इरिटेबल बोवेल सिंड्रोम या आईबीएस (IBS) बड़ी आंत से जुड़ी एक गंभीर बीमारी है। इस बीमारी में बड़ी आंत में सूजन आ जाती है जिससे पेशेंट्स को लगातार मोशन जाना पड़ता है, वहीं कई दफा इनमें खून आने की दिक्कत का भी सामना करना पड़ सकता है। इस वजह से बेहद वीकनेस और हीमोग्लोबिन की भी कमी हो जाती है क्योंकि खाना नहीं पचता है। बीमारी भी कुछ ऐसी है जिसमें आप ज्यादा मसालेदार और तला-भुना नहीं खा सकते। इरिटेबल बोवेल सिंड्रोम या आईबीएस (IBS) क्यों होती है इसका सही-सही जवाब वर्तमान मेडिकल साइंस के पास फिलहाल मौजूद नहीं है। इरिटेबल बोवेल सिंड्रोम से बचने का सबसे अच्छा और कारगर उपाय है तनाव कम लेना, आराम करना और अपने डाइट को संतुलित रखना। आयुर्वेद के डॉक्टर्स बड़ी आंत की इस बीमारी के जड़ से ठीक होने का दावा करते हैं। लेकिन शर्त वही दो हैं – स्ट्रेस ना लें और अपने आहार पर ज़बरदस्त नियंत्रण रखें। इसी क्रम में आज हम आपको बताने जा रहे हैं ऐसे फूड्स जिनका सेवन इरिटेबल बोवेल सिंड्रोम से पीड़ित लोगों को नहीं करना चाहिए।

भोपाल के डॉक्टर सुबोध वार्ष्णेय के मुताबिक, इरिटेबल बोवेल सिंड्रोम का सबसे बड़ा दुश्मन है दूध। जी हां, यदि आपको इरिटेबल बोवेल सिंड्रोम या इससे जुड़ी कोई भी समस्या है तो तत्काल दूध का सेवन करना बंद कर दें। दूध के साथ ही दूध से बने अन्य पदार्थ जैसे – पनीर, छाछ, लस्सी का भी सेवन नहीं करें। दरअसल, दूध में लैक्टोज नामक एक तत्व पाया जाता है जिसे पचा पाना इरिटेबल बोवेल सिंड्रोम के पेशेंट्स के लिए बेहद मुश्किल होता है। साथ ही दूध पीने से दस्त आदि की समस्या भी हो सकती है जो कि इस बीमारी के पेशेंट्स के लिए दर्दनाक अनुभव हो सकती है। हालांकि, आप इरिटेबल बोवेल सिंड्रोम में दही और केले का सेवन ज़रूर कर सकते हैं।

खट्टे फलों से करें तौबा

आम जैसे फलों से रहें दूर
आम जैसे फलों से रहें दूर

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इरिटेबल बोवेल सिंड्रोम के दौरान आपको खट्टे फल जैसे – संतरा, अंगूर, आम आदि का सेवन नहीं करना चाहिए। खट्टे फल बड़ी आंत में मौजूद घावों को उभार सकते हैं और नतीजतन आपको ब्लीडिंग आदि का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही आम भी इस बीमारी में नहीं खाना चाहिए क्योंकि आम की तासीर गर्म होती है और यह पेट में मौजूद घावों को और बढ़ा सकते हैं। आप केले, जामुन, उबला हुआ सेब, नाशपाती आसानी से इस बीमारी में खा सकते हैं।

तेज मसाले युक्त भोजन

ऐसा कोई भी भोजन जिसमें तेल मसालों और मिर्ची का प्रयोग किया गया हो, का सेवन इरिटेबल बोवेल सिंड्रोम के पेशेंट्स को नहीं करना चाहिए। इरिटेबल बोवेल सिंड्रोम में बड़ी आंत में छाले हो जाते हैं ऐसे में ज्यादा तेल मसाले वाला खाना आपकी मुसीबतों को बढ़ा सकता है। इरिटेबल बोवेल सिंड्रोम से पीड़ित लोगों को कम से कम मसालेदार खाना जैसे मूंग की दाल की खिचड़ी, लौकी, एकदम ताजा दही आदि का सेवन करना चाहिए।

मांस से करें परहेज

यदि अब तक आप नॉनवेज खाने के शौक़ीन रहे हैं तो आपके लिए बुरी खबर है। इरिटेबल बोवेल सिंड्रोम के पेशेंट्स के लिए नॉन वेज खाना सख्त मना है। ऐसा कोई भी खाना जिसे पचाना आसान ना हो हो इस बीमारी में नहीं खाना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से आपकी समस्या कई गुना तक बढ़ सकती है। हालाँकि, आप डॉक्टर की सलाह पर बहुत कम नमक और बिना मसाले का चिकन सूप पी सकते हैं। आपके लिए अच्छी खबर यह है कि आप अंडे का सफ़ेद हिस्सा इस बीमारी में भी खा सकते हैं। यह प्रोटीन का एक अच्छा सोर्स होता है, लेकिन यह ज़रूर ध्यान रहे कि आप अंडे सीमित मात्रा में ही खाएं, ज़रुरत से ज्यादा अंडे खा लेने से भी शरीर में गर्मी आ सकती है जो आपके लिए खतरनाक है।

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