गोलगप्पे का नाम सुनते ही हर किसी के मुंह में पानी आ जाता है। यह एक ऐसा स्ट्रीट फूड है जो स्नैक्स भी है और खाने के तौर पर भी खाया जा सकता है। इसे खाने से सिर्फ मन ही नहीं, पेट भी भर जाता है।इसीलिए गोलगप्पे के खोमचों के सामने भीड़ देखी जाती है। यह भारत का सबसे चटपटा और स्वादिष्ट स्ट्रीट फ़ूड माना जाता है। लेकिन आप नहीं जानते होंगे कि असल में गोलगप्पे बनने की शुरुआत कहां से हुई। आज हम आपके लिए गोलगप्पों से जुड़ी कुछ ऐसी कहानियां बताने जा रहे हैं, जिसे आपने पहले कभी नहीं सुना होगा। ये कहानियां लोगों को इतिहास की सैर करवा सकती है।

गोलगप्पा एक, नाम अनेक

मध्य प्रदेश में इसे फुलकी कहा जाता है और राजस्थान में पताशी

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गोलगप्पे एक ऐसी डिश है, जो अलग-अलग शहरों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है। जहां एक ओर दिल्ली में इसे गोलगप्पे के नाम से जाना जाता है, तो वहीं यूपी के कुछ हिस्सों में इसे पानी बताशे कहा जाता है। महाराष्ट्र और गुजरात में इसे पानी पूरी कहा जाता है और कोलकाता-बंगाल में पुचका। आपको जान कर हैरानी होगी कि मध्य प्रदेश में इसे फुलकी कहा जाता है और राजस्थान में पताशी। देश में दुसरे हिस्सों जैसे उड़ीसा, झारखण्ड और बिहार में इसे गुपचुप के नाम से जाना जाता है। साथ ही मध्य प्रदेश के फेमस शहर होशंगाबाद में इसे टिक्की के नाम से भी जाना जाता है। एक ही देश में गोलगप्पे अलग-अलग नामों से प्रचलित है और इसे बनाने के तरीके भी शहर दर शहर बदल जाते हैं। लखनऊ में पांच अलग-अलग तरीकों से बनाए गए गोलगप्पे फेमस हैं।

द्रोपदी के ज़माने से फेमस गोलगप्पे?

आपको जान कर हैरानी होगी कि गोलगप्पों को लेकर एक कहानी ऐसी प्रचलित है, जिसमें द्रोपदी और कुंती का ज़िक्र आता है। कहा जाता है कि कुंती ने द्रौपदी से कुछ ऐसा खाना बनाने के लिए कहा, जिसके अनुसार द्रौपदी को कुछ ऐसा खाना बनाना था, जिससे सबका पेट भर जाए। द्रौपदी ने तब सभी के लिए गोलगप्पों जैसा व्यंजन बनाया था, जिसे खाकर पांडव और कुंती बेहद खुश हुए थे। साथ ही कुंती ने द्रौपदी के खाने से खुश होकर उसे वरदान भी दिया था।

शाहजहां की बेटी रोशनआरा से जुड़े इसके तार

शाहजहां की बेटी रोशनआरा ने शाही हकीम से ऐसा नुस्खा तैयार करने के लिए कहा, जिसे आसानी से खाया जा सके

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कुछ कहानियों की माने तो गोलगप्पे पहली बार शाहजहां की बेटी रोशनआरा ने बनाए थे और दिल्ली को गोलगप्पे रोशनआरा की देन है। कहा जाता है कि दिल्ली की एक नहर, जिसका पानी पूरी दिल्ली पीया करती थी, वह गन्दी हो चली थी। जिसकी वजह से दिल्ली के रहवासियों को पेट की समस्याएं होने लगी थीं। जिसकी वजह से उनकी जान को खतरा था। इसलिए शाहजहां की बेटी रोशनआरा ने शाही हकीम से ऐसा नुस्खा तैयार करने के लिए कहा, जिसे आसानी से खाया जा सके। तब इस नुस्खे को गोलगप्पों के रूप में बांटा जाने लगा। हालांकि इसे खाने से लोगों की तबियत तो ठीक हो गई, लेकिन इसका स्वाद लोगों की ज़ुबान पर ऐसा चढ़ा कि लोगों ने इसे खाना जारी रखा। तब से ही दिल्ली में इसे स्ट्रीट फ़ूड के रूप में खाने की शुरुआत हुई।

गोलगप्पों के सेहतमंद फायदे

आपको शायद ना पता हो, लेकिन गोलगप्पे खाने से आपकी सेहत को कई लाभ हो सकते है। हालांकि गोलगप्पे खाते वक्त इस बात का ध्यान रखें कि गोलगप्पे आपके घर में साफ पानी से बनाए गए हों।अक्सर बाहर खोमचे वालों के पास बनाए गए गोलगप्पे का पानी संक्रमित होता है, जिससे समस्या घटने की जगह बढ़ सकती है। लेकिन ये आपकी पेट सम्बन्धी समस्या को चुटकियों में दूर कर सकता है। गोलगप्पे के पानी में मौजूद पुदीने की पत्ती, हरा धनिया, हरी मिर्ची, जीरा, हींग और काला नमक आपका हाजमा दुरुस्त करता है। पेट के कब्ज को दूर कर यह पाचन क्रिया को सही रूप से चलाता है। इसीलिए इस पानी के पेट में जाते ही पेट संबंधी समस्याएं दूर हो जाती है।

तो देर किस बात की, आज ही चटपटे गोलगप्पों का लुत्फ़ उठाएं।

मेरी आवाज़ ही पहचान है! संगीत मेरी कल्पना को पंख देता है.. किताबी कीड़ा, अडिग, जिद्दी, मां की दुलारी.. प्राणी प्रेम ऐसा कि लोग मुझे लगभग पागल समझते हैं! खाने के लिए जीनेवाली और हद दर्जे की बातूनी.. लेकिन मेरा लेखन आपको बोर नहीं करेगा..