चाय पीने का चलन हमारे देश में सालों से रहा है। कुछ लोग आज भी ऐसे हैं जिनका दिन चाय की चुस्कियों से ही शुरु होता है। अक्सर कुछ लोग शिकायत करते हैं कि उन्हें सुबह-सुबह गरमा-गरम चाय ना मिले, तो उनका पूरा दिन ही खराब हो जाता है। हाल तो यह है कि हमारे देश में करीब 80 से 90 फ़ीसदी आबादी सुबह उठकर चाय पीना पसंद करती है। लेकिन अब जब गर्मियों का मौसम आ गया है, ऐसे में चाय की आदत रखने वाले लोग अक्सर इसी उधेड़बुन में रहते हैं कि इस तपती गर्मी में चाय पी जाए या नहीं। इसकी ज़रुरत महसूस होती है,  लेकिन इसकी इच्छा नहीं होती। ऐसे में मसाला चाय आपकी मदद कर सकती हैं। इसका स्वाद ज़रा हट कर है। आज हम आपको एक ऐसी डिश के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसके बारे में आपने कभी नहीं सुना होगा। हम बात कर रहे हैं मसाला चाय कुल्फी के बारे में।

हालांकि यह डिश सुनने में ज़रा बेतुकी लगती है। लेकिन इसका स्वाद बेहतरीन होता है। मसाला चाय के स्वाद से भरपूर क्रीमी मलाई कुल्फी का स्वाद आपके टेस्ट बड को ज़रूर जीत लेगा। आइये जानते हैं कैसे बनाई आती है मसाला चाय कुल्फी।

कैसे बनाएं मसाला चाय कुल्फी?

मसाला चाय के स्वाद से भरपूर क्रीमी मलाई कुल्फी का स्वाद आपके टेस्ट बड को ज़रूर जीत लेगा

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इस कुल्फी को बनाने के लिए आपको चाय के अलावा दूध से बनी रबड़ी की भी ज़रुरत होगी। इस कुल्फी को बनाने के लिए आपको सौंफ, पिस्ता, सौंठ, रबड़ी और करीब डेढ़ कप मसाला चाय की ज़रुरत पड़ेगी। साथ ही आपको कुल्फी को जमाने के लिए कुल्फी मोल्ड्स की ज़रुरत होगी।

सबसे पहले करीब डेढ़ टेबल स्पून सौंफ को पैन में डालकर सेंक लें और इसे पीसकर पाउडर तैयार कर लें। उसी पैन में पिस्ते के टुकड़ों को भी रोस्ट कर लें और बारीक काट लें। अब कुल्फी बनाने की शुरुआत की जा सकती है।अब एक बड़े बर्तन में करीब 3 कप रबड़ी, 1 चम्मच सौंफ पाउडर, 1 टीस्पून सौंठ पाउडर, बारीक कटे हुए पिस्ते के टुकड़े और मसाला चाय डाल कर अच्छी तरह से मिलाएं।

अब इस मिश्रण को कुल्फी मोल्ड में डालकर करीब 8 से 10 घंटे फ्रीज़र में सेट करें या रात भर के लिए रख दें। इसके बाद कुल्फी को मोल्ड से निकाल कर पिस्ता के टुकड़े डालकर सर्व करें।

इस मसाला कुल्फी की ख़ासियत ये है कि ये अलग हटकर है और खाने में बेहद क्रीमी और स्वादिष्ट भी। इसे आसानी से बनाया जा सकता है और इसका ट्विस्ट घर पर आए मेहमानों को बेहद पसंद आता है।

चाय का सालाना उत्पादन भारत में करीब 50 लाख टन से भी ज़्यादा है

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ये तो हुई चायवाली कुल्फी की बात, लेकिन क्या आप जानते हैं कि सबसे पहली चाय की खोज ईसा के जन्म से 2732 साल पहले, चीन के सम्राट शैन नुंग द्वारा की गई थी। असल में इसके पीछे एक कहानी प्रचलित है। कहा जाता है कि एक दिन राजा शैन नुंग के सामने रखे गर्म पानी के प्याले में चाय की कुछ सूखी पत्तियां आ कर गिरी। जिससे पानी में रंगत आ गई। जब राजा ने इसे पिया तो उसे स्वाद बहुत पसंद आया और तब से चाय का यह सफर शुरू हो गया।

आपको जान कर हैरानी होगी कि दुनिया भर में पानी के बाद सबसे अधिक पिया जाने वाला पदार्थ चाय है। भारत में चाय की शुरुआत 1835 से हुई। सन 1835 में चाय का पहला बाग लगाया गया। पहले कुछ सदियों तक चाय का उपयोग एक दवाई के रूप में होता रहा, लेकिन इसे रोज़ पीने की परंपरा पिछली सदी से ही शुरु हुई है। वहीं भारत में चाय का उत्पादन मुख्य रूप से आसाम में होता है। चाय आसाम का राजकीय पेय भी है। चाय का सालाना उत्पादन भारत में करीब 50 लाख टन से भी ज़्यादा है और भारत में हर व्यक्ति साल में 750 ग्राम चाय का सेवन करता है।

मेरी आवाज़ ही पहचान है! संगीत मेरी कल्पना को पंख देता है.. किताबी कीड़ा, अडिग, जिद्दी, मां की दुलारी.. प्राणी प्रेम ऐसा कि लोग मुझे लगभग पागल समझते हैं! खाने के लिए जीनेवाली और हद दर्जे की बातूनी.. लेकिन मेरा लेखन आपको बोर नहीं करेगा..