चाय! चाय ना मिले तो हमारे दिन की शुरुआत नहीं होती। यही वजह है कि हमारी सुबह चाय की चुस्कियों से होती है। जहां एक ओर लोग अपनी सेहत का ख्याल रखते हुए ग्रीन टी और हर्बल टी पीना पसंद करते हैं, वहीं कुछ लोग चाय के इतने शौक़ीन होते हैं कि वे सिर्फ स्वाद की खातिर अलग-अलग तरह की चाय पीना पसंद करते हैं। यदि आपको भी अलग-अलग तरह की चाय पीना पसंद है, तो आज हम आपको अफगानी चाय के बारे में बताएंगे, जो आपको चाय के एक अलग स्वाद से रूबरू करवाएगी।

क्या है अफगानी चाय?

अफगानी चाय भी ब्लैक टी और हर्बल टी की तरह बनाई जाती है। बस इसमें इस्तेमाल की जानेवाली सामग्रियां अलग होती हैं। इसमें खास तौर पर दालचीनी, अदरक और हरी इलायची और चायपत्ती का इस्तेमाल होता है। आइये जानते हैं कैसे बनती है अफगानी चाय।

आप चाहें तो इसमें चीनी की जगह शहद का भी इस्तेमाल कर सकते हैं

कैसे बनती है अफगानी चाय?

इस चाय को बनाने के लिए आपको डेढ़ कप पानी की आवश्यकता होगी। पानी को भगौने में उबलने दें, जिसके बाद इसमें दालचीनी का एक बड़ा टुकड़ा, अदरक का एक छोटा टुकड़ा और 2 हरी इलायची डालें। इसे तब तक उबालें, जब तक चाय में इसका पीला रंग ना घुलने लगे। इसके बाद इसमें 1 टीस्पून चायपत्ती डाल कर कुछ देर के लिए उबाल लें। आप चाहें तो इसमें चीनी की जगह शहद का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इसे प्याली में छानकर गर्मा-गर्म सर्व करें।

अफगानी चाय में कॉफी के मुकाबले आपको कम कैफीन मिलेगी

क्या हैं अफगानी चाय के फायदे?

अफगानी चाय में मौजूद सामग्रियों में भरपूर मात्रा में विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो हमारे शरीर के इम्यून सिस्टम को ताकतवर बनाता है। एंटीऑक्सीडेंट तत्व शरीर में बढ़ने से कोलेस्ट्रॉल कम होता है और हृदय रोग का खतरा दूर होता है।

साथ ही जो लोग कॉफी पीते हैं, उनके शरीर में कैफीन की मात्रा अधिक होती है। लेकिन अफगानी चाय में कॉफी के मुकाबले आपको कम कैफीन मिलेगी, जो आपके स्वास्थ्य के लिए अच्छा माना जाता है।

अफगानी चाय पीने से आपके शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली सक्रिय हो जाती है, जिससे संक्रमण के विरुद्ध लड़ने की क्षमता आप को मिलती है। सर्दी-जुकाम में खास तौर पर अफगानी चाय पीना आपके लिए फायदेमंद माना जाएगा।

इसलिए दिन में कम से कम एक बार आपको अफगानी चाय की चुस्कियों का मज़ा ज़रूर लेना चाहिए।

मेरी आवाज़ ही पहचान है! संगीत मेरी कल्पना को पंख देता है.. किताबी कीड़ा, अडिग, जिद्दी, मां की दुलारी.. प्राणी प्रेम ऐसा कि लोग मुझे लगभग पागल समझते हैं! खाने के लिए जीनेवाली और हद दर्जे की बातूनी.. लेकिन मेरा लेखन आपको बोर नहीं करेगा..