दशहरा या विजयदशमी हिन्दू धर्म के लोगों के लिए बहुत ही बड़ा त्यौहार है। दशहरा में अपने घर के मंदिर की पूजा होने के साथ साथ अपनी गाड़ियों की पूजा की जाती है । पूजा के अलावा बहुत स्वादिष्ठ पकवान भी बनाए जाते है। आइये जानते है दक्षिण भारत में बनने वाले उन पकवानों के बारे में जो बहुत ही स्वादिष्ठ और प्रसिद्ध है। इन विशेष मिठाई और नमकीन को दक्षिण भारत में विजयदशमी के दौरान मां दुर्गा को चढ़ाया जाता है।

लोग आज कल काम में इतने व्यस्त रहते है की उन्हें नवरात्रि के 9 दिनों के त्यौहार को मनाने का समय ही नहीं मिलता। लेकिन दुर्गाष्टमी के दौरान सभी दशहरा त्यौहार को मनाते है और मां दुर्गा की मूरत को सजा कर, उन्हें पवित्र और स्वाद से भरपूर पकवान को घर पर बनाकर उनके चरणों में अर्पित करते है। दशहरा की धूम पूरे भारत में दिखती है लेकिन दक्षिण भारत का अपना अलग स्वरूप है। इसके पकवान सभी को बेहद प्रिय है क्योंकि वहां सभी लोग इन 9 दिनों को बहुत ही संस्कृति और परंपरागत रूप से मनाते है और साथ ही लाजवाब खाने का आनंद उठाते है।

चक्र पोंगली


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दशहरा के त्यौहार में अगर चक्र पोंगली (chakkara pongali) ना बनाया जाए तो त्यौहार ही अधुरा लगने लगता है। यह एक प्रसिद्ध मीठा पदार्थ है जो मां दुर्गा को इस त्यौहार के दौरान दशहरा के दिन अर्पित किया जाता है। इस रेसिपी को बनाना बहुत ही आसान है। इस मिठाई को बनाने के लिए यहां के लोग चीनी या गुड़ का उपयोग करते है। ये एक विशेष आंध्र रेसिपी है जिसे नवरात्रि के दिनों में बनाया जाता है। शायद आपने मंदिरों में इसे ज़रूर प्रसाद के रूप में खाया होगा।

पला बूरेलु

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दशहरा में भगवान को भोग देकर उनका आशीर्वाद लेते है दक्षिण भारत के लोग

इस स्वादिष्ट पला बूरेलु को बनाने के लिए दूध और चावल का इस्तेमाल किया जाता है। यह एक परंपरागत मिठाई है जिसे विशेष रूप से दशहरा पर बनाया जाता है। इस पला बूरेलु को बनाने के लिए कई लोग गुड़ का भी उपयोग करते है इसलिए इसका सेवन डायबिटीज वाले व्यक्ति भी कर सकते है। पुराने जमानो से इस मिठाई को लोग त्यौहार के दौरान बनाते आ रहे है। ये आसानी से बन जाती है और इसको बनाने के लिए केवल 15 मिनट काफी होती है।

हलवा

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हलवा में सूखा नारियल और बादाम भी डाला जाता है

हलवा एक ऐसी रेसिपी है जिसको नवरात्रि के अंतिम दिन में बनाया जाता है। यह एक ऐसा भोग है जो उत्तर- भारत से लेकर दक्षिण भारत तक हर घर पर दुर्गाष्टमी या दुर्गा नवमी में बनता है। इसका भोग सबसे पहले माँ दुर्गा को चढ़ाया जाता है और फिर इसे कन्या पूजा के दौरान कन्याओं को परोसा जाता है। हलवा एक ऐसा मिश्रण है जो सबके मुंह में पानी ला देता है। ज़्यादातर हलवे के साथ काले चने को बना कर मां दुर्गा को चढ़ाया जाता है। इस तरह काले चने तीखेपन का स्वाद देते है और हलवा मीठा स्वाद देता है और इन दोनों का महत्व दशहरा में भी रहता है। दक्षिण भारत के कई बड़े – बड़े मंदिरों में आप इसे प्रसाद के रूप में देखते है।

वेन्ना चक्रालू या मुरुकुलू

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चावल के साथ इसमें तिल के बीज का भी इस्तेमाल होता है।

ये एक प्रसिद्ध सामान्य परंपरागत पकवान है जिसे त्यौहार पर बनाया जाता है। इस स्वादिष्ट क्रंच नमकीन पकवान को मां दुर्गा को दशहरा के दिन चढ़ाया जाता है।इसे बनाने के लिए बटर और चावल के आटे का भरपूर उपयोग किया जाता है। । कहते है कि दक्षिण भारत में इस गरम नमकीन को मां दुर्गा को निवेदनम के रूप में अर्पित किया जाता है ।

मूंगफली पुलिहोरा

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इसे बनाने के लिए चावल , करी पत्ता, हरी मिर्च, लाल मिर्च और हिंग का उपयोग करते है

मां दुर्गा को दशहरा के दिन ये लोग मूंगफली से बना पुलिहोरा का प्रसाद चढ़ाते है। मां दुर्गा के इस प्रसाद को धार्मिक माना जाता है। इस पकवान को चढ़ाए बिना पूजा अधूरी रहती है। इस पकवान को बनाने के लिए ये लोग इमली के रस का उपयोग करते है। ये आंध्र, कर्नाटक और तमिलनाडू में सबसे ज़्यादा बनता है, यहां पर ये एक सामान्य पकवान है।

ये थे दक्षिण भारत के वो सबसे प्रसिद्ध पकवान जिन्हे आप वहां के बड़े -बड़े मंदिरों में प्रसाद के रूप में चख सकते है। अगली बार दक्षिण भारत जाए कभी दशहरा के दिनों में तो माता के दर्शन के बाद इन प्रसाद को चखना ना भूलियेगा।

पहचान छोटी ही सही लेकिन अपनी खुद की होनी चाहिए। इसी सोच के साथ जीती हूँ।अपने सपनों को साकार करने की हिम्मत रखती हूं और ज़िन्दगी का स्वागत बड़े ही खुले दिल से करती हूँ। बाते और खाने की शौकीन हूँ । मेरी इस एनर्जी को चार्ज करती है, मेरे नन्ने बच्चे की खिलखिलाती मुस्कुराहट।