आज के वर्क कल्चर को देखते हुए ये कहा जा सकता है कि आज के समय में व्यक्ति काम करने के समय से बंधा हुआ नहीं है, क्योंकि आज के वर्क कल्चर में रात हो या दिन लोग किसी भी वक्त काम करते हुए दिखाई देंगे। लेकिन इतने लम्बे समय तक लगातार काम करने की वजह से सबसे ज़्यादा तकलीफ़ होती है हमारी आंखों को। अक्सर हम लोगों को रात के अंधेरे में या कम रौशनी में काम करते हुए देखते हैं, लेकिन लोग ये नहीं समझ पाते कि कम रौशनी में काम करना उनकी आंखों को कितना नुक्सान पहुंचा सकता है। आइये जानते हैं कम रौशनी में काम करने की वजह से हमें किन समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

आंखों पर असर

लगातार आंखों की पुतलियां फैली रहने की वजह से आंखें कमज़ोर होने लगती है

जैसा कि आपने बचपन में अपने माता-पिता को कहते हुए सुना होगा कि कम रौशनी में नहीं पढ़ना चाहिए, यह बात बिल्कुल सही है। क्योंकि कम रौशनी में पढ़ने से आंखों में ज़ोर पड़ता है और आपकी आंखों को नुकसान पहुंच सकता है। इससे ना केवल आपके देखने की क्षमता को नुकसान पहुंचता है, साथ ही इससे सिरदर्द भी की भी शिकायत हो सकती है। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉक्टर नीलेश जैन की माने तो जब आप कम रौशनी में देखने की कोशिश करते हैं, तब रेटिना के ज़रिए आंखें ज्यादा रौशनी लेने की कोशिश करती हैं और इससे आंखों की पुतलियां फैल जाती है। लगातार आंखों की पुतलियां फैली रहने की वजह से आंखें कमज़ोर होने लगती है।

रेटिना के अंदरूनी भाग में जो कोशिकाएं होती है, वह रोशनी की मात्रा का आंकलन कर दिमाग को संदेश भेजती है, इसी से पता चलता है कि देखने के लिए आपको कितनी रौशनी की जरूरत है। भले ही रौशनी के मुताबिक आंखें खुद को ढाल लेती हैं, लेकिन कम रौशनी होने की वजह से आंखों को ज़्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इसी वजह से लोगों को आगे चल कर माइग्रेन और सिरदर्द से भी जूझना पड़ता है।

बैक पेन की शिकायत

आप शायद नहीं जानते होंगे कि कम रौशनी में पढ़ने की वजह से आपको बैक, गर्दन और शोल्डर पेन की समस्या हो सकती है। जब आप आसानी से चीजें नहीं देख पाते, तो मोबाइल की स्क्रीन, लैपटॉप या किताब की तरफ ज्यादा झुक कर पढ़ने की कोशिश करते हैं। इस पोजीशन में ज्यादा देर तक रहने से आपकी गर्दन, पीठ और कंधों पर जोर पड़ता है। लंबे समय तक इसी स्थिति में रहने की वजह से आपको पीठ से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

जब कम रौशनी में काम करते हैं, तो आपका कॉन्सन्ट्रेशन नहीं बनता

नहीं होता बेहतर काम

जब आप कोई काम करते हैं, तो उसमें ध्यान लगाना आपके लिए बेहद ज़रूरी हो जाता है। बगैर कॉन्सेंट्रेशन से किया हुए काम में आपको नुकसान होता है। जब कम रौशनी में काम करते हैं, तो आपका कॉन्सन्ट्रेशन नहीं बनता और इसकी वजह से आपका ध्यान भटकता है। जिससे आपका काम प्रभावित होता है और आपसे काम में गड़बड़ी हो सकती है।

डिप्रेशन की समस्या को न्योता

जहां एक और ऐसा माना जाता है कि कम रौशनी आपको आराम देने के लिए है, वहीं यदि कम रौशनी में शरीर को काम करने पर मजबूर किया जाए, तो डिप्रेशन की समस्या हो सकती है। अक्सर डिप्रेशन के मरीज़ कम रौशनी में रहना पसंद करते हैं, क्योंकि उन्हें ज्यादा रोशनी में जाना पसंद नहीं होता। यदि आप लंबे समय तक कम रौशनी में रहते हैं, तो आपको अवसाद के साथ-साथ दिमागी रूप से अन्य समस्याओं का सामना भी करना पड़ सकता है।

तो अब आपने जाना कि कम रौशनी में काम करना आपके लिए कितना हानिकारक हो सकता है?

मेरी आवाज़ ही पहचान है! संगीत मेरी कल्पना को पंख देता है.. किताबी कीड़ा, अडिग, जिद्दी, मां की दुलारी.. प्राणी प्रेम ऐसा कि लोग मुझे लगभग पागल समझते हैं! खाने के लिए जीनेवाली और हद दर्जे की बातूनी.. लेकिन मेरा लेखन आपको बोर नहीं करेगा..