सुपरस्टार शाहरुख कई दिलों पर राज करते हैं, उनकी ना जाने कितनी ही लड़कियां दीवानी है और उनकी फिल्मों का इंतज़ार उनके फैंस भी बेसब्री से करते हैं। क्या ऐसे शाहरुख खान को अपनी बीवी को सॉरी कहने के लिए रोने की ज़रुरत पड़ सकती हैं? सुनने में भले ही यह बात अटपटी लगे, लेकिन यह सच है कि शाहरुख गलती करने पर जब भी गौरी को सॉरी बोलते है, तो आंखों में आंसू लाना नहीं भूलते। भले ही वो आंसू फिल्मी यानी ग्लिसरीन वाले क्यों ना हो।

क्योंकि शाहरुख भी एक आम पति हैं


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शाहरुख और गौरी की लव मैरिज हुई है

शाहरुख भले ही सुपर स्टार हो, लेकिन वो एक फैमिली मैन के तौर पर भी काफी मशहूर है। वह अपना समय अपने बच्चों और बीवी को देना नहीं भूलते। इतना ही नहीं जो लोग यह सोचते है कि शाहरुख सिर्फ फिल्मों में ही रोमांटिक और जेंटलमैन वाली इमेज रखते हैं, तो आप गलत है। दरअसल शाहरुख असली ज़िंदगी में भी जेंटलमैन है। शाहरुख की माने तो वह जब भी अपनी बीवी गौरी से किसी चीज़ के लिए माफी मांगते हैं, तो आंखों में ग्लिसरीन डाल लेते है, जिससे आंसू जल्दी आ जाए और माफी मिल जाए। वह बताते हैं, “ कभी-कभी जब गौरी को मुझे सॉरी कहना होता है, लेकिन उसे अच्छा फील हो इसलिए आंसू भी निकालने होते हैं, तब मैं ग्लिसरीन डाल कर आंसू निकालने की ऐक्टिंग कर लेता हूं। इस दौरान मैं दिल से सॉरी कह रहा होता हूं, बस आंसू नकली होते हैं।”

लड़कियों को सहानुभूति नहीं, बराबरी चाहिए


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फिल्म में शाहरुख के साथ दो बड़ी अभिनेत्रियां काम कर रही हैं

21 दिसंबर को रिलीज़ हो रही फिल्म ज़ीरो में शाहरुख के साथ दो अभिनेत्रियां दिखाई देंगी। जहां अनुष्का व्हील चेयर पर बैठी विकलांग है, वहीं कैटरिना को इमोशनली वीक दिखाया गया है। वहीं फिल्म में बौने बने शाहरुख का कहना है कि फिल्म की सबसे खास बात है कि फिल्म देखते हुए दर्शकों को कोई भी किरदार बेचारा या अधूरा नहीं लगेगा। ना ही फिल्म का हीरो और ना ही फिल्म की हीरोईन और असली ज़िंदगी में भी सभी को यह सीखने की ज़रुरत है कि लड़कियों को बराबरी चाहिए, दया नहीं। शाहरुख कहते हैं, “मुझे लगता है हम कई बार आम ज़िन्दगी में लड़कियों के साथ भी ऐसा करते हैं, उनकी एक्स्ट्रा केयर करना, बार-बार पूछना कि आप ठीक हो या उनके लिए कुछ अलग करते हैं। मुझे लगता है एक लड़की को सबसे ज़रूरी यही चाहिए कि उसे बराबरी का व्यवहार मिले। अब इसका मतलब यह भी नहीं है कि आप उसे धक्का मार दो या कुछ और हरकत कर दो, बस उन्हें बराबर समझें, लड़की को बेचारी समझकर सहानुभूति न दिखाएं।” ज़ाहिर है कि शाहरुख का यह संदेश अपनी फिल्म की हीरोइनों के लिए ही है, जो देखने में किसी ना किसी तरह से अधूरी भले ही लगे, लेकिन वो दया की पात्र नहीं।

शाहरुख की क्रिसमस की छुट्टियों पर रिलीज़ हो रही फिल्म ज़ीरो का निर्देशन आनंद एल राय ने किया है। 21 दिसंबर को रिलीज़ हो रही इस फिल्म में सबसे खास संदेश यही है कि हर किसी को अपने अधूरेपन का जश्न मनाना चाहिए।

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