दुनिया भर में लोग कैफीन के दीवाने हैं। यही वजह है की कॉफी दुनिया में लोगों का पसंदीदा पेय है। इसकी खुशबू से लोगों के दिन की शुरुआत होती है और यह सभी को दिन भर उर्जावान रखती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में कॉफी को लेकर कई परंपराएं प्रचलित हैं?
लोगों की आदतों के हिसाब से और जगहों के हिसाब से, लोग कॉफी पीना पसंद करते हैं। इन परंपराओं का असर कॉफी पर भी पड़ता है। यह अपने आप में किसी भी व्यक्ति के लिए ज़रूरी है कि वह कॉफी को किस तरह पीना चाहता है। आइए बात करते हैं दुनिया की ऐसी पांच परंपराओं के बारे में, जो कॉफी से जुड़ी हुई है।
दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में कॉफी को लेकर कई परंपराएं प्रचलित हैं
इटली: इटली में कॉफी एस्प्रेसो के रूप में सर्व की जाती है, जिसे आपको खड़े-खड़े पीना होता है। वहीं आप इटली में देर रात कैपेचीनो आर्डर नहीं कर सकते, क्योंकि इटली के लोग इसे अच्छा नहीं मानते। इटली के लोगों के अनुसार कैपेचीनो सुबह पिया जाने वाला पेय है।
टर्की: टर्की के लोग मानते हैं कि कॉफी ‘बिल्कुल काली, बिल्कुल स्ट्रॉन्ग और बिल्कुल मीठी’ होनी चाहिए। ऐसी कॉफी पीने के लिए एक अलग स्वाद आपको पैदा करना होता है। यहां ऐसी कॉफी खाने के बाद परोसी जाती है, जो तांबे के बड़े पात्रों में रखी होती हैं। इस कॉफी को टर्किश कैंडी के साथ परोसा जाता है, जिससे कॉफी का कड़वापन दूर हो सके।
इस कॉफी को टर्किश कैंडी के साथ परोसा जाता है
क्यूबा: यहां पर आपको कॉफी कप में नहीं, बल्कि शॉर्ट के रूप में परोसी जाती है। यहां के लोग परंपरा के अनुसार सुबह कॉफी शॉर्ट लेते हैं, जो पीने में बहुत स्ट्रॉन्ग होती है। यहां सुबह उठकर स्ट्रॉन्ग कॉफी पीने का चलन प्रचलित है।
सऊदी अरेबिया: सऊदी अरेबिया में कॉफी पीने का पहला हक बड़ों को मिलता है। यहां उम्रदराज़ लोग सबसे पहले कॉफी पीते हैं, जिसे इलायची और खजूर मिलाकर बनाया जाता है। इससे कॉफी को फ्लेवर भी मिलता है और इसमें मीठापन भी आता है।
यहां उम्रदराज़ लोग सबसे पहले कॉफी पीते हैं
यूटोपिया: यहां के लोग कॉफ़ी से इस कदर जुड़े हुए हैं कि उन्होंने इसे राष्ट्रीय पेय के रूप में घोषित कर दिया है। यहां कॉफी बनाते वक्त यूटोपियन लोग सबसे पहले कप में चीनी डालते हैं और बाद में कॉफी के साथ पानी मिलाकर डालते हैं। यहां कॉफी को अलग अलग नाम से जाना जाता है, जिसमें आउल टोना और बारका जैसे नाम प्रचलित है, जिसका मतलब होता है, ‘आशीर्वाद के रूप में’।
तो अगली बार यदि आप इन जगहों पर जाएं और आपका कॉफी पीने का मन हो, तो इन परंपराओं के बारे में ज़रूर ध्यान दीजिएगा। यह आपको कॉफी पीने का एक अलग अंदाज सिखा कर जाएंगे।
मेरी आवाज़ ही पहचान है! संगीत मेरी कल्पना को पंख देता है.. किताबी कीड़ा, अडिग, जिद्दी, मां की दुलारी.. प्राणी प्रेम ऐसा कि लोग मुझे लगभग पागल समझते हैं! खाने के लिए जीनेवाली और हद दर्जे की बातूनी.. लेकिन मेरा लेखन आपको बोर नहीं करेगा..