अक्सर सुबह सोकर उठने के बाद भी आपको लगता है कि आप न जानें कितने समय से सोए नहीं हैं? ना ही काम में मन लगता है और ना ही शरीर में कोई ऊर्जा लगती है? आज हम आपको बताते हैं कि इसकी वजह क्या है?

फोन की लत: डॉक्टर विजय कुमार नंदमेर के मुताबिक, सोने से पहले सोशल मीडिया पर वक्त बिताने, यू-ट्यूब देखने और मोबाइल को स्क्रॉल करते रहने की आदत है तो संभल जाइए। दरअसल, इससे आपकी नींद की क्वालिटी पर बहुत बुरा असर पड़ता है। इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स से निकलने वाली नीली तरंगे मेलाटोनिन नाम के हॉर्मोन के स्त्राव को कम कर देती है जो कि सोने-उठने की आपकी साइकिल को कंट्रोल करता है। इस वजह से बॉडी का रिदम बिगड़ता है और आप गहरी नींद नहीं ले पाते और नतीजतन दिन भर थकान लगती हैं।

अल्कोहल: सोने से पहले लोग अक्सर ड्रिंक कर लेते हैं जिससे उन्हें लगता है कि उन्हें दिनभर की थकान के बाद बढ़िया नींद आ जाएगी लेकिन ऐसा नहीं है। यूएस के नेशनल स्लीप फाउंडेशन के अनुसार, जब आप अल्कोहल पीते हैं तो आपकी बॉडी एडीनोसिन नाम का नींद जगाने वाला हॉर्मोन रिलीज़ करता है। इससे आपको जल्दी नींद आ जाती है और कुछ घंटे आराम से सो भी जाते हैं लेकिन जैसे ही अल्कोहल का असर खत्म होता है एडीनोसिन का स्तर घटने लगता है तो आप समय से पहले ही जाग जाते हैं जबकि आपका शरीर सोना चाहता है। इस कारण दिनभर आपको थकान लगती है।

इस वजह से दिनभर छाई रहती है सुस्ती

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डिप्रेशन और कई कारणों से बिगड़ता है नींद का बैलेंस

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मेंटल हेल्थ: डिप्रेशन और स्ट्रेस के चलते कई बार बहुत ज़्यादा नींद आने लगती है क्योंकि ऐसी अवस्था में आपको अकेले वक्त बिताना अच्छा लगता है और अकेलेपन में नींद काफी सुकून देती है। इतना ही नहीं, खूब सोने के बावजूद आपका बेड छोड़ने का मन नहीं करता। ऐसे में डॉक्टर से सलाह लें।

खर्राटे लेने की आदत: खर्राटे यानी ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया से हवा पास करने वाले ब्लॉक्स पूरी तरह बंद हो जाते हैं। इससे शरीर को सही मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और ब्रेन यह सिग्नल देना भी भूल जाता है कि आपको कब उठना है और आप भी लम्बे समय तक सोने में आराम महसूस करते हैं। इस वजह से कई बार आपको सुबह सिर में दर्द होता है, दिन में भी सोने का मन होता है।

थायरॉइड: हाइपोथायरॉइडिज्म में थायरॉइड ग्लैंड नींद और भूख को कंट्रोल करने वाले हॉर्मोन बनाना कम कर देती है जिसकी वजह से बहुत नींद आती है। अगर आपको दिनभर थकान रहे और सोने के बाद भी खूब नींद आए तो डॉक्टर से सलाह लेकर थायरॉइड की जांच अवश्य कराएं।

झपकी: दिन में 20-30 मिनट की झपकी ठीक है लेकिन अगर यह उससे ज़्यादा समय के लिए ली जाए तो आपकी रात की नींद का पैटर्न भी बिगड़ सकता है। कई रिसर्च में भी यह बात साबित हो चुका है कि इससे आपकी रात की नींद प्रभावित होती है।

डी-हायड्रेशन: कम मात्रा में पानी या तरल पदार्थ लेने से ब्लड प्रेशर लेवल गिरने लगता है और दिमाग को ज़रुरत के मुताबिक ऑक्सीजन नहीं मिल पाती जिसकी वजह से आप ऊर्जाहीन महसूस करने लगते हैं। इसलिए दिन में कम से कम 6-8 ग्लास पानी तो ज़रुर पिएं। जूस,चाय-कॉफ़ी भी उचित मात्रा में लें और समय-समय पर शरीर से विषैले पदार्थों को डीटॉक्सिफिकेशन के जरिए निकालें।

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