खिचड़ी, जिसे लोग बड़े चाव से खाना पसंद करते हैं, ये मानसून में आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं मानी जाती। मानसून में पेट खराब होना एक आम समस्या है, जिसकी वजह से इम्युनिटी कमज़ोर हो जाती है और हमें बाहर के खाने से परहेज करना पड़ता है। ऐसे वक्त में खिचड़ी ही है, जो स्वाद के साथ-साथ हमारा पेट भी भरने की ताकत रखती है। लेकिन मानसून के दौरान हर बार एक सी खिचड़ी खा-खाकर हम बोर हो सकते हैं, इसलिए आज हम आपके लिए लेकर आए हैं खिचड़ी के कुछ अलग प्रकार, जिसे घर पर बनाना है बेहद आसान।

गुजराती खिचड़ी

 

इस खिचड़ी के साथ देसी घी और खट्टी-मीठी कढ़ी खाने का चलन है

यह खिचड़ी मूंग दाल के साथ चावलों को मिलाकर बनाई जाती है। इस खिचड़ी में छिलकेवाली और सादी दोनों तरह की मूंगदाल का इस्तेमाल किया जाता है। इस खिचड़ी में हींग का छौंक लगा कर हल्दी और नमक के साथ पकाया जाता है। इसे कूकर में नहीं, बल्कि पतीले में धीमी आंच पर पकाकर बनाया जाता है। इस खिचड़ी के साथ देसी घी और खट्टी-मीठी कढ़ी खाने का चलन है।

राजस्थानी खिचड़ी

राजस्थान में चावल-दाल की खिचड़ी के साथ-साथ बाजरे के खिचड़ी भी बड़े चाव से खायी जाती है। बारीक कुटे हुए बाजरे के साथ बिना छिलकेवाली दाल को देर तक पकाया जाता है। इस खिचड़ी में नमक और हल्दी का इस्तेमाल मुख्य रूप से होता है। इसमें खास बात ये होती है कि खिचड़ी पक जाने के बाद इसमें ऊपर से घी, जीरे और हींग का छौंक लगाया जाता है। इस खिचड़ी को राजस्थान में नीम्बू के अचार, तीखी चटनी और गुड़ के साथ खाने का चलन है।

महाराष्ट्रीयन खिचड़ी

इसे मराठी कढ़ी के साथ खाना लोग बेहद पसंद करते हैं

महाराष्ट्रीयन खिचड़ी खास तौर पर तुअर की दाल यानी कि अरहर और चावल के साथ बनाई जाती है। इस खिचड़ी को कम पानी के साथ बनाया जाता है। साथ ही कुछ लोग इसमें राई का तड़का लगाकर खाना पसंद करते हैं, जिसे फोड़नी की खिचड़ी का नाम दिया गया है। वहीं इसमें राई, नमक, मिर्च के साथ-साथ लहसुन का बड़ी मात्रा में प्रयोग किया जाता है। इसे मराठी कढ़ी के साथ खाना लोग बेहद पसंद करते हैं।

बिहारी खिचड़ी

बिहारी खिचड़ी धूला मूंग और चावल की बनती हैं। इस खिचड़ी में ज़्यादा दाल और कम चावलों का इस्तेमाल होता है। इस खिचड़ी को ज़्यादा पानी डालकर बनाया जाता है। इसमें घी, जीरा, हींग, साबुत मिर्च के साथ-साथ किसे हुए अदरक का भी इस्तेमाल किया जाता है। इसके साथ दही, अचार, पापड़ इत्यादि के साथ परोसा जाता है।

मानसून में क्यों खाएं खिचड़ी?

मॉनसून में इम्युनिटी कमज़ोर हो जाती है,इसीलिए फूड पॉइज़निंग, इन्फेक्शन, डायरिया जैसी समस्या है लोगों में आमतौर पर देखी जाती हैं। असल में बरसात के मौसम में इन्फेक्शन जल्दी फैलता है और बैक्टीरिया पनपने लगते हैं। लेकिन यदि आपको इस समस्या से दूर रहना है तो डाइजेशन के लिए खिचड़ी खाना आपके लिए बेहद फ़ायदेमंद माना जाता है। साथ ही खिचड़ी में फाइबर, विटामिन सी, कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटेशियम, फास्फोरस आदि पाया जाता है, जो शरीर को ताकत भी देता है और आपका डाइजेशन भी ठीक करता है।

इसलिए मानसून के इस मौसम में खिचड़ी को हमेशा भोजन में तवज्जो देनी चाहिए।

मेरी आवाज़ ही पहचान है! संगीत मेरी कल्पना को पंख देता है.. किताबी कीड़ा, अडिग, जिद्दी, मां की दुलारी.. प्राणी प्रेम ऐसा कि लोग मुझे लगभग पागल समझते हैं! खाने के लिए जीनेवाली और हद दर्जे की बातूनी.. लेकिन मेरा लेखन आपको बोर नहीं करेगा..