भारत के कई राज्य ऐसे हैं, जहां चावल मुख्य भोजन के रूप में परोसा जाता है। वहीं कुछ लोगों का चावल के बिना भोजन अधूरा होता है। इसके अलावा भारत में ब्राउन राइस, वाइट राइस आदि चावलों की कई वेराइटी लोगों के बीच चर्चा में है। लेकिन चावल से जुड़े हुए कुछ मिथ आपको चावल खाने से रोक रहे हैं। इसीलिए यदि आप भी इस तरह की गलत बातों का शिकार हैं, तो यह खबर आपके लिए ही है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं चावल के उन मिथ्स के बारे में, जो लोगों के बीच प्रचलित है।

चावल में ग्लूटेन होता है: यह लोगों के बीच एक प्रचलित मिथ है कि चावलों में ग्लूटेन होता है। जबकि सच बात यह है कि चावल पूरी तरह से ग्लूटेन फ्री होते हैं। अन्य अनाजों से शरीर में एलर्जी होने का खतरा रहता है, जबकि चावल खाने से आपको किसी तरह की एलर्जी नहीं होती।

मोटापा बढ़ता है: चावलों से जुड़ा यह मिथ भी लोगों के बीच बहुत प्रचलित है। लेकिन आप नहीं जानते होंगे की चावल में फैट तो कम होता ही है, साथ ही इसमें कोलेस्ट्रॉल भी नहीं होता। यह शरीर में कंपलेक्स कार्बोहाइड्रेट और विटामिन डी की पूर्ति करता है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि चावल ऊर्जा का एक बहुत अच्छा स्त्रोत है, वहीं चावल खाने से आपको मोटापा नहीं आता।

एक कप चावल में करीब 3 से 4 ग्राम प्रोटीन की मात्रा होती है

चावल में प्रोटीन नहीं होता: यह कहना बिल्कुल गलत होगा कि चावलों में प्रोटीन नहीं होता। लोग चावल को एक ऐसा भोज्य पदार्थ मानते हैं, जो प्रोटीन रहित होता है, लेकिन आप शायद यह बात नहीं जानते होंगे कि एक कप चावल में करीब 3 से 4 ग्राम प्रोटीन की मात्रा होती है। प्रोटीन की इतनी सारी मात्रा किसी भी और अनाज में आपको नहीं मिलेगी।

रात में नहीं खाना चाहिए चावल: यह मिथ तो लोगों के बीच इतना प्रचलित है कि लोग रात को एक चम्मच चावल खाने से भी डरते हैं। जिन लोगों को कम नींद आने की समस्या होती है, उनके लिए रात में चावल खाना बेहद फायदेमंद होता है। क्योंकि यह शरीर में लेप्टिन संवेदनशीलता बढ़ा देता है। लेप्टिन एक फैटी टिशू से बनता है, जो शरीर में कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करता है। इसके अलावा रात में हाई कार्बोहाइड्रेट वाला भोजन खाया जा सकता है, क्योंकि यह ग्लूकोज़ में बदल जाता है। रात में ग्लूकोस आसानी से ऊर्जा में परिवर्तित हो जाता है। जब चावल दिन में खाया जाता है तो ग्लूकोस फैट में कन्वर्ट हो जाता है। इसीलिए दिन के बजाय रात में चावल खाना आपके लिए ज्यादा फायदेमंद होगा।

अगर आप भी अब तक ऐसे मिथ्स के शिकार थे, तो आज ही इनसे छुटकारा पा लीजिये।

मेरी आवाज़ ही पहचान है! संगीत मेरी कल्पना को पंख देता है.. किताबी कीड़ा, अडिग, जिद्दी, मां की दुलारी.. प्राणी प्रेम ऐसा कि लोग मुझे लगभग पागल समझते हैं! खाने के लिए जीनेवाली और हद दर्जे की बातूनी.. लेकिन मेरा लेखन आपको बोर नहीं करेगा..