फिल्म ‘फन्ने खान’ का निर्माण करने वाले राकेश ओमप्रकाश मेहरा इस फिल्म का निर्माण 10 साल से करना चाहते थे। ऑस्कर के लिए नामीनेट हो चुकी इस फिल्म का निर्माण करना उनके लिए इतना आसान नहीं था। डच फिल्म ‘एव्रीबडीज़ फेमस’ की कॉपी होने की वजह से उन्हें इस फिल्म के राइट लेने में ही काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। लगभग 3 से 4 साल की कड़ी मशक्कत के बाद ओरीजनल फिल्म के निर्देशक से इस फिल्म के राइट लेने वाले राकेश को, इस फिल्म को हिन्दी में बनाने के लिए एक ऐसे निर्देशक की तलाश थी, जो इस फिल्म के साथ न्याय कर सके, जिसमे उन्हें 4 से 5 साल लग गए।

हमारे देश में लड़कियों को क्यो किया जाता है जज

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फिल्म में बॉडी शेमिंग को भी दिखाया गया है

बॉडी शेमिंग के साथ डील करती फिल्म में फन्ने खान की बेटी लता का किरदार निभाती पीहू को अपने वज़न को लेकर कई आलोचनाओं का सामना करना पड़ता है। खुद भी टीन एज़र लड़की का पिता होने के कारण राकेश मानते है कि यह सबजेक्ट उनके दिल के भी काफी करीब है। राकेश के मुताबिक हमारे देश में लड़कियों के साथ, समाज काफी कठोर है और उन्हें जज किया जाता है। “ उठने से लेकर सोने तक हर कोई लड़कियों को जज करता है। कई बार तो उनकी खुद की मां भी। मुझे लगता है कि लड़कियों की स्थिति ऐसी है कि उन्हें सपने में भी जज किया जाता होगा।”

इतना ही नहीं राकेश का ये भी मानना है कि हमारे यहां सुंदरता के पैमाने बिल्कुल अलग है। इसके लिए वह हमारे समाज के उन अाइकोनिक लोगों को भी ज़िम्मेदार मानते है, जो सुंदरता को अलग तरीके से पेश करते है। “ हमारे यहां सुंदरता के पैमाने ही अलग है, आप ओवरवेट नहीं हो सकते, आपका रंग डार्क नहीं हो सकता, ऐसे 100 जितने पैमाने है , जिन पर लड़कियों को तोला जाता है।”

फिल्म में मनोंरंजन के साथ साथ संदेश देने में क्या बुराई है

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फिल्मों को समाज के मुद्दों को भी उठाना चाहिए

‘दिल्ली 6’ और ‘रंग दे बसंती’ जैसी फिल्मों का निर्माण करने वाले राकेश ओम प्रकाश मेहरा के मुताबिक फिल्में मनोरंजन देने के साथ साथ , अगर समाज से जुड़ा कोई संदेश भी दे तो कोई बुराई नहीं। “ हम फिल्मों का इस्तेमाल समाज से जुड़े मुद्दों को दिखाने के लिए करे, ये तो अच्छी बात ही है। मेरी फिल्मों में मैं यही कोशिश करता हूं। कहानी का कोई मोरेल होना ही चाहिए।”

राकेश बताते है कि इस फिल्म को बनाने के लिए उन्हें डच निर्देशक को अपनी फिल्म ‘रंग दे बसंती’ और ‘दिल्ली 6’ दिखानी पड़ी, जिसे देख उन्हें ये विश्वास हो गया कि वह उनकी फिल्म के साथ न्याय ज़रुर करेंगे। हालांकि फिल्म से काफी प्रभावित होने की वजह से राकेश खुद इस फिल्म का निर्देशन नहीं करना चाहते थे। “ मैं इस फिल्म से इतना प्रभावित था कि मुझे लगा कि मैं इस फिल्म को अच्छे से इंटरप्रेट नहीं कर पाऊंगा। मुझे लोगों ने बोला भी कि मैं करूं, लेकिन मुझे मालूम था कि मैं न्याय नहीं कर पाऊंगा।”

फन्ने खान का निर्देशन राकेश के साथ 22 साल पहले काम कर चुके, उनके दोस्त अतुल मांजरेकर ने किया है। फिल्म में अनिल कपूर के साथ , राजकुमार राव और ऐश्वर्या भी अहम भूमिका में है। फिल्म 3 अगस्त को रिलीज़ होगी।

HFT हिन्दी की एडिटर, मनमौजी, हठी लेकिन मेहनती..उड़ नही सकती लेकिन मेरी कल्पनाशक्ति को उड़ने से कोई नहीं रोक सकता। अपने महिला होने पर मुझे सबसे ज्यादा गर्व है। लिखना मेरा शौक है। लिखने के अलावा बेटे के साथ गप्पे मारना और खेलना मुझे बेहद पसंद है।