भारत में हमेशा से बैठ कर भोजन करने की परंपरा रही थी। नीचे ज़मीन पर पालथी मार कर खाने का रिवाज़ सदियों से चला आ रहा है और इस बात का उल्लेख हमारी कई ऐतिहासिक किताबों में दर्ज़ है। कहते हैं ना, एक वक्त था जब लोग ज़मीन पर बैठकर खाते थे, लेकिन फिर धीरे-धीरे लोग टेबल और कुर्सी पर बैठकर खाने लगे और बदलते वक्त के साथ लोगों में खड़े होकर खाने की परंपरा शुरू हो गई। आजकल कहीं भी शादी हो या कोई पार्टी हो और या कोई फंशन हो, लोग खड़े होकर ही खाना खाते हैं जिसे हम बुफे के नाम से जानते हैं। आज बुफे का क्रेज़ लोगों में हर जगह बढ़ गया है, फिर वो चाहे शहर हो या गांव। आज जहां देखो आपको बुफे स्टाइल में ही भोजन देखने को मिलेगा। चलिए जानते हैं क्या है ये बुफे।

16 वीं शताब्दी फ्रांस में शुरू हुई बुफे भोजन की परंपरा बहुत ज़ोरो से पूरी दुनिया में फ़ैल गयी। भारत में भी बुफे स्टाइल से खाना खाने के इस शौक को लोगों ने बहुत तेजी से अपना लिया। भारतीय शहरों को देखते हुए भारत के गांवों ने भी इसे जल्द से जल्द अपना लिया। देखा जाए तो बुफे सिस्टम बदलते समय की कसौटी पर खरा साबित हो गया और अब शादियों, पार्टियों के अलावा कई रेस्तरां के मालिकों ने भी इस बुफे सिस्टम को अपने होटल की शान बनाई हुई है।

क्या है बुफे स्टाइल भोजन

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आप बैठकर खाते हैं तो आपका मन एकाग्र रहता है, लेकिन जब आप खड़े होकर खाते हैं, तो एकाग्रता नहीं रहती है।

बुफे स्टाइल में आपने देखा होगा की शादियों की पार्टी हो या कोई और पार्टी वहां एक बड़ा सा ग्राउंड हो या किसी के घर का छोटा सा आंगन। वहां कई तरह के टेबल लगा दिए जाते हैं और हर टेबल पर दो से तीन होटल के कर्मचारी खड़े कर दिए जाते हैं। हर टेबल पर कुछ ना कुछ आइटम जैसे किसी टेबल पर दो से तीन तरह की सब्जियां तो कही चावल और पुलाव तो कही पापड़ , सलाद और अचार रख दिया जाता है। लोग लाइन से लग अपनी बारी का इंतज़ार करते हैं।बारी आने पर वो अपनी पसंद का खाना अपनी प्लेट में डालते हैं। जैसे अगर कोई नॉन वेज का शौक रखता है तो वो अपनी पसंद का खाना अपनी थाली में परोसता हैं।

बुफे भोजन के फायदे

कई बड़े बड़े होटल्स में वीकेंड बुफे भी रखे जाते हैं
कई बड़े बड़े होटल्स में वीकेंड बुफे भी रखे जाते हैं

बुफे भोजन का सबसे बड़ा फायदा यह होता हैं कि जो आपको खाना है वो आप खुद पसंद करते हैं। खाना खाने से पहले आप पूरी तरह से जांच पड़ताल कर सकते हैं कि कौन से टेबल में क्या रखा है। ज़रूरी नहीं हैं कि आप खाने की शुरुवात मेन कोर्स से ही करे। आपको अगर मीठा खाने या कुछ और खाने की इच्छा हैं, तो वो खा सकते हैं। अगर आप किसी रेस्तरां या होटल के बुफे का आनंद लेना चाहते हैं तो आपको कम पैसों में खाने में कई वैराइटी मिल जाएगी। स्वीट और बाकि डेजर्ट के लिए अलग से कुछ और पैसे देने की ज़रुरत नहीं होती।

बुफे भोजन का नुकसान

कभी कभी बुफे भोजन के लिए लंबी चौड़ी लाइन लगानी पड़ती है
कभी कभी बुफे भोजन के लिए लंबी चौड़ी लाइन लगानी पड़ती है

बुफे भोजन में सबसे बड़ा नुकसान जो देखने को मिलता है कई तरह के फंशन और पार्टियों में वो है खड़े होकर खाने का स्टाइल। कहते हैं खड़े होकर खाने से अपच, मोटापा जैसी दिक्कतें आ सकती हैं। कहा जाता है कि खड़े होकर खाते हैं तो हमारी आंतें सिकुड़ जाती हैं, जिससे खाना नहीं पचता। जब हम खड़े होकर खाते हैं, तो हमारे पैरों में जूते या चप्पल होते हैं, जिससे हमारा पैर गर्म होता है। आर्युवेद के अनुसार जब हम खाना खाते हैं, तो हमारे पैर ठंडे होने चाहिए। एक बात जो और देखी जाती है कि पार्टियों में अक्सर लोग बार-बार खाना लेने से बचने के लिए एक बार में ही कुछ ज़्यादा खाना ले लेते हैं। इससे कई बार आप ज़्यादा खा लेते हैं और ज़्यादा खाएंगे तो मोटापा भी आएगा। जो लोग ज़्यादा नहीं खा पाते वो बाकी खाने को कूड़ेदान में डाल देते हैं जिससे खाना बर्बाद हो जाता है।

शादी-विवाह में बुफे सिस्टम के चलते लोग खड़े होकर भी खाना खाना पसंद करते हैं। क्योंकि पार्टियों में बुफे भोजन के साथ जमीन पर बैठकर खाना नहीं खाना चाहता कोई। लेकिन कोशिश ज़रूर करें कि घर में ज़मीन पर बैठकर खाना खाए। ऐसा करना आपके शरीर के लिए बहुत लाभदायक है।

पहचान छोटी ही सही लेकिन अपनी खुद की होनी चाहिए। इसी सोच के साथ जीती हूँ।अपने सपनों को साकार करने की हिम्मत रखती हूं और ज़िन्दगी का स्वागत बड़े ही खुले दिल से करती हूँ। बाते और खाने की शौकीन हूँ । मेरी इस एनर्जी को चार्ज करती है, मेरे नन्ने बच्चे की खिलखिलाती मुस्कुराहट।