नवरात्रि में मां दुर्गा के अलग-अलग नौ स्‍वरूपों की पूजा की जाती है। इस दौरान भक्‍त मां को प्रसन्‍न करने के लिए कई तरह के जतन करते हैं। कोई व्रत रखता है तो कोई जागरण करता है। वैसे मान्‍यताओं के अनुसार दुर्गा पूजा के दौरान मां को प्रसन्‍न करने का एक और तरीका है। जी हां, कहते हैं कि अगर देवी मां को उनका पंसदीदा भोजन अर्पित किया जाए, तो वह प्रसन्‍न हो जाती हैं इसलिए अष्टमी और नवमी के दिन खास भोग लगाया जाता है। आइए जानते है अष्टमी और नवमी के खास भोग के व्यंजनों के बारे में। .

मां दुर्गा को क्‍यों लगाया जाता है विशेष भोग

पौराण‍िक कथा के अनुसार नवरात्र में मां दुर्गा अपने बच्चों, लक्ष्मी, सरस्वती, कार्तिक और गणेश के साथ अपने मायके यानी धरती आती हैं। मायके आई लड़की यानी दुर्गा मां को बढ़‍िया भोजन, नए कपड़े और श्रृंगार का सामान अर्प‍ित किया जाता है। दुर्गा मां को भोग लगाए बिना यह उत्‍सव अधूरा रहता है। भारत के हर राज्य में अष्टमी और नवमी का अपना अलग महत्व है। कई लोग जिन्होंने नवरात्रि के व्रत रखे हैं वे अष्टमी के दिन भी अपना व्रत पारण करते है यानी खोलते है, तो उत्तर भारत के कई लोग नवमी के दिन अपना व्रत का पारण करते है।

काले चने

kala chana
बनाने से पहले काले चने को रात में पानी में भिगो दिया जाता है

नवरात्रि की अष्टमी से कन्या पूजन शुरू हो जाता है। अष्टमी और नवमी में कन्याओं को देवी के नौ रूप मानकर कन्या को पूजा जाता है। कन्याओं के पैरो को धोया जाता है फिर उन्हें आदर सत्कार के साथ भोजन कराया जाता है। ऐसा करने वाले भक्तों को मां सुख समृद्धि वरदान देती है। भोजन में सबसे पहले दी जाती है चने की सब्ज़ी बिना प्याज, लेहसुन और टमाटर के।

हलवा और पूरी

halwa puri
हलवा को देशी घी में ही बनाया जाता है

हलवा और पूरी मां दुर्गा का सबसे प्रिय भोग माना जाता है। सूजी का हलवा और छोटी -छोटी पूरियां अष्टमी और नवमी में बनती है, इसके बिना माता को भोग लगाया ही नहीं जाता। हलवा पूरी से मां को भोग लगाने के बाद ही वही प्रसाद कन्या पूजन के दौरान कन्या को खिलाया जाता है ।

खीर

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खीर को बनाने के लिए कई लोग चीनी की जगह गुड़ का भी इस्तेमाल करते हैं

कहते हैं कि माता रानी को दूध से बने व्यंजन सर्वाधिक प्रिय है। इसलिए नवरात्र में अष्टमी और नवमी के दिन घर पर खीर बनती ज़रूर है।खीर एक प्रकार का मिष्ठान्न है, जिसे चावल को दूध में पका कर बनाया जाता है। खीर को पायस भी कहा जाता है। ‘खीर’ शब्द, ‘क्षीर’ का अपभ्रंश रूप है। घर पर कोई भी बड़ा त्योहार या शुभ कार्य होता है तो खीर बनाना बहुत शुभ माना जाता है। जिन भक्तों ने माता के लिए उपवास रखा हुआ होता है वो माता को खीर का भोग लगा करउस प्रसाद खुद ग्रहण करते है। कहते है खीर मीठी होती है और दूध से बनती है तो इसी को खाकर सभी भक्त अपने व्रत को खोलते है।

पुरणपोळी

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गुड़ीपाडवा पर्व पर इसे विशेष रूप से बनाया जाता है।

महाराष्ट्र में अष्टमी और नवमी में कई घरों में पुरणपोळी बनाने का पुराना रिवाज़ है।पुरन पोली, महाराष्ट्र का प्रसिद्ध मीठा पकवान है। यह हर एक तीज त्योहार आदि के अवसरों पर भी बनाया जाता है। इसे आमटी के साथ खाया जाता है।पुरन पोली की मुख्य सामग्री चना दाल होती है और इसे गुड़ या शक्कर से मीठा स्वाद दिया जाता है। इसे भरवां मीठा परांठा भी कहा जाता है । नवरात्रि के अष्टमी और नवमी पूजन में पुरणपोळी ज़रूर बनती है और कन्या पूजन में कन्याओं को भोजन में यह प्रसाद दिया जाता है, इसके साथ दिया जाता है केले, नारियल और मिष्ठान्न।

खिचड़ी

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खिचड़ी में कई तरह के मसाले डाले जाते है

बंगाली परिवार शारदीय नवरात्रि की अष्टमी को मां दुर्गा को खिचड़ी का भोग लगाते हैं। अगर आप बंगाली नहीं है तब भी आपने भी ज़रूर इस प्रसाद को ग्रहण किया होगा यह खाने में बहुत ही टेस्टी होती है। ये खिचड़ी बिना लहसुन प्याज के ही मौसमी सब्जियों डालकर बनायी जाती है। अष्टमी और नवमी की पूजा में खिचड़ी का भोग लगाया जाता है। बड़े – बड़े बर्तनों में बहुत सारी खिचड़ी बनाई जाती है। माता रानी को भोग लगाने के बाद इस खिचड़ी को प्रसाद के रूप में सभी पंडालों में भक्तजनों को खिलाया जाता है।

ये थे वो भोग जो अष्टमी और नवमी में माता रानी को चढ़ाए जाते हैं। इस नवरात्री ये भोग आप भी अपने घर पर बनाए और माता रानी को खुश करे। आशा है मां आपकी सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करेगी।

पहचान छोटी ही सही लेकिन अपनी खुद की होनी चाहिए। इसी सोच के साथ जीती हूँ।अपने सपनों को साकार करने की हिम्मत रखती हूं और ज़िन्दगी का स्वागत बड़े ही खुले दिल से करती हूँ। बाते और खाने की शौकीन हूँ । मेरी इस एनर्जी को चार्ज करती है, मेरे नन्ने बच्चे की खिलखिलाती मुस्कुराहट।