सावन सोमवार की शुरुआत हो चुकी है और लोगों ने भक्ति-भाव से शिव जी को प्रसन्न करने के लिए उपवास रखने शुरू कर दिए हैं। सावन के उपवास के दौरान लोग अलग-अलग तरह के स्वादिष्ट और सुस्वादु उपवास के व्यंजन खाना पसंद करते हैं। लोग इस दौरान साबूदाना, समा के चावल के अलावा, सिंघाड़े के आटे और कुट्टू के आटे से बने व्यंजन खाते हैं। उपवास के दौरान आम तौर पर कुट्टू के आटे से बने व्यंजन ज़्यादा खाए जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुट्टू का आटा कैसे तैयार किया जाता है? नहीं? आइए हम बताते हैं।

अनाज नहीं, फल है कुट्टू

यह फल तिकोने आकार के होते हैं

जैसा कि आप सभी जानते हैं व्रत के दौरान अनाज नहीं खाया जाता इसीलिए कुछ खास चीज़ें ही हैं, जो व्रत में खाना लोग पसंद करते हैं। इसमें कुट्टू का आटा आम तौर पर खाया जाता है। कुट्टू को अंग्रेजी में बकव्हीट कहा जाता है, लेकिन यह किसी तरह का अनाज नहीं है।आपको जान कर हैरानी होगी कि ये एक फल है, जो बकव्हीट के पौधे पर उगता है। यह फल तिकोने आकार के होते हैं, जिसे पीसकर आटा तैयार किया जाता है। यह पौधा छोटा होता है और चेरीज़ की तरह इसमें फल और फूल गुच्छों में लगते हैं।

कहां होती है कुट्टू की पैदावार?

भारत में कुछ खास जगहों पर ही कुट्टू की पौधे उगाए जाते हैं। खास तौर पर हिमालय के तलहटी के क्षेत्रों में, जिसमें उत्तराखंड, निलगिरी और जम्मू कश्मीर के साथ-साथ नॉर्थईस्ट राज्यों में भी इसकी पैदावार होती है। भारत में इसका उपयोग मात्र व्रत के दौरान किया जाता है। दुनिया की बात करें, तो यह सबसे ज्यादा कजाकिस्तान, चीन, यूक्रेन और रूस में इसकी पैदावार होती है। कुट्टू के आटे से जापान में नूडल्स बनाए जाते हैं, वहीं अमेरिका और यूरोप में इसके बिस्किट, पैनकेक और केक बनाए जाते हैं।

क्या है कुट्टू के आटे के फायदे?

उपवास के दौरान इस आटे के सेवन से आप एनर्जी महसूस करते रहते हैं

कुट्टू के आटे के अनेक फायदे होते हैं। कुट्टू का आटा प्रोटीन से भरपूर होता है। जिन लोगों को ग्लूटन से एलर्जी होती है, उन लोगों को कुट्टू का आटा खाना चाहिए। इसमें भरपूर मात्रा में आयरन, फोलेट, विटामिन बी, मैग्निशियम, जिंक और फास्फोरस होता है, जिससे आपके शरीर की इम्युनिटी बढ़ती है। यही वजह है कि उपवास के दौरान इस आटे के सेवन से आप एनर्जी महसूस करते रहते हैं। साथ ही ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल से संबंधित समस्याओं में भी कुट्टू के आटे को खाना फायदेमंद माना जाता है।

कैसे करें इस्तेमाल?

इसे बनाने का एक ख़ास तरीका होता है। कुट्टू का आटा आसानी से चबाया नहीं जा सकता, इसीलिए इसे 6 से 7 घंटों तक भिगोकर रखा जाता है। इसके बाद इसे उबाल कर पकाया जाता है, जिससे ये आसानी से पचाया जा सके। क्योंकि यह ग्लूटेन फ्री होता है, इसीलिए इसका आटा गूंथने के लिए आलू का प्रयोग किया जाता है। इस तरह कुट्टू के आटे का इस्तेमाल अलग-अलग तरह से उपवास के दौरान व्यंजन बनाने के लिए किया जाता है।