़ जाती है, तो पलक फड़कने लगती है। हालांकि इसमें दर्द का एहसास नहीं होता और ना ही कोई नुकसान होता है, लेकिन अगर यह बार-बार हो तो समझ लेना चाहिए कि आप अपनी सेहत को नज़रअंदाज़ कर रहे हैं। आइए हम आपको बताते हैं क्यों फड़कती है पलक?

पलक फड़कने के हैं कई कारण

आंखों में ड्राइनेस होने की वजह से भी पलकें फड़कती है

खास तौर जब आप ज्यादा काम कर लेते हैं, तो थकान की वजह से आंखों की मांसपेशियों में जकड़न हो जाती है, जिसकी वजह से पलकें फड़कने लगती है। वहीं यदि आप तनाव में हैं, तो तनाव की वजह से भी आंखों के मांसपेशियों पर असर पड़ता है और इससे पलकें फड़कना बेहद आम हो जाता है।

कई बार नींद पूरी ना होने की वजह से और आंखों में ड्राइनेस होने की वजह से भी पलकें फड़कती है। वहीं यदि आप कोई ऐसा काम करते हैं, जिसमें आपको कई घंटों तक लगातार लैपटॉप पर ध्यान केंद्रित करना हो, तो इस रोशनी की वजह से आपकी पलकें फड़कती है। यदि आपने ज्यादा शराब या कैफीन वाली ड्रिंक पी हो, तब भी आंखों की मांसपेशियों में सिकुड़न हो जाती है और इससे पलकें फड़कने की समस्या हो सकती है।

पलकें फड़कने से कैसे रोकें?

कम से कम 8 घंटे की नींद लेना आपके लिए बेहद ज़रूरी है।

यदि आप पलकों के फड़कने से परेशान हैं, तो कम से कम 8 घंटे की नींद लेना आपके लिए बेहद ज़रूरी है। इससे आपका तनाव भी कम होगा और स्ट्रेस कम होने की वजह से यह समस्या दूर हो जाएगी। साथ ही यदि आप लंबे समय तक लैपटॉप स्क्रीन पर ध्यान केंद्रित किए रहते हैं, तो आंखों में ड्रायनेस होना आम बात होती है,इसलिए आय ड्रॉप्स का इस्तेमाल करना आपके लिए फायदेमंद होगा। साथ ही कुछ समय तक शराब और कैफीन से जुड़ी हुई चीजों का सेवन कम करें।

यदि आप किसी देसी उपाय की खोज में हैं, तो पलकों के फड़कने के दौरान आंखों के आसपास की मांसपेशियों को उंगलियों से हल्की-हल्की मालिश करें। साथ ही गर्म और ठंडे पानी की पट्टियां लगाएं और साथ ही थोड़ी देर के लिए आंखों को बंद करके आराम करें।

ध्यान रखने वाली बात यह है कि यदि आपकी पलकें लगातार फड़क रही है, यहां तक कि आंखें बंद करने के बाद भी इनका फड़कना कम नहीं हो रहा, तो इस समस्या को ब्लेफेरोस्पाज़म कहा जाता है। कहा जाता है यह समस्या हमारे सेंट्रल नर्वस सिस्टम से जुड़ी होती है, इसलिए इसका इलाज सिर्फ डॉक्टर के पास है। ये आंखों के स्पाज़्म से जुड़ा हो सकता है। इसीलिए अगर लगातार पलकें फड़कने की समस्या हो, तो आपको डॉक्टर को ज़रूर दिखाना चाहिए।

इस तरह पलकों का फड़कना किसी शुभ-अशुभ स्थिति को नहीं, बल्कि आपकी सेहत को दर्शाता है।

मेरी आवाज़ ही पहचान है! संगीत मेरी कल्पना को पंख देता है.. किताबी कीड़ा, अडिग, जिद्दी, मां की दुलारी.. प्राणी प्रेम ऐसा कि लोग मुझे लगभग पागल समझते हैं! खाने के लिए जीनेवाली और हद दर्जे की बातूनी.. लेकिन मेरा लेखन आपको बोर नहीं करेगा..