साल 2018 की बड़ी फिल्मों में से एक फिल्म ज़ीरो रोमांस और इमोश्न से भरपूर है। शाहरुख खान स्टारर इस फिल्म में कई सरप्राईज़ है। बौने के किरदार में दिल जीत लेने वाला बउआ सिंह, सफल लेकिन टूटे दिन वाली बबीता कुमारी (कैटरीना कैफ) विकलांग लेकिन इरादों की पक्की आफिया (अनुष्का शर्मा) इस फिल्म के किरदार है, जो आपको एहसास दिलाएंगे कि अधूरा होने में बुराई नहीं, लेकिन अधूरेपन की सच्चाई से भागते रहने में बुराई ज़रुर है। असली जीत तभी है जब हम सच्चाई से भागना छोड़ देते हैं।

फिल्म की कहानी

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फिल्म की कहानी हिमांशु शर्मा ने लिखी है, जिन्होनें रांझना और तनु वेड्स मनु लिखी थी

आन्नद एल राय निर्देशित फिल्म ज़ीरो छोटे कद वाले बउआ सिंह (शाहरुख खान) की कहानी है। जिसे अपने बौने होने का कोई गम नहीं। खुद को किसी स्टार से कम ना समझते बउआ को लगता है कि कोई भी लड़की आसानी से उसके गालों पर पड़ते डिम्पल पर फिदा हो सकती हैं। पिता (तिगमांशु धुलिया) से हमेशा झाड़ खाते रहते बउआ को लगता है कि उस की कद्र उसके पिता को नहीं। 38 साल का बेरोज़गार बउआ दिन रात सुपर स्टार बबीता कुमारी के सपने ज़रुर देखता है, लेकिन मैरिज ब्यूरो में खुद के लिए लड़की भी तलाशता है। एक दिन उसकी नज़र आफिया( अनुष्का शर्मा) की तस्वीर पर पड़ती है। इस बात से बेखबर की वह सेरेब्रल पाल्सी की शिकार है और व्हील चेयर पर है वह उससे मिलने पहुंच जाता है। पेशे से साइंटिस्ट आफिया को व्हीलचेयर पर देख बउआ भले ही उस पर दया ना दिखाए, लेकिन उसकी मोहब्बत उसे देखते ही छुमंतर हो जाती है। बउआ उसके इगो को तब ठेस पहुंचती है जब उसे एहसास होता है कि कैसे एक विकलांग लड़की भी उसे नहीं देखती और उसे घास तक नहीं डालती। वह उसे नीचा दिखाने के प्लान भी बनाता है, लेकिन खुद ही उस जाल में फंस जाता है।
वहीं बबीता का फैन होने के कारण एक दिन मेरठ आई बबीता से उसे मिलने का मौका मिलता है। बबीता की नशे में उसे की गई एक किस उसे इस बात की गलतफहमी दे देती है कि बबीता को उससे प्यार है। किसी तरह वह बबीता से फिर मिलने में सफल होता है। उसकी मुलाकात इस ग्लैमर और लाइट कैमरा एक्शन के पीछे की असली बबीता से होती है और फिर एक के बाद एक कहानियां जुड़ती हैं। किसको किससे प्यार है, किसके अधूरेपन को कौन पूरा करेगा, आखिर क्या हर कोई अपनी ज़िंदगी से खुश है, जैसे कई इमोशन को फिल्म के ज़रिए राइटर हिमांशु ने दर्शकों तक पहुंचाने की कोशिश की है।

बउआ को देख कर आप मारेंगे सीटी

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यह तीनों फिल्म जब तक है जान में भी साथ काम कर चुके हैं

फिल्म की जान है शाहरुख खान। उनके पहले ही सीन पर लोगों की तालियां और सीटी बजती है। शाहरुख लोगों को अपने साथ नचाते भी है और रुलाते भी। खास बात है कि फिल्म में छोटे कद का होने के लिए जिस तरह के हाव भाव में बदलाव होने चाहिए, उसे शाहरुख ने बखूबी निभाया है। खुद पर इतराते, साफ दिल वाले, बबीता के प्यार में दीवाने जैसे कई इमोशन को शाहरुख ने फिल्म में बखूबी पेश किया है। ज़िम्मेदारियों से दूर भागता और खुद को कोयल कहते बउआ सिंह में कई कमियां होते हुए भी आप उससे प्यार करते है, जिसका एक ही कारण है उसका साफ दिल और नेक इरादे। इशारों पर चुटकी बजाते ही तारों को तोड़ देता बउआ कद का भले ही छोटा हो, लेकिन आसमान में उड़ान भरने का हौसला रखता है।

व्हील चेयर पर बैठी आफिया भले ही ज़मीन पर चल ना सके, लेकिन अपने दिमाग से लोगों को दूसरे ग्रह पहुंचाने की ज़ज़्बा रखती है। सेरेब्रल पाल्सी की शिकार आफिया का किरदार फिल्म में काफी अहम है। हालांकि अनुष्का ने इस किरदार को बेहतर तरीके से निभाने की कोशिश ज़रुर की है, लेकिन वह उतना नहीं उभर सका, जितना होना चाहिए। इस किरदार के लिए उन्होंने कुछ महीनों की ट्रेनिंग भी ली थी, लेकिन इससे पहले कुछ इसी तरह के किरदार को प्रियंका ने फिल्म बर्फी में और कल्कि कोचलिन ने फिल्म मार्गरिटा विद अ स्ट्रॉ में उनसे बेहतर तौर पर निभाया है। विकलांगता के बावजूद मज़बूत इरादे और स्वाभिमान रखते आफिया के डॉयलॉग इतने शानदार है कि वह उस किरदार में जान डाल देंगे।

अब बात बबीता कुमारी की जिनका बउआ सिंह भी फैन है। वह एक एक्ट्रेस का किरदार निभा रही है। जिनके पास नेम और फेम है, लेकिन फिर भी आंखों में आंसू है। उनकी एंट्री एक धमाकेदार गीत के साथ फिल्म में होती है और अगले ही सीन में उनकी आंखों में आंसू और दर्द है। फिल्म में उनके किरदार में जो कॉन्ट्रास्ट है उसे कैटरीना ने काफी खूबसूरती के साथ निभाया है। कैटरीना का छोटा ही सही लेकिन बेहतरीन किरदार है। फिल्म में कैटरीना का बीच बीच में आना फिल्म में जान डाल देता है। कैटरीना दर्शकों को बांधे रखने में सफल हुई है।
मोहम्मद जीशान अयूब फिल्म में शाहरुख के दोस्त बने है। खास बात है जहां फिल्म के सभी किरदारों में कुछ ना कुछ अधूरापन है, वहीं उनके किरदार की भी एक आंख पत्थर की है। फिल्म में वह सुख और दुख में साथ निभाने वाले दोस्त बने है।

इसके अलावा फिल्म में काजोल, रानी , दीपिका, जुही, सलमान और अभय देओल जैसे और भी कई कलाकार है। हालांकि वह क्या कर रहे है, वह सरप्राइज़ होने के कारण अगर दर्शक खुद थियेटर में जाकर देखे तो बेहतर है। खास बात है कि इस फिल्म में कुछ पलों के लिए ही सही लेकिन श्रीदेवी भी है। जिनकी यह आखिरी फिल्म होगी।

फिल्म में अगर सबसे खास बात है तो वह है फिल्म की कहानी और डॉयलाग । लेकिन फिल्म को काफी बड़ा कर दिया गया है। इस फिल्म को आसानी से छोटा किया जा सकता था। फिल्म का फ़र्स्ट हॉफ काफी एंटरटेन करता है। ब्रेक के बाद फिल्म दर्शकों को बांधे रखने में सफल नहीं हो पाती। फिल्म में एक या दो ही बड़े टर्निंग प्वाइंट है, लेकिन वहीं पर फिल्म कमज़ोर हो जाती है क्योंकि फिल्म में वह सीन दर्शकों को कनवींस नहीं कर पाते कि आखिर ऐसा क्यों हुआ। यह बात कहना गलत ही होगा कि फिल्म के राइटर हिमांशु शर्मा ने इससे पहले रांझणा और तनु वेड्स मनु की कहानी लिखी थी, जो इससे कई बेहतर थी।

अंत में दर्शकों को सिर्फ यही सलाह है कि अगर आप शाहरुख के फैन है, अगर आपको आन्नद एल राय के ह्युमन इमोशन को पकड़ कर रखने वाली फिल्में पसंद है, तो इस हफ्ते आप मेरठ , उतर प्रदेश के छोटे शहर में रहने वाले छोटे कद के बउआ सिंह से मुलाकात कर आइए क्योंकि फिल्म में कई ऐसी चीजे भी है जिनके बारे में पहले के किसी भी तरह का कोई भी अंदाज़ा लोगों को नही है और जिसका मजा आप सिर्फ थिएटर में फिल्म देख कर ही उठा सकते हैं।

हॉट फ्राइडे टॉक्स इस फिल्म को तीन स्टार देता है।

HFT हिन्दी की एडिटर, मनमौजी, हठी लेकिन मेहनती..उड़ नही सकती लेकिन मेरी कल्पनाशक्ति को उड़ने से कोई नहीं रोक सकता। अपने महिला होने पर मुझे सबसे ज्यादा गर्व है। लिखना मेरा शौक है। लिखने के अलावा बेटे के साथ गप्पे मारना और खेलना मुझे बेहद पसंद है।