यह तो सभी जानते हैं की संगीत किसी भी व्यक्ति के दिल में एक खास जगह रखता है। यह हमारे हर एहसास को और भावनाओं को एक्सप्रेस करने की आज़ादी देता है। संगीत में एक ऐसी ताकत होती है, जो किसी भी व्यक्ति को मौत के मुंह से बचा सकती है। आज वर्ल्ड म्यूज़िक डे पर हम बात करेंगे इंडियन म्युज़िक की और इसमें स्त्रियों की भूमिका की। कैसे संगीत के क्षेत्र में स्त्रियों ने उपलब्धि हासिल की और आज के समय में भारतीय संगीत में उनके योगदान को कैसे देखा जाता है।

संगीत पर पुरुषों का एकाधिकार

जब बात हो इंडियन म्युज़िक की, तो बॉलीवुड म्युज़िक के फैंस भी कम नहीं है। बॉलीवुड म्युज़िक में कई ऐसी फीमेल प्लेबैक सिंगर्स हो चुकी हैं, जिन्होंने अपनी खूबसूरत आवाज़ से लोगों के जज़्बातों को पर दिए हैं। लेकिन हमेशा से ही भारत में स्त्रियों को संगीत के क्षेत्र में इतना सम्मान नहीं दिया जाता था। पुराने ज़माने में संगीत पर सिर्फ पुरुषों का एकाधिकार होता था, लेकिन समय के साथ कुछ खास स्त्रियों ने अपनी जगह ज़रूर बना ली।

मीराबाई की पहल

बीसवीं सदी की शुरुआत में संगीत से जुड़ी महिलाओं को देवदासी और तवायफों के नाम से सम्बोधित किया जाता था। खास तौर पर इन कलाओं से जुड़ने के बाद उन्हें देह व्यापार में धकेलने की कोशिश की जाती थी। लेकिन समय के साथ इस सोच में बदलाव आया। बीसवीं सदी में संगीत के क्षेत्र में आनेवाली सबसे पहली महिला थीं मीराबाई। मेड़ता के राठौर खानदान में सन 1559 में जन्मी मीराबाई ने सबसे पहले भक्ति संगीत के ज़रिये लोगों के बीच पहचान पाई थी। उन्होंने ‘मीरा की मल्हार’ की रचना के साथ-साथ कई प्रसिद्द पदों की रचना की। इन पदों को आज भी लोगों द्वारा गाया जाता है।

ठुमरी का चलन

वहीं बीसवीं सदी में कई कलनेत्रियों को भी पहचान मिली। इसमें अंजनी बाई, ताराबाई शिरोडकर और गौहर जान ने लोगों का दिल जीता। गौहर जान तो ठुमरी की दुनिया में लोगों के बीच बेहद प्रचलित हुई। वे दरभंगा दरबार की सम्मानित गायिका थीं और कहा जाता है कि उनसे सुरीली ठुमरी आज तक कोई नहीं गा पाया। वहीँ अंजनी बाई मालपेकर की कला भी लोगों के बीच सम्मान से देखी जाने लगी। उस्ताद नज़ीर खां से गायिकी सिखने के बाद अंजनी बाई ने नेपाल से लेकर पंजाब और गुजरात में दौरे कर संगीत को अलग-अलग स्थानों में पहुंचाया।

बॉलीवुड की शुरुआत

ये तो थी पुराने ज़माने की बात , लेकिन जब बॉलीवुड म्युज़िक की शुरुआत हुई, तो कई महिला गायिकाओं को अपनी कला दिखाने का मौका मिला। इसमें सबसे पहले नाम आता है सुर साम्रागी लता मंगेशकर का, जिन्होंने बॉलीवुड के अनगिनत गानों को अपने सुरों से सजाया है। साथ ही आशा भोंसले, गीता दत्त, सुरैया जैसी गायिकाओं ने लोगों का दिल जीता। समय के साथ आधुनिक म्युज़िक ने बॉलीवुड में अपनी पकड़ बनाई और इसी के साथ कविता कृष्णमूर्ति, अलका याग्निक, साधना सरगम, अनुराधा पौडवाल जैसी कई कलाकार सामने आईं, जिन्होंने अपनी सुरीली आवाज़ से न सिर्फ लोगों का दिल जीता, बल्कि संगीत जगत में ऊंचे सम्मान की प्राप्ति भी की।

यदि आज की बात करें, तो श्रेया घोषाल, सुनिधि चौहान, शाल्मली खोलगडे, नेहा कक्कड़, मोनाली ठाकुर, पालक मुंझाल, रेखा भरद्वाज जैसी कई गायिकाएं हैं, जो पुरुषों से किसी भी तुलना में कम नहीं है। इस तरह भारतीय संगीत जगत में महिलाओं ने समय के साथ एक ख़ास जगह बनाई है, जिसकी नींव आज की नहीं, बल्कि कई सौ सालों पुरानी है।