अभिषेक पाठक निर्देशित फिल्म ‘उजड़ा चमन’ कई विवादों के बाद आख़िरकार बॉक्स ऑफ़िस पर रिलीज़ हुई है। यह एक कन्नड फिल्म की ऑफिशियल रीमेक है। फिल्म लड़को में गंजापन और लड़कियों में मोटापे की समस्या जैसे संवेदनशीन मुुद्दे पर है। दरअसल, इस फिल्म की कहानी ज्यादातर ‘चमन’ के इर्दगिर्द ही घूमती है, जो 30 साल की उम्र में ही गंजेपन का शिकार है। चमन को कोई लडकी जहाँ उसके गंजेपन की वजह से पसंद नहीं कर रहीं, वहीं चमन एक सुदर और परफेक्ट लड़की का सपना देख रहे हैं। चमन का किरदार टिटू फेम सन्नी सिंह ने निभाया है। उनके साथ मानवी गागरु,, सौरभ शुक्ला जैसे किरदार भी इस फिल्म में दिखेंगे।

फिल्म की कहानी

फिल्म की कहानी दानिश ने लिखी हैं
फिल्म की कहानी दानिश ने लिखी हैं

‘दिलों की बात करता है जमाना, लेकिन मोहब्बत आज भी सूरत से शुरु होती हैं।’ फिल्म के इसी डायलॉग में फिल्म की कहानी छिपी है। दरअसल, 30 साल के चमन के जब बाल चले जाते हैं, तो ना सिर्फ उसके दोस्त, बल्कि जिस कॉलेज में वो पढ़ाता है, उसके स्टूडेट भी उसके गंजेपन के कारण उसका मज़ाक उड़ाने लगते हैं। चमन यानी सन्नी सिंह को खुद का मजाक बनवाना नहीं पसंद, लेकिन वो उसके खिलाफ कभी आवाज़ नहीं उठाता। धीरे-धीरे चमन का आत्मविश्वास भी कम होता जाता है, यहाँ तक की वो अपने छोटे भाई के सामने भी इन्फीरियर महसूस करने लगता है। 30 साल के कुवारे लड़के की शादी को लेकर उसके माता-पिता भी काफी परेशान रहते हैं, वहीं चमन को भी कोई लड़की सिर्फ इसलिए घास नहीं डालती क्योंकि उसके सिर पर बाल नहीं (कम) है। ऐसे में उसकी ज़िंदगी के इस अकेलेपन को कौन कैसे दूर करेगा, यहीं इस फिल्म में दिखाया गया है।

फिल्म में अभिनय

फिल्म का मुद्दा संवेदनशील है, जिसे हल्के-फुल्के तरीके से दिखाने की, लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की गई हैं। मुख्य किरदार दिल्ली में रहते चमन कोहली यानी सन्नी सिंह का है, जो अच्छा कमाता है, संस्कारी है, लेकिन फिर भी उसे खुद पर सिर्फ और सिर्फ इसलिए आत्मविश्वास नहीं क्योंंकि उसके सिर पर बाल कम है और लोग उसे देखकर हँसते हैं। वो लोगों के लिए खुद को बदलने की भी कोशिश करता है। सन्नी का परफॉर्मेंस काबिले तारीफ है।

सन्नी के साथ है मानवी गागरु, जिनकी एंट्री इंटरव्ल के बाद होती हैं। वो एक बिंदास लड़की है, वो जैसी है उसे उस पर शर्म नहीं, वो लोगों की सीरत देखती है सूरत नहीं। इन दो किरदारों के अलावा फिल्म में चमन की माँ का किरदार निभाने वाली गृषा कपूर का काम भी सराहनीय है। पंजाबी के तौर पर उनके हावभाव के साथ-साथ उनके बोलने का तरीका और खासकर अंग्रेजी शब्दों को बोलने का उनका तरीका दर्शकों को ज़रुर गुदगुदाएगा। चमन का गाइड, दोस्त और उनके कॉलेज का पिऊन राज (शारीब हाषमी), इस फिल्म में लोगों का दिल जीतने में कामयाब रहेगा। दरअसल, उस किरदार के माध्यम से निर्देशक ने यह बताने की कोशिश की है कि इंसान छोटा नहीं होता, बल्कि उसकी सोच छोटी होती हैं। फिल्म में उनका किरदार ही है, जो चमन की ज़िंदगी में बदलाव लाता है। शारीब का किरदार छोटा क्यों ना हो, लेकिन दर्शकों को प्रभावित करता है। फिल्म में सौरभ शुक्ला भी स्पेशल अपीरियंस में दिखेंगे।

फिल्म देखें या नहीं

अगले हफ्ते रिलीज़ होने वाली फिल्म ‘बाला’ भी इस विषय पर है
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फिल्म का ट्रेलर देखकर दर्शक अगर सोच रहे है कि फिल्म कॉमेडी है, तो ऐसा नहीं है। फिल्म एक संवेदनशील मुद्दे के साथ डील करती हैं। फिल्म का फ़र्स्ट हाफ काफी बोरिंग है। हालांकि सेकेंड हाफ में मानवी गागरु की एंट्री के बाद फिल्म में थोड़ी गति आती हैं। फिल्म डायलॉग और कुछ पंच लाइन्स है,जो दर्शकों को बेहद पसंद आएगी। लेकिन कहीं ना कहीं कमज़ोर कहानी की वजह से फिल्म स्लो लगती हैं, ऐसा लगता है मानों एक ही मुद्दे को बढ़ाने की कोशिश की जा रही हैं। संगीत की अगर बात करे तो , फिल्म के टाइटल गीत ‘देखो जी चाँद निकला को छोड़कर’, कोई भी गीत लोगों को ध्यान आकर्षित नहीं करता।

कुल मिलाकर आवाज़ डाट कॉम इस फिल्म को ढाई स्टार देता हैं

HFT हिन्दी की एडिटर, मनमौजी, हठी लेकिन मेहनती..उड़ नही सकती लेकिन मेरी कल्पनाशक्ति को उड़ने से कोई नहीं रोक सकता। अपने महिला होने पर मुझे सबसे ज्यादा गर्व है। लिखना मेरा शौक है। लिखने के अलावा बेटे के साथ गप्पे मारना और खेलना मुझे बेहद पसंद है।