केरल में तटीय शहर कोझिकोड में एक ही परिवार के 3 सदस्य और उसके कुछ ही घंटो के बाद  मलप्पुरम में निपाह वायरस से हुई मौतों के कारण पूरे देश में इस वायरस की चर्चा फैल गई है। अचानक देश में नए संक्रमण से होने वाली मौतों को लेकर सरकार भी परेशान है। कहा जा रहा है कि यह वायरस संक्रमण से फैलता है, इसीलिए निपाह वायरस से ग्रसित व्यक्ति से लोगों को दूर रहने की सलाह दी गई है। यहां तक की यह संक्रमण रोगी के मरने के बाद भी दूसरों में फैल सकता है, यही वजह है कि मृतकों के शवों को परिवारजनों को ना सौंप कर,  उनसे दूर ही उनका अंतिम संस्कार किया जा रहा है। आइए जानते हैं, यह निपाह वायरस आखिर है क्या?

कहां से हुई शुरुआत

1998 में मलेशिया के कांपुंग सुंगई निपाह गांव में पहली बार इस संक्रमण को देखा गया था, इसीलिए इसे निपाह वायरस नाम दिया गया। संक्रमित होने वाले लोग सूअर पालते थे और इसी के दौरान की गई शोध में पता चला कि यह सुअर की वजह से भी फैल सकता है। इसके बाद बांग्लादेश में इसके संक्रमण के मामले सामने आए थे। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने हाल ही में एक चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि भारत और ऑस्ट्रेलिया में वायरस फैलने का सबसे अधिक ख़तरा है और केरल में इस के मामले सामने आने से खतरे की घंटी बज चुकी है।

ऐसे फैलती है बीमारी

यह बीमारी लाइलाज है। संक्रमण के बाद बीमारी को बढ़ने से रोका नहीं गया, तो 24 से 48 घंटे में मरीज़ कोमा में जा सकता है और वहीं उसकी मौत हो सकती है। फल और सब्जी खाने वाले चमगादड़ (फ्रूट बैट) और सूअर के ज़रिए निपाह वायरस तेजी से फैलता है और इसका संक्रमण जानवरों और इंसानों में भी हो सकता है।

फल और सब्जी खाने वाले चमगादड़ (फ्रूट बैट) और सूअर के ज़रिए निपाह वायरस तेजी से फैलता है
ये हैं रोग के लक्षण

इस रोग के लक्षण पहले 24 घंटे में दिखाई देने लगते हैं। रोगी को धुंधला दिखना, चक्कर आना, सिर में लगातार दर्द रहना, सांस में तकलीफ़, तेज़ बुख़ार इत्यादि लक्षण दिखाई देने लगते हैं।

कैसे बचें और कैसे रखें सावधानी

डॉ आशीष तिवारी की मानें तो निपाह वायरस से बचने के लिए अब तक कोई वैक्सीनेशन नहीं बनाया जा सका है। इसलिए इस समस्या से निपटने के लिए हमें सावधानियों का सहारा लेना ज़रूरी है। डॉ तिवारी के मुताबिक हमें उस खाने को खाने से बचना चाहिए, जिसे चमगादड़ों ने जूठा किया हो। इसलिए ज़मीन पर गिरे फल खाना किसी के लिए भी सुरक्षित नहीं है।

वहीं यदि आप मरीज़ से मिलकर आ रहे हैं, तो हाथों को ठीक से धोना और कपड़ों को सैनेटाइज़ करना ज़रूरी है। बीमार जानवरों से दूरी बनाने की लोगों को ज़रुरत है, वहीं इन दिनों खजूर खाने से लोगों को बचना चाहिए।

यदि आप मरीज़ से मिलकर आ रहे हैं, तो हाथों को ठीक से धोना और कपड़ों को सैनेटाइज़ करना ज़रूरी है

क्या आप जानते हैं इससे पहले भी भारत ऐसे ही संक्रमित रोगों की वजह से दहल चुका है। आइए जानते हैं भारत में और कौन सी घातक बीमारियों ने अपनी जड़े जमाई हैं।

सॉर्स: सवेयर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम यानी सॉर्स सांस संबंधी बीमारी है। यह कोरोना वायरस से फैलती है। यह साधारण निमोनिया से शुरू होकर घातक रूप ले सकती है। यह बीमारी 2002 में चीन में फैलने के बाद, करीब 37 देशों में अपनी जड़ें जमा चुकी थी और इसमें मरने वालों का आंकड़ा 775 बताया गया।

स्वाइन फ्लू: स्वाइन फ्लू एक प्रकार का इन्फ्लूएंजा है, जो सूअरों को प्रभावित करता है। 2009 में पहली बार एच1 एन1 वायरस के तौर पर यह सामने आया। सूअरों से संपर्क में रहनेवाले लोगों को इस बीमारी ने जकड़ा, जिसके बाद कई लोगों की मौत हुई। हर साल यह समस्या भारत में मंडराने लगती है, लेकिन इस फ्लू का इलाज अब मिल चुका है।

बर्ड फ्लू: यह एक प्रकार का रोग है, जो पक्षियों को प्रभावित करता है। खास तौर पर पोल्ट्री फॉर्म में रहने वाली मुर्गियों को, यही वजह है कि इन मुर्गियों को खाने से लोगों को भी यह समस्या हो सकती है। यह बीमारी बहुत घातक है। 2006 में यूरोप, मध्य एशिया और अफ्रीका में यह संक्रमण फैला और चीन में 2012 में बर्ड फ्लू के कारण कई मौतें हुईं। इसने भारत में भी अपने जड़ी जमाई थी, लेकिन समय रहते इससे छुटकारा पाया गया।

एबोला: यह एक संक्रमित और घातक बीमारी है, इसमें बुखार और इंटरनल ब्लीडिंग की समस्या हो सकती है। यह भी एक संक्रमित रोग है। यह बीमारी होने पर मौत की आशंका 90% तक बढ़ जाती है। इस खतरनाक बीमारी का इलाज अभी तक नहीं ढूंढा जा सका है।

यह समस्याएं आए दिन भारत में लोगों के सामने आती रहती हैं, इसलिए ज़रूरी है कि हम समय रहते इन संक्रमणों से बचें और अपनी सेहत का भरपूर ध्यान रखें।

मेरी आवाज़ ही पहचान है! संगीत मेरी कल्पना को पंख देता है.. किताबी कीड़ा, अडिग, जिद्दी, मां की दुलारी.. प्राणी प्रेम ऐसा कि लोग मुझे लगभग पागल समझते हैं! खाने के लिए जीनेवाली और हद दर्जे की बातूनी.. लेकिन मेरा लेखन आपको बोर नहीं करेगा..