तेजी से बदलती लाइफस्टाइल में खानपान का अपना महत्त्व है। कई लोग अपनी डाइट में नॉन वेज लेते हैं तो कई वेजेटेरियन होते हैं। हांलांकि अब तेजी से नॉन वेज खाने वाले भी वेज फूड की तरफ रुख कर रहे हैं। अगर आप भी उनमें से एक हैं लेकिन ऐसा कर नहीं पा रहे क्योंकि आपको कम न्यूट्रीशन मिलने का डर है तो हम आपको एक बेहतर विकल्प के बारे में बताते हैं। यह विकल्प टोफू है जिसमें भरपूर मात्रा में प्रोटीन होता है। अपनी इन्हीं खूबियों की वजह से टोफू अब तेजी से पॉपुलर हो रहा है और लोग इसे अपने खाने में शामिल करने से नहीं हिचकिचा रहे हैं।

क्या है टोफू? टोफू सोया मिल्क से बनाया जाता है.यह दिखने में बिल्कुल पनीर जैसा ही लगता है। इसमें मीट के मुकाबले न सिर्फ प्रोटीन, बल्कि कैल्शियम, बी-कॉम्प्लेक्स विटामिन और आयरन पाया जाता है। इसमें सैचुरेटेड फैट,सोडियम कम होता है और कॉलेस्ट्रोल तो बिलकुल भी नहीं होता है। इसे खासकर एशियन कंट्रीज में काफी चाव से खाया जाने लगा है। आप इससे सब्जी, सलाद से लेकर डेजर्ट तक बना सकते हैं।

टोफू खाने के फायदे

टोफू में प्रचुर मात्रा में प्रोटीन होता है
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डॉक्टर प्रीति शुक्ला (पीएचडी, एम.एससी और डायटीशियन) के मुताबिक,सोया से बने पदार्थों में बायोएक्टिव इंग्रिडीयेंट्स होते हैं जिसे खाने से कॉलेस्ट्रोल लेवल कंट्रोल होता है। डाइट में टोफू शामिल करने से ट्रायग्लीसराइड भी लेवल होता है.साथ ही जीरो कॉलेस्ट्रोल होने के कारण इसे खाने से वजन भी नहीं बढ़ता है।

कम करे डायबिटीज का खतरा: सोया फूड्स में हाई आईसोफ्लैवोन कंटेंट होता है जिसकी वजह से टोफू डायबिटीज कंट्रोल करने में सहायक होता है। हाई आईसोफ्लैवोन कंटेंट सेरम इंसुलिन और पैनक्रियाटिक इंसुलिन लेवल को बढ़ाता है जिससे इंसुलिन लेवल और ब्लड में ग्लूकोज कंट्रोल में होता है। बस ध्यान रखें कि सोया प्रोडक्ट्स में टोफू डेजर्ट और सोया ड्रिंक्स जैसे मीठे प्रोडक्ट्स न खाएं क्योंकि इनसे ब्लड में ग्लूकोज लेवल बढ़ने की आशंका रहती है।

पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम का खतरा भी करे कम

टोफू में फायटोएस्ट्रोजन जैसे जेनिस्टीन और डायडजीन कैमिकल्स पाए जाते हैं जो कि मूलतः पौधों में होते हैं और एस्ट्रोजेनिक एक्टिविटी में सहायक होते हैं। एस्ट्रोजन लेवल इधर-उधर होने से पीरियड्स गड़बड़ाते हैं और इससे फर्टिलिटी में भी प्रॉब्लम आती है। टोफू खाने से पीरियड्स रेगुलर होते हैं और ओवरी, यूटरस भी सही तरीके से काम करने में सक्षम होने लगते हैं, लेकिन ध्यान रखें और अपनी डाइट में सोया प्रोटीन ज़रुरत से ज्यादा न लें नहीं तो ओवरी फंक्शन कम होने लगेगा।

घटाए कैंसर का रिस्क: कई स्टडीज में सामने आया है कि फायटोएस्ट्रोजन में कैंसर से लड़ने में कारक होता है।खासकर ब्रेस्ट कैंसर की रोकथाम में यह काफी कारगर सिद्ध होता है..साथ ही टोफू खाने से हड्डियां भी मजबूत होती हैं और लीवर की हालत भी बेहतर होती है क्योंकि इसमें फ्लेवोनोइड्स और फायटोकेमिकल्स होते हैं साथ ही प्रोटीन की प्रचुर मात्रा से हड्डियाँ मजबूत होती है। .

उम्मीद है कि टोफू के इतने फायदे जानने के बाद आप इसे अपनी डाइट में शामिल ज़रुर करेंगे।

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