२०१२ से हर साल जून का पहला दिन, यानि कि १ जून, ग्लोबल डे ऑफ़ पेरेन्ट्स के तौर पर दुनिया भर में मनाया जाता है। ये दिन यू.एन. द्वारा घोषित किया गया है और हर साल माता पिता को समर्पित है।

अपने माता पिता के साथ वक़्त बिताने के तो कई तरीके होते हैं ,इस दिन हो सके तो उनके साथ वक़्त बिताने के साथ साथ एक और चीज़ का ध्यान रखना बेहद ज़रुरी है और वो है उनकी सेहत का, जिसके लिए आज का दिन एक दम सही है। आज के दिन आप उन्हें उनकी सेहत से जुड़ा खास गिफ्ट दे सकते हैं।

ये कुछ ऐसे टेस्ट्स और इलाज हैं, जो ख़ास तौर पर बुज़ुर्गों के लिए ज़रूरी है।

दिल के लिए लिपिड टेस्ट

इस टेस्ट से डॉक्टर्स को शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा का पता चलता है। इससे दिल के दौरे या स्ट्रोक के खतरे के बारे में भी पता चलता है, इसलिए ये बहुत ही ज़रूरी है। टेस्ट्स के आधार पर डॉक्टर दवाई और खाने पीने जैसी चीज़ों पर सलाह देंगें।

कोलोनोस्कोपी, ख़ास कर ५० की उम्र के बाद

अगर आपके माता पिता की उम्र ५० या अधिक है, तो ये टेस्ट उनके लिए बहुत ज़रूरी है। इस टेस्ट् से कैंसर के लक्षण भी अगर मौजूद हुए तो नज़र आ सकते हैं। ५० की उम्र के बाद से ये टेस्ट १० साल में कम से कम एक बार ज़रूर कराना चाहिए।

आंखों की जांच

उम्र के साथ आंखों में दिक्कत आ सकती है

बढ़ती उम्र के साथ ही आंखों में कई परेशानियां आती हैं, जैसे की धुंधला दिखना, ठीक से नज़र ना आना, नज़र कमज़ोर हो जाना आदि। सही वक़्त पर इलाज नहीं होने से आंखों की रोशनी जा भी सकती है। आंखों की जांच से ग्लौकोमा और कैटरेक्ट जैसी समस्याओं का भी पता चलता है।

हड्डियों की जांच

हड्डियों की जांच करने से हड्डियों की सेहत का पता चलता है और ये भी पता चलेगा की कहीं वो कमज़ोर तो नहीं हो गई। इससे ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारियों का भी पता चलता है और समय रहते ज़रूरी इलाज किया जा सकता है।

डाइबीटीज़ की जांच

४५ के उम्र के बाद ये एक बहुत ही ज़रूरी टेस्ट है, जो आपके माता पिता को करवाना चाहिए। कई लोगों को मधुमेह होता है, लेकिन समय पर इसकी जांच ना करवाने की वजह से उन्हें पता नहीं चलता।

सही वक़्त पर बीमारी का पता लगने से डॉक्टर भी सही वक़्त पर इलाज और दवाई शुरू कर सकते हैं।

डिस्क्लेमर: हालांकि हमने इस बात का पूरा ख्याल रखा है कि यहां दी गयी जानकारी सही हो, ये ज़रूरी है कि आप पहले डॉक्टर की सलाह लें। खासतौर पर कोई भी दवाई, टेस्ट, या इलाज के मामले में डॉक्टर की ही सलाह ज़रुरी है।