विश्व रेडियो दिवस क्यों खास है? खास इसलिए है क्योंकि जब मनोरंजन का कोई साधन नहीं था तब यही आवाज़ की दुनिया में लोगों का मनोरंजन करती थी। कई बड़े नेताओं के साथ साथ कई बड़े कलाकारों को जानने का एक ही माध्यम हुआ करता था रेडियो। अपनी आवाज़ के ही दम पर करोड़ो लोगों से जुड़ जाने वाले रेडियो जॉकी के साथ साथ रेडियो को मनोरंजन का ज़रिया बनाने वाले सभी के लिए यह दिन खास है। विश्व रेडियो दिवस पर आज हम बात करेंगे उन कलाकारों की जिन्होंने रेडियो से शुरुआत करते हुए हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाई। साथ ही उन कलाकारों की भी हम बात करेंगे, जिन्होंने हिंदी फिल्मों में रेडियो जॉकी का किरदार निभाया है। हालांकि रेडियो की बात आते ही हर किसी के ज़हन में महानायक अमिताभ को रेडियो के लिए ठुकराए जाने का किस्सा याद आ ही जाता है। आज से लगभग 82 साल जब अमिताभ बच्चन फिल्मों में आए भी नहीं थे, तब उन्होंने रेडियो के लिए ऑडिशन देने का कई बार प्रयास किया, लेकिन सफल नहीं हो पाए। हर बार रेडियो स्टूडियो से खाली हाथ लौट आते थे। भले ही बिग बी को सफलता हाथ ना लगी हों, लेकिन इंडस्ट्री में कई ऐसे सितारे है, जिन्होनें रेडियो से निकल कर फिल्मों में अपनी जगह बनाई।

सुनील दत्त भी हिन्दी रेडियो से जुड़े रहे

अपने शो को होस्ट करने के दौरान उन्होंने कई सितारों के इंटरव्यू लिए

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अमिताभ बच्चन के बारे में तो सभी जानते हैं लेकिन शायद ही लोग जानते होंगे कि संजय दत्त के पिता सुनील दत्त भी रेडियो पर शो होस्ट किया करते थे। वह रेडियो सीलोन में एक काफी मशहूर कार्यक्रम होस्ट किया करते थे। यह वही दौर था जब बिनाका गीत माला का प्रसारण होता था। सुनील दत्त अपने शो में मशहूर एक्टर और मशहूर हस्तियों के इंटरव्यू लिया करते थे। उस दौरान उन्होंने दिलीप कुमार जैसे कई बड़े कलाकारों के इंटरव्यू भी बतौर रेडियो जॉकी लिए है। रेडियो के बाद ही उन्होंने फिल्मों मे शुरुआत की। खास बात है कि उसी दौर के बड़े एक्टर सईद जाफरी भी रेडियो में कार्यक्रम होस्ट किया करते थे। 1951 में अपने करियर की शुरुआत करने वाले सईद जाफरी भी लगभग 2 साल रेडियो के साथ जुड़े रहे।

जब खुराना भाई रेडियो से फिल्मों में आ गए

दोनो ही भाईयों ने रेडियो से अपने करियर की शुरुआत की है

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पिछले साल ‘अंधाधुंध’ और ‘बधाई हो’ जैसी हिट फिल्में देने वाली आयुष्मान खुराना ने साल 2012 में फिल्म विक्की डोनर से अपने करियर की शुरुआत फिल्म इंडस्ट्री में की और पीछे मुड़कर नहीं देखा। आज वह इंडस्ट्री के उन कलाकारों में से एक है, जिन पर पैसा लगाने से कोई नहीं डरता। दरअसल, आयुष्मान ने अपने करियर की शुरुआत रेडियो से की थी। 17 साल की उम्र में ही आयुष्मान खुराना एक सफल रेडियो जॉकी बन गए थे। उन्होंने दिल्ली में एक रेडियो स्टेशन से अपनी शुरुआत की थी और यह एक इत्तेफाक ही है कि उनके छोटे भाई भी रेडियो के रास्ते फिल्मों में आए है। जी हां, अपारशक्ति खुराना ने भी साल 2012 में दिल्ली के एक रेडियो स्टेशन से शुरुआत की और फिर साल 2016 में आमिर के साथ फिल्म ‘दंगल’ में दिखे, जो उनकी पहली फिल्म थी। इस फिल्म के बाद उन्होंने कई फिल्में की, जिसमे पिछले साल राजकुमार राव के साथ रिलीज़ हुई उनकी फिल्म ‘स्त्री’ लोगों को बेहद पसंद आई।

नील भूपालम भी रेडियो से फिल्मों में

नील 19 साल की उम्र में ही थियेटर से जुड़ गए थे

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अनुष्का शर्मा की फिल्म ‘NH10’ में मुख्य किरदार निभाने वाले नील सभी को याद ही होंगे। नील ने भी बतौर रेडियो जॉकी अपने करियर की शुरुआत की थी। साल 2015 में अनुष्का की NH10 से चर्चा में आए नील ने साल 2010 में फिल्म शैतान भी की थी। नील दरअसल फिल्मों से ज़्यादा थियेटर से जुड़े हुए हैं और समय समय पर कई शो करते रहते है।

मनीष पॉल का रेडियो सफर

डियन टेलीविजन के पॉपुलर होस्ट मनीष पॉल ने भी अपने करियर की शुरुआत रेडियो से की थी। उन्होंने अपना करियर मुंबई में एक रेडियो स्टेशन पर काम करके शुरू किया था औऱ उन्होंने फिल्मों के साथ-साथ टीवी में भी काम किया है। ‘मिकी वायरस’ में अहम भूमिका निभाने वाले मनीष पॉल ने ‘तीस मार खान’ जैसे फिल्म में काम किया। इसके साथ-साथ टीवी शो ‘राधा की बेटियां कुछ कर दिखाएंगी’ जैसे शो मे भी काम किया।

जहां यह सितारे रेडियो से फिल्मों का सफर तय कर के आए हैं, वहीं कुछ सितारे ऐसे भी हैं, जिन्होनें फिल्मों में रेडियो जॉकी की भूमिका निभाई। इस सूची में सबसे ऊपर नाम है विद्या बालन का, जिन्होने ‘तुम्हारी सुलु’ के साथ साथ ‘लगे रहो मुन्ना भाई’ में रेडियो जॉकी में काम किया था। ज़ाहिर है कि रेडियो का फिल्मों और फिल्मी कलाकारों के साथ अहम नाता रहा है। आप भी अगर किसी ऐसे कलाकार के बारे में जानते है, जिन्होनें रेडियो से शुरुआत कर फिल्म इंडस्ट्री में जगह बना ली हो, तो हमें ज़रुर लिखे।

HFT हिन्दी की एडिटर, मनमौजी, हठी लेकिन मेहनती..उड़ नही सकती लेकिन मेरी कल्पनाशक्ति को उड़ने से कोई नहीं रोक सकता। अपने महिला होने पर मुझे सबसे ज्यादा गर्व है। लिखना मेरा शौक है। लिखने के अलावा बेटे के साथ गप्पे मारना और खेलना मुझे बेहद पसंद है।