संगीत से प्रेम रखते लोगों को आर डी बर्मन का परिचय देने की ज़रुरत नहीं। 70 के दशक का संगीत वैसा ना होता अगर आर डी यामी पंचम ना होते, आंधी फिल्म का तेरे बिना ज़िंदगी से कोई शिकवा नहीं, या फिर फिल्म सागर के गीत ना होते अगर आर डी ना होते। अपने आखिरी समय में लंबे समय तक बिना काम के उन्होंने समय गुज़ारा। आर डी बर्मन का आखिरी गाना यानी ‘1942 लव स्टोरी’ की गीत ‘एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा’ इन दिनों फिर से खबरों में है। दरअसल इस गीत के बोल पर ही विधु विनोद चोपड़ा की अगली फिल्म का टाइटल है, जिसे उनकी बहन शैली चोपड़ा डायरेक्ट किया है। इस गीत को दशकों से सभी लोग गुनगुनाते रहे हैं, लेकिन आप जान कर हैरान हो जाएंगे कि यह गीत कभी भी फिल्म में नही होने वाला था। इतना ही नहीं जब हाल ही में फिल्म एक लड़की के लिए इस गीत को रिक्रिएट किया जाना था, तो इस 25 बार बनाने के बाद फाइनल किया गया।

फिल्म में गीत की ज़रुरत ही नहीं थी

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आखिरी मौके पर जावेद अख्तर में सिर्फ दो मिनट में लिख दिया था गीत
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क्या आप कभी सोच सकते है कि 1995 में कई अवार्ड पाने वाला यह गीत शायद फिल्म का हिस्सा ही नहीं होता। दरअसल फिल्म 1942 ए लव स्टोरी के निर्देशक विधु की माने को इस गीत को लिखने वाले जावेद अख्तर एक गीत तैयार तो करना चाहते थे, लेकिन वह उसे फिल्म में शामिल करने को तैयार नहीं थे। हालांकि जावेद अख्तर फिर भी निर्देशक से मिलने को पहुंच गए वो भी बिना गीत तैयार किए। लेकिन इन सब में सबसे खास बात यही थी कि मीटिंग से पहले ही जावेद अख्तर ने ना सिर्फ कुछ मिनटों में यह गाना लिखा, बल्कि पंचमदा ने भी इस गीत की धुन को कुछ ही मिनटों में तैयार कर लिया। विधु के मुताबिक, “जावेद साहब मिलने आ रहे थे और घबरा रहे थे क्योंकि उन्होंने गीत की लाइनें नही लिखी थी। लेकिन मिलने पर मैंने पूछ लिया कि सुनाओ क्या लिखा है, तो बोले ‘एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा’ मैंने पूछा फिर, तो उनके पास कुछ नही था तो वो उसी समय उसमे शब्द जोड़ते गए जैसे खिलता गुलाब, जैसे शायर का ख्वाब, जैसे उजली किरण, जैसे वन में हिरण, तो आर डी ने हारमोनियम तुरंत उठाया और तुरंत धुन बना दी। यह गाना 5 से 6 मिनट में तुरंत ही उसी समय तैयार हो गया।”

जब आर डी खुद के काम को लेकर हो गए थे असुरक्षित

1995 में आई फिल्म 1942 ए लव स्टोरी उनका आखिरी गीत था

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जहां आर डी जैसे कलाकार के लिए यह गीत उनका आखिरी गीत बन कर रह गया, वहीं इस फिल्म के निर्देशक का मानना है कि यह गीत आर डी की असुरक्षा की भावना के चलते बिगड़ भी सकता, अगर वह आर डी को उल्लू यानी की उनसे झूठ नहीं बोलते। विनोद की माने तो, “जब आर डी को कोई छू नहीं रहा था। तब जब उन्होंने मुझे यह गीत दिया तो घर जाने के बाद फोन किया कि यह गीत ऐसे मत रखना, मैं उसमें वायलिन डालूंगा और कोरस डालूगां, तो मुझे लगा कि वो तो अपनी असुरक्षा की भावना के चलते पूरा गाना खराब कर देंगे, तो मैंने उनसे झूठ बोला कि शूटिंग में फिल्म में इस गीत में हीरो साइकिल चला रहा है, तो उसमें मैं घंटी डालूंगा। मैंने उन्हे सच में उल्लू बनाया कि बहुत सारे साऊंड होंगे और मैं फिर लाकर आपको दिखाऊंगा। मैं कहना चाहूंगा कि असुरक्षा कि भावना किसी भी महान कलाकार को कभी नहीं होनी चाहिए।”

ज़ाहिर है कि विधु की यह सीख जहां नए कलाकारों के लिए एक सीख है, वहीं पंचमदा से जुड़े इस किस्से से एक बात को ज़ाहिर है कि कई बार असुरक्षा की भावना काम को संवारने की जगह बिगाड़ भी सकती हैं।

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