पेट साफ़ हुए बिना एक दिन भी रहना बहुत असहनीय हो सकता है। यदि यह समस्या लंबे समय तक जारी रहती है, तो आप कब्ज़ से पीड़ित हो सकते हैं। अगर कठोर मल की समस्या आए या फिर सप्ताह में तीन बार से कम मल त्याग हो, तो ये कब्ज़ के लक्षण हो सकते हैं।

कब्ज़ का क्या कारण है?

भोपाल के डॉक्टर उमेश शुक्ला के अनुसार, आपकी आंत /कोलोन का मुख्य कार्य पाचन तंत्र से गुजरते समय अवशिष्ट भोजन से पानी को अवशोषित करना है। यह तब मल (अपशिष्ट) बनाता है। कोलोन की मांसपेशियां फिर अपशिष्ट को मलाशय के माध्यम से बाहर निकाल देती हैं।

यदि मल कोलोन में बहुत समय तक रहता है और पेट साफ नहीं होता तो यह कब्ज़ पैदा कर देता है। कब्ज़ को रोकने के लिए या कब्ज़ से राहत पाने के लिए सबसे अच्छे तरीकों में से एक यह है कि इसे बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थों से बचें। यहां हम आपको कुछ फ़ूड आइटम्स के बारे में बता रहे हैं, जिनसे आपको बचने की कोशिश करनी चाहिए।

कब्ज़ हो तो आपको ये खाद्य पदार्थ कभी नहीं खाने चाहिए

कब्ज़ बढ़ाये चावल
कब्ज़ बढ़ाये चावल

चावल: सफेद चावल को ब्राउन राइस की तुलना में अधिक पॉलिश किया जाता है, जिससे इसमें से भूसी और चोकर को हटा दिया जाता है, जो चावल से आधे पोषक तत्वों को छीन लेता है और कब्ज़ का कारण बनता है। इसलिए, ज्यादातर हेल्थ एक्सपर्ट्स ब्राउन राइस खाने की सलाह देते हैं। ब्राउन राइस में सफेद चावल की तुलना में अधिक फाइबर होता है।

ब्रेड: साबुत अनाज के विपरीत, आटे में कोई फाइबर नहीं होता है। ये खाद्य पदार्थ स्टार्च पर भारी हैं और आपको कब्ज़ जैसी समस्या दे सकते हैं। इसलिए आटे से बनी ब्रेड खाने से बचें क्योंकि इसे पचाने में आपके पाचन तंत्र को काफी मशक्कत होती है।

रेड मीट: मांस में प्रोटीन और अन्हेल्दी फैट होता है जो कब्ज़ की समस्या शुरू कर सकता है। चूकिं हाई लेवल का फैट और कठोर प्रोटीन फाइबर होने की वजह से यह टूटने में समय लेते हैं और हाई आयरन होने की वजह से कब्ज़ का कारण बनते हैं। इसलिए रेड मीट कम से कम खाना ही सही है और अगर नॉन वेज खाना ही है तो चिकन या फिश खाएं।

फ्रोजन फ़ूड: ये फ़ूड सुविधाजनक हो सकते हैं लेकिन घर में बने खाने की तुलना में शायद ही कोई पोषण इनमें मौजूद हो। यह उन खाद्य पदार्थों की सूची में शामिल हैं जो कब्ज़ पैदा कर सकते हैं। ये आम तौर पर सोडियम में उच्च होते हैं, जो नमक को पतला करने के लिए पानी को स्टोर करते हैं।

फास्ट फूड: सभी नूडल्स और फ्राइज़ में लो-फाइबर और फैट हाई होता है। फास्ट फूड में अक्सर पोषण नहीं होता है। यदि आपको ऐसे फ़ूड आइटम्स खाना पसंद है, तो आपको घर पर बर्गर, फ्राई और अन्य फास्ट फूड बनाने की कोशिश करनी चाहिए।

डेयरी उत्पाद: बड़ी मात्रा में, डेयरी उत्पाद, जैसे दूध, पनीर, दही, और आइसक्रीम, कई लोगों के लिए कब्ज़ पैदा कर सकते हैं। डेयरी में मौजूद लैक्टोज, पेट में गैस और सूजन का कारण बन सकता है। ऐसे में उन लोगों को डेयरी उत्पाद नहीं खाने चाहिए जिनका पेट अक्सर गड़बड़ रहता हो।

कॉफ़ी: अगर आप कम पानी पीते हैं और कॉफ़ी, काली चाय, कोला ज़्यादा लेते हैं तो दस्त से लेकर कब्ज़ तक की समस्या हो सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि इन सभी में कैफीन की मात्रा अधिक होती है।

चॉकलेट: चॉकलेट पाचन प्रक्रिया को धीमा कर सकती है और अगर आपको कब्ज़ है तो इससे बचना चाहिए। एक जर्मन स्टडी के मुताबिक चॉकलेट वसा में उच्च है और इसमें बहुत कम फाइबर है, जो आंत के माध्यम से भोजन के पास होने की प्रक्रिया को धीमा कर सकता है। इसके अलावा, यदि आप इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS) से पीड़ित हैं, तो चॉकलेट आपके आपकी मुसीबत और ज्यादा बढ़ा सकती है।

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