देश के कोने-कोने में मानसून आ चुका है। मानसून भीषण गर्मी से राहत तो दिला रहा है, लेकिन अपने साथ लेकर आ रहा है कुछ ऐसी बीमारियां, जो हमें बेहद परेशान कर सकती है। इन्हीं बीमारियों में से एक है फंगल इंफेक्शन, जिसका खतरा मॉनसून में सबसे ज़्यादा होता है।

इस मौसम में त्वचा से जुड़ी समस्याएं खूब होती है। त्वचा पर लाल चकत्ते, मुंहासे, उलझे चिपचिपे बाल जैसी दिक्कतों का सामना हमें करना पड़ता है। इसी तरह फंगल संक्रमण भी इन्हीं तकलीफों में से एक है। मॉनसून में फंगल संक्रमण के मरीज़ों की संख्या बढ़ जाती है।

क्यों होता है संक्रमण?

Use a mild shampoo 2-3 times a week during monsoon
हमेशा एंटीबैक्टीरियल साबुन का इस्तेमाल करें

फंगस पैदा करने वाले जीवाणु आमतौर पर मॉनसून में कई गुना ज़्यादा तेज़ी से फैलते हैं। सामान्य तौर पर पैरों की उंगलियों के पोरों पर, उनके बीच के स्थानों पर या फिर उन जगहों पर यह ज़्यादा फैलते हैं, जहां की त्वचा नाज़ुक होती है।

अक्सर लोग हल्की बूंदा-बांदी में भीगने की इच्छा में अपनी त्वचा को अनदेखा कर देते हैं। लेकिन थोड़ी सी असावधानी आपको कई बार संक्रमित कर देती है। इसीलिए आपके लिए बेहद ज़रूरी है कि आप ज़्यादा देर तक गीले ना रहे।

कैसे बचें संक्रमण से?

Avid using a blow drier and towel dry instead
बरसात में अगर कपड़ों में कीचड़ या गंदगी लग जाए, तो उसे फौरन धो लें

यदि आप भी ऐसे संक्रमण से बचना चाहते हैं, तो आपको कुछ बातों का ख्याल रखना होगा। हमेशा एंटीबैक्टीरियल साबुन का इस्तेमाल करें और दिन में कम से कम 2 बार ज़रूर नहाएं।

कपड़ों को नियमित रूप से धोएं। बरसात में अगर कपड़ों में कीचड़ या गंदगी लग जाए, तो उसे फौरन धो लें। इससे फंगल संक्रमण से बचाव होता है।

वहीं इस संक्रमण से सतर्क रहना बहुत ही ज़रूरी है। यदि आपकी त्वचा में लाल चकत्ते या छोटी-छोटी फुंसियां दिखाई दें, तो फौरन अच्छे त्वचा रोग विशेषज्ञ या कहे डर्मेटोलॉजिस्ट से जाकर मिले।

यदि आप इन बातों का ध्यान रखेंगे, तो आप फंगल संक्रमण से दूर रहेंगे।

मेरी आवाज़ ही पहचान है! संगीत मेरी कल्पना को पंख देता है.. किताबी कीड़ा, अडिग, जिद्दी, मां की दुलारी.. प्राणी प्रेम ऐसा कि लोग मुझे लगभग पागल समझते हैं! खाने के लिए जीनेवाली और हद दर्जे की बातूनी.. लेकिन मेरा लेखन आपको बोर नहीं करेगा..