भारतीय घरों में बचा हुआ खाना फेंका नहीं जाता, बल्कि उसे दोबारा अलग रेसेपी में बदलकर खाने का चलन देखा जाता है। इसकी वजह है कि भारतीय घरों में खाने का दुरूपयोग नहीं किया जाता। जहां एक ओर रात की रोटियों का चूरमा और उपमा बनाकर खाया जाता है, वहीं रात के बचे हुए राइस से फ्राइड राइस बना कर खाने का चलन है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि रात के बचे हुए चावलों को खाने से आपको फ़ूड पॉइज़निंग हो सकती है। अगर ये सच है, तो क्या आप दोबारा बचे हुए चावलों को खाना पसंद करेंगे? शायद नहीं। आइये जानते हैं इस बात के पीछे आखिर क्या सच्चाई है।

क्या कहती है रिसर्च?

इस रिसर्च के बाद ये बात सामने आयी कि चावलों को ठीक से स्टोर ना किया जाए, तो आपको फ़ूड पॉइज़निंग की समस्या हो सकती है

दरअसल कुछ समय पहले इंग्लैंड की नॅशनल हेल्थकेयर सर्विस द्वारा की गई रिसर्च में ये बात सामने आयी थी कि बचे हुए चावलों को दोबारा खाने से फ़ूड पॉइज़निंग होने का खतरा रहता है। कहा जा रहा था कि चावलों को दोबारा गर्म करने की वजह से ये समस्या होती है, लेकिन इस रिसर्च के बाद ये बात सामने आयी कि चावलों को ठीक से स्टोर ना किया जाए, तो आपको फ़ूड पॉइज़निंग की समस्या हो सकती है।

कैसे होती है फ़ूड पॉइज़निंग?

इस रिसर्च की मानें तो चावलों में बैसिलस सिरस नामक जीवाणु, या कहें बैक्टेरिया होते हैं, जो फ़ूड पॉइज़निंग के लिए ज़िम्मेदार माने जाते हैं। यह बैक्टेरिया कच्चे चावलों में होता है और इतना शक्तिशाली होता है कि चावलों को पकाने के बाद भी ज़िंदा रहता है और तेज़ी से बढ़ता है। जब चावलों को पकाने के बाद इसे सामन्य तापमान पर ज़्यादा देर के लिए छोड़ दिया जाता है, तो ये बैक्टेरिया तेज़ी से बढ़ता है और विषैले तत्व पैदा करता है। इसकी वजह से रखे हुए चावलों को खाने से फ़ूड पॉइज़निंग हो सकती है।

कैसे करें चावलों को स्टोर?

बचे हुए चावलों को सिर्फ एक बार गर्म करें

फ़ूड पॉइज़निंग जैसी गंभीर समस्या ना हो, इसके लिए ज़रूरी है कि आप बचे हुए चावलों को अच्छी तरह से स्टोर करें। इसके लिए चावलों को गर्म रहने पर ही परोसें। वहीं चावलों को ठंडा होने के एक घंटे के भीतर फ्रिज में स्टोर करें। साथ ही इस बात का ध्यान रखें कि बचे हुए चावल 1 दिन से ज़्यादा बासी ना हो। बचे हुए चावलों को सिर्फ एक बार गर्म करें। बार-बार गर्म करने से इसके पोषक तत्व ख़त्म हो जाते हैं।

इन बातों का ख्याल रख कर आप चावल भी खा सकेंगे और फ़ूड पॉइज़निंग जैसी समस्या से भी बचे रहेंगे।

मेरी आवाज़ ही पहचान है! संगीत मेरी कल्पना को पंख देता है.. किताबी कीड़ा, अडिग, जिद्दी, मां की दुलारी.. प्राणी प्रेम ऐसा कि लोग मुझे लगभग पागल समझते हैं! खाने के लिए जीनेवाली और हद दर्जे की बातूनी.. लेकिन मेरा लेखन आपको बोर नहीं करेगा..