शायद ही ऐसा कोई ऐसा व्यक्ति होगा, जिसे चॉकलेट खाना पसंद नहीं हो। मनपसंद डेज़र्ट के रूप में हम चॉकलेट खाना पसंद करते हैं। कुछ लोग ऐसे होते हैं जिन्हें चॉकलेट का स्वाद पसंद है और कुछ ऐसे होते हैं जो चॉकलेट को अलग अलग खाद्य पदार्थों के साथ खाना पसंद करते हैं। लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि ये क्रीमी चॉकलेट जीभ पर रखते ही कैसे पिघल जाती है? नहीं न? आइये हम आपको इसकी वजह बताते हैं।

इसलिए पिघलती है चॉकलेट

असल में चॉकलेट की महक और स्वाद के अलावा इसकी क्रीमी बनावट उसे खास बनाती हैं और यह खास बात इसमें कोको बटर  की वजह से आती है। चॉकलेट बनाने की प्रक्रिया काफी कठिन होती है, फिर भी इसका नतीजा मीठा होता है। कोको की फलियों को कई तरह की तकनीक जैसे खमीर उठाना, सुखा भूनना इसके अलावा दबाकर इससे कोको बटर निकाला जाता है। यह हलके पीले रंग का होता है, जो खास तौर से चॉकलेट बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। कोको बटर की काफी मात्रा में प्राकृतिक सैच्युरेटेड फैट होते हैं, जो कमरे के तापमान पर स्थिर रहते हैं। लेकिन जैसे ही तापमान थोड़ा भी बढ़ता है. गर्मी के कारण यह पिघलने लगता है। एक अच्छी चॉकलेट की निशानी यही होती है जब इसमें 100% कोको बटर शामिल हो। कोको बटर गुणवत्तापूर्ण हो तो चॉकलेट आसानी से जीभ पर रखते ही पिघल जाती है और यह एक अच्छी चॉकलेट की निशानी होती है।
Chocolate contains phenylethylamine, which triggers the release dopamine in the brain
यह एक अच्छी चॉकलेट की निशानी होती है
यदि अगली बार आप चॉकलेट खरीदने जाए तो पीछे लिखी सामग्रियों पर जरूर ध्यान दें। इससे आप आसानी से अच्छी चॉकलेट खरीद पाएंगे। जब बात हो चॉकलेट की, तो इसके दो प्रकार होते हैं, मिल्क चॉकलेट और डार्क चॉकलेट। लेकिन इन दोनों प्रकारों में डार्क चॉकलेट आपकी सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होता है। आइए जानते हैं कैसे।
Chocolate
डार्क चॉकलेट आपकी सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होता है

डार्क चॉकलेट के भी हैं फायदे

अमेरिका की एक यूनिवर्सिटी में हुई शोध के मुताबिक यह बात सामने आई है कि डार्क चॉकलेट की शुगर की मात्रा नर्वस सिस्टम के कामों पर असर डालती है, जिसे खाने से हम खुश होते हैं। लंबे समय तक किए गए शोध में यह बात सामने आई है कि चॉकलेट बार के रूप में ‘कोको’ की ज्यादा मात्रा इंसान के दिलो-दिमाग पर अच्छा प्रभाव डालती हैं। कोको की ज्यादा मात्रा से याददाश्त, मनोदशा और इम्यूनिटी पर अच्छा प्रभाव पड़ता है। यहां तक कि कोको में पाए जाने वाले फ्लेवोनॉयड से शरीर की सूजन भी कम होती है और इससे इम्यूनिटी में इज़ाफा होता है।

तो अब देर किस बात की, आप भी उठाइये डार्क चॉकलेट का मज़ा।

मेरी आवाज़ ही पहचान है! संगीत मेरी कल्पना को पंख देता है.. किताबी कीड़ा, अडिग, जिद्दी, मां की दुलारी.. प्राणी प्रेम ऐसा कि लोग मुझे लगभग पागल समझते हैं! खाने के लिए जीनेवाली और हद दर्जे की बातूनी.. लेकिन मेरा लेखन आपको बोर नहीं करेगा..