पूरे देश में भगवान श्री कृष्ण के जन्मदिन की तैयारियां चल रही हैं। इस बार श्रीकृष्ण की 5246 वीं जयंती है। मान्यता है कि भगवान श्री कृष्ण का जन्म भाद्रपद यानी कि भादो माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र के उदय के दौरान हुआ था। इस बार यह दिन 24 अगस्त को आ रहा है, इसीलिए इस साल 24 अगस्त के दिन पूरे देश में कृष्ण जन्माष्टमी का त्यौहार मनाया जाएगा। इस दिन लोग भगवान श्री कृष्ण के भजन गाकर उपवास रखते हैं और व्रत के दौरान भगवान श्रीकृष्ण को पसंद आने वाले 56 व्यंजन बनाकर उन्हें भोग लगाते हैं। इन्ही व्यंजनों को 56 भोग का नाम दिया गया है। लेकिन श्रीकृष्ण का एक पसंदीदा भोग ऐसा है, जो 56 स्वादिष्ट भोगों को भी पीछे छोड़ देता है। कहा जाता है कि यदि आप श्रीकृष्ण को 56 भोग नहीं लगा सकते, तो आपको इस भोग का प्रसाद चढ़ाना चाहिए। आइये जानते हैं कौन सा है ये भोग।

माखनचोर का पसंदीदा भोग

कृष्ण जन्माष्टमी के दिन ये प्रसाद हर कृष्ण हक्त के हिस्से में ज़रूर आता है

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जब बात हो माखनचोर और यशोदा के दुलारे श्रीकृष्ण की, तो माखन की बात तो ज़रूर आती है। माखन-मिश्री ही वो प्रसाद है, जो श्रीकृष्ण को बेहद भाता है। इसलिए उनके जन्म की पूजा के दौरान इस भोग का प्रसाद ख़ास तौर पर चढ़ाया जाता है। कृष्ण जन्माष्टमी के दिन ये प्रसाद हर कृष्ण हक्त के हिस्से में ज़रूर आता है।

क्यों चढ़ाया जाता है माखन-मिश्री का भोग?

इस भोग को चढाने के पीछे एक कथा प्रचलित है। कहा जाता है कि जब कृष्ण बाल अवस्था में थे, तो उन्हें माखन बहुत पसंद था। और इसलिए वे घर-घर से माखन चुराकर खाते थे। जब यशोदा मैया को ये बात पता चली, तो उन्होंने कृष्ण की तृप्ति के लिए अपने हाथों से माखन-मिश्री का भोग बनाकर खिलाना शुरू कर दिया। इसके बाद से माखन-मिश्री का ये भोग कृष्ण का पसंदीदा बन गया। यही वजह है कि इस भोग के बिना उनकी पूजा संपन्न नहीं होती।

कैसे बनाई जाती माखन-मिश्री?

इसमें तुलसी का पत्ता डाल कर भोग के लिए तैयार करें

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यदि आप भी इस जन्माष्टमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण को माखन का भोग लगाना चाहते हैं, तो आपको बता दें कि इसे बनाना बेहद आसान है। बस आपको ज़रुरत है माखन और पीसी हुई मिश्री की। ताज़े बने मुलायम मक्खन को अलग करके उसमें आपको पीसी हुई मिश्री मिलाएं। अब इसमें तुलसी का पत्ता डाल कर भोग के लिए तैयार करें। आप चाहें तो इसमें केसर और मेवे भी मिला सकते हैं। जन्माष्टमी के दिन इस माखन मिश्री का भोग कृष्णा को लगाएं और उनकी आराधना करें।

यदि आप भी अपने प्यारे कन्हैया के लिए 56 भोग नहीं बना सकते, तो उनका पसंदीदा माखन-मिश्री का भोग ज़रूर लगाएं।

मेरी आवाज़ ही पहचान है! संगीत मेरी कल्पना को पंख देता है.. किताबी कीड़ा, अडिग, जिद्दी, मां की दुलारी.. प्राणी प्रेम ऐसा कि लोग मुझे लगभग पागल समझते हैं! खाने के लिए जीनेवाली और हद दर्जे की बातूनी.. लेकिन मेरा लेखन आपको बोर नहीं करेगा..