आजकल काम के बढ़ते स्ट्रेस और ऑफिस में लगातार बैठ कर काम करने की वजह से लगभग हर व्यक्ति को पीठ और गर्दन में दर्द की समस्या हो सकती है। यदि इस पर समय पर ध्यान ना दिया जाए, तो गर्दन का दर्द बढ़ते-बढ़ते स्पॉन्डिलाइटिस में परिवर्तित हो सकता है। यह एक ऑटो इम्यून और इन्फ्लेमेटरी रोग है, जिससे रीढ़ की हड्डी को सबसे ज़्यादा नुकसान पहुंचता है। इस समस्या में अक्सर कमर और गर्दन के बीच के हिस्से और लोअर बैक में तीखा दर्द रहता है। इस समस्या में रीड की हड्डी का लचीलापन खत्म होकर हड्डियां सख्त हो जाती है, जिसकी वजह से आपको तेज दर्द की शिकायत रहती है। यह समस्या जल्द पकड़ में नहीं आती और इसे समझने में कई सालों का वक्त लग जाता है।

डॉ जैन की माने, तो इसके शुरुआती लक्षणों में कमर दर्द की शिकायत रहती है, जिसके बाद यह समस्या समय के साथ बढ़ती चली जाती है। यदि समय पर इसका इलाज न कराया जाए, तो मरीज़ को चलने फिरने में भी तकलीफ़ का सामना करना पड़ सकता है। यदि यह समस्या क्रॉनिक हो जाती है, तो व्यक्ति व्हीलचेयर पर भी जिंदगी भर के लिए आ सकता है।हालांकि इससे निपटने के कई उपाय हैं, जिसमें एलोपैथी ट्रीटमेंट के साथ-साथ फिजियोथैरेपी का भी सहारा लिया जा सकता है। साथ ही साइड इफेक्ट का डर हो, तो होम्योपैथी और आयुर्वेदिक दवाओं का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। लेकिन कुछ खास टिप्स का इस्तेमाल करके आप इस समस्या से दूर रह सकते हैं। साथ ही यदि यह समस्या हाल ही में आपको हुई है, तो इन टिप्स को आपको ज़रूर आज़माना चाहिए।

अक्सर कमर और गर्दन के बीच के हिस्से और लोअर बैक में तीखा दर्द रहता है

एक्सरसाइज़

जैसा कि आपने पहले जाना, इस समस्या में रीढ़ की हड्डी का लचीलापन खत्म हो जाता है। इसीलिए बेहतर है कि लंबे समय तक एक जगह पर बैठे रहने की आदत छोड़ दें और इस वजह से रीढ़ की हड्डी में जो कड़ापन आया है, उसे रोज़ाना व्यायाम से दूर करें। इससे ना सिर्फ दर्द में आराम मिलता है, साथ ही यह आपकी रीढ़ की हड्डी का लचीलापन भी बनाए रखता है। लेकिन इस बात का ध्यान ज़रूर रखें कि किसी भी तरह के व्यायाम को शुरू करने से पहले अपने फिजियोथैरेपिस्ट से सलाह ज़रूर लें।

चीज़ों का प्रयोग सोच समझ कर

यदि आप नरम गद्दे पर सोना पसंद करते हैं, तो आपको स्पॉन्डिलाइटिस के समस्या हो सकती है। इसके बदले यदि आप सख्त गद्दे पर सोते हैं तो स्पॉन्डिलाइटिस के समस्या में आपको बेहद आराम मिल सकता है। दरअसल सख्त गद्दे की वजह से आपका शरीर एक सीध में रहता है, जिससे आपकी रीढ़ की हड्डी एक सीध में बनी रहती है। साथ ही इस समस्या में तकिया लेना सही नहीं माना जाता, इसीलिए स्पॉन्डिलाइटिस के समस्या हो, तो तकिए से तौबा कर लेना चाहिए। वहीं आपको हील वाली चप्पलों से भी दूर रहना चाहिए, इसकी वजह से रीढ़ की हड्डी पर ज़ोर पड़ता है और आपका दर्द बढ़ सकता है। इसके अलावा, यदि आप बिना सोचे-समझे वज़न उठाते हैं, तो भी आपको ऐसा नहीं करना चाहिए।

स्पॉन्डिलाइटिस में भी गर्म पानी से नहाना आपके लिए एक फ़ायदेमंद साबित हो सकता है

गर्म पानी देगा आराम

अक्सर थकने के बाद आप अपने पैरों को आराम देने के लिए गर्म पानी में उन्हें डूबा कर रखते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि यह ना सिर्फ दर्द दूर करता है, बल्कि मांसपेशियों को अंदर तक फायदा भी पहुंचाता है। इसी तरह स्पॉन्डिलाइटिस में भी गर्म पानी से नहाना आपके लिए एक फ़ायदेमंद साबित हो सकता है। ऐसा करने पर रीढ़ की हड्डी और उसके आसपास के मांसपेशियों की सिकाई हो जाती है। साथ ही गर्म पानी की वजह से शरीर का ब्लड सर्क्युलेशन बेहतर बनाता है, जिससे आपको दर्द में आराम मिलता है और आप एक अच्छी नींद ले सकते हैं। आप चाहे तो दर्द के स्थान पर गर्म पानी से या गर्म कपड़े से सिंकाई भी कर सकते हैं।

मसाज भी है उपाय

यदि आप स्पॉन्डिलाइटिस की समस्या में फिजियोथैरेपिस्ट से मसाज करवाते हैं, तो यह आपके लिए फ़ायदेमंद साबित हो सकता है। मसाज करवाने से ब्लड सर्क्युलेशन बेहतर होता है और रीढ़ की हड्डी के आसपास बनी मांसपेशियों को आराम मिलता है। मसाज की वजह से शरीर के अच्छे हार्मोस सक्रिय होकर हमें दर्द से आराम दिलाते हैं। वहीं यदि आप चाहे तो एक्यूप्रेशर जैसी थेरेपी का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

धूम्रपान से करें तौबा

यदि डॉ जैन की माने तो धूम्रपान करने वाले व्यक्ति को स्पॉन्डिलाइटिस की बीमारी का सबसे ज़्यादा खतरा होता है। इसकी वजह से शरीर की इम्युनिटी कमज़ोर होती है और दवाइयों और इलाज का असर आपके शरीर पर नहीं होता। धूम्रपान बंद कर देने से यह समस्या जल्द से जल्द ठीक होने की संभावना होती है।

मेरी आवाज़ ही पहचान है! संगीत मेरी कल्पना को पंख देता है.. किताबी कीड़ा, अडिग, जिद्दी, मां की दुलारी.. प्राणी प्रेम ऐसा कि लोग मुझे लगभग पागल समझते हैं! खाने के लिए जीनेवाली और हद दर्जे की बातूनी.. लेकिन मेरा लेखन आपको बोर नहीं करेगा..