अर्ध कुंभ का शुभारम्भ हो चुका है। कुंभ की शुरुआत मकर संक्रांति के स्नान से हुई और अब इसका अंतिम स्नान महाशिवरात्रि के दिन 4 मार्च को होगा। लेकिन क्या आप जानते हैं कि श्रद्धालु अर्ध कुंभ के दौरान अपने घर नहीं लौटते, बल्कि वा कुंभ स्थल में ही साधु-संतों के सानिध्य में रहते हैं। इन लोगो के रहने की ख़ास व्यवस्था प्रशासन करती है। कुंभ की शुरुआत से अंत तक जो श्रद्धालु वहां रहते हैं, वे कल्पवास का पालन करते हैं।

आपको जान कर हैरानी होगी कि इस कल्पवास के बहुत से सेहतमंद फायदे है, जो कुंभ स्थान पर रहने वाले लोगों को होते हैं। आइये जानते हैं कल्पवास कैसे आपकी सेहत को निखार कर आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।

क्या है कल्पवास?

कल्पवास के दौरान वे एक दिनचर्या का पालन करते हैं, जो कुंभ के लिए खास तौर पर चुनी गई है

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कल्पवास उस अवधि को कहा जाता है, जिसमें लोग कुंभ के शुरुआत से अंतिम स्नान तक कुंभ स्थल में ही रहते हैं। इस दौरान वे गंगा स्नान, साधू-संतों के सानिध्य में संत्संग करते हुए और ईश प्रार्थना में दिन बिताते हैं। कल्पवास के दौरान वे एक दिनचर्या का पालन करते हैं, जो कुंभ के लिए खास तौर पर चुनी गई है। इस दिनचर्या का करीब 3 महीनों तक पालन करने के बाद उनका कल्पवास ख़त्म होता है। लेकिन ये कल्पवास श्रद्धालुओं की सेहत को खास तौर पर फायदा पहुंचाता है।

क्या है कल्पवास की दिनचर्या?

ब्रम्ह मुहूर्त यानी सूर्योदय से पहले उठकर गंगा स्नान,

पूरे दिन में सिर्फ एक बार भोजन करना, जो पूरी तरह से सात्विक हो

किसी भी परिस्थिति में, चाहे आपका मन ना मान रहा हो, मेले के क्षेत्र को छोड़कर ना जाना

हर सुख-सुविधा का त्याग करके ज़मीन पर सोना

समय मिलने पर धार्मिक पुस्तकों का पठन और मंत्र जाप

मन को गलत ख़याल और झूठे प्रलोभनों से दूर रखना

गंगा जल का पान करना और संतों का प्रवचन सुनना

इन सभी कामों को दैनिक रूप से करना कल्पवास का प्रमुख अंग है।

क्या हैं कल्पवास के फायदे?

कुंभ से लौटने के बाद हम लम्बे समय तक बीमार नहीं पड़ते।

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कल्पवास करने से आपको अनेक फायदे हो सकते हैं। वैज्ञानिकों की माने तो हमारा शरीर तब ज़्यादा एंटीबॉडीज़ बनाता है, जब हम ज़्यादा लोगों के संपर्क में आते हैं। दूसरों के संपर्क में आने से उनके द्वारा नए रोगों के जीवाणु हमारे आस-पास होते हैं, जिसकी वजह से शरीर ज़्यादा एंटीबॉडीज़ बनाता है और हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। इस तरह कुंभ से लौटने के बाद हम लम्बे समय तक बीमार नहीं पड़ते।

इसके अलावा कल्पवास की दिनचर्या जब हम अपनाते हैं, तो हमारे शरीर के विषाणु और विषाक्त पदार्थ बाहर निकलते हैं। इससे हमारा शरीर अंदर से साफ़ होता है और शरीर को कई फायदे होते हैं। दिन में एक बार खाना खाने से हमारे पाचन तंत्र को आराम मिलता है और इससे पेट सम्बन्धी समस्याएं दूर होती हैं। इसके अलावा दिन भर शांत वातावरण में रहने से और साधु-संतों के सानिध्य में समय बिताने से हमारा मन शांत होता है। इससे मानसिक रूप से हम बेहतर बनते चले जाते हैं और अवसाद और मन से जुड़ी समस्याओं से हमें छुटकारा मिलता है।

इस तरह कुंभ के दौरान हमारे शरीर को कई प्रकार से फायदा होता है। इसलिए कल्पवास करने की सलाह घर के बड़े-बूढ़े देते हैं।

मेरी आवाज़ ही पहचान है! संगीत मेरी कल्पना को पंख देता है.. किताबी कीड़ा, अडिग, जिद्दी, मां की दुलारी.. प्राणी प्रेम ऐसा कि लोग मुझे लगभग पागल समझते हैं! खाने के लिए जीनेवाली और हद दर्जे की बातूनी.. लेकिन मेरा लेखन आपको बोर नहीं करेगा..