विद्या बालन हर बार अपनी फिल्मों की च्वाइस से अपने फैंस को सरप्राइज़ करती रहती है। हाल ही में अपनी पहली तेलूगु फिल्म ‘एनटीआर बायोपीक’ से चर्चा बटोरने वाली विद्या अब बहुत जल्द एक और बायोपीक करती नज़र आएंगी। इस बार वह मानव कम्प्यूटर के तौर पर मशहूर हुई गणितज्ञ शकुंतला देवी का किरदार निभा रही है। इस फिल्म का निर्देशन अनु मेनन कर रही हैं। फिल्म की शूटिंग इस साल के आखिर में शुरु होगी और फिल्म अगले साल मई में रिलीज़ होने की सम्भावना है।

विद्या की होगी यह तीसरी बायोपीक

विद्या इससे पहले दो और बायोपीक कर चुकी हैं
विद्या इससे पहले दो और बायोपीक कर चुकी हैं

शकुंतला देवी, अपनी अनोखी प्रतिभा के लिए 1982 में गिनीज़ बुक में अपना नाम दर्ज करवा चुकी हैं। उनकी ज़िदंगी पर बन रही फिल्म में विद्या उनका किरदार निभाती नज़र आएंगी। खास बात है कि विद्या बालन की यह तीसरी फिल्म होगी, जो बायोपीक हो। इससे पहले वह साल 2011 में डर्टी पिक्चर में मुख्य किरदार निभा चुकी है, वह फिल्म दक्षिण की हीरोइन सिल्क स्मिता की ज़िंदगी पर आधारित थी। इस फिल्म के अलावा इस साल जनवरी में रिलीज़ हुई एनटीआर बायोपीक में भी विद्या ने बासावाका का किरदार निभाया, जो अभिनेता से नेता बने नंदामूरी तारक रामाराव यानी एनटी रामाराव की पहली बीवी का किरदार था। यह फिल्म विद्या की पहली तेलुगू फिल्म थी। उनकी आज ही अनाउंस हुई फिल्म शकुंतला देवी भी एक बायोपीक ही है, जिसका निर्देशन अनु मेनन कर रही हैं। अनु इससे पहले साल 2012 में ‘लंदन,पेरिस,न्यूयार्क’ और हाल ही में अमेज़न प्राइम के लिए फोर मोर शॉट्स प्लीज का निर्देशन कर चुकी हैं।

कौन थी शकुंतला देवी

सर्कस में अपनी प्रतिभा को दिखा कर नाम हासिल किया
सर्कस में अपनी प्रतिभा को दिखा कर नाम हासिल किया

शकुंतला देवी को मानव केलकुलेटर कहा जाता था। उनका जन्म 1929 को बैंगलोर में हुआ था। बचपन से ही शकुंतला देवी अद्भुत प्रतिभा की धनी एवं मेंटल कैलकुलेटर (गणितज्ञ) थीं। उन्होनें सर्कस में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर नाम कमाया और धीरे धीरे प्रसिद्ध होती गई। उनकी प्रतिभा को देखते हुए उनका नाम 1982 में ‘गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ में भी शामिल किया गया। एक लेखिका के रूप में उन्होंने कई किताबें लिखी, जिनमे कई उपन्यास भी शामिल है. साथ ही उन्होने गणित, पहेलियों और ज्योतिषशास्त्र के बारे में भी अपने लेखों में लिखा हैं। खास बात है कि 1980 में लोक सभा चुनाव में वह स्वतंत्र रूप से दक्षिण बॉम्बे और आंध्र प्रदेश के मेडक से खडी हुई. मेडक में वह इंदिरा गांधी के खिलाफ खडी हुई थी, लेकिन चुनाव में वह नौंवी आई, जिसके बाद वह बैंगलोर लौट गयी। उनका देहांत 83 वर्ष की आयु में हुआ। अप्रैल 2013 में शकुंतला देवी को बंगलुरु के दवाखाने में दाखिल किया गया. लगातार 2 हफ़्तों तक वे वही भर्ती थी, और किडनी और दिल में भारी कमजोरी के चलते दवाखाने में ही 21 अप्रैल 2013 को उनकी मृत्यु हो गयी।

HFT हिन्दी की एडिटर, मनमौजी, हठी लेकिन मेहनती..उड़ नही सकती लेकिन मेरी कल्पनाशक्ति को उड़ने से कोई नहीं रोक सकता। अपने महिला होने पर मुझे सबसे ज्यादा गर्व है। लिखना मेरा शौक है। लिखने के अलावा बेटे के साथ गप्पे मारना और खेलना मुझे बेहद पसंद है।