इंद्र कुमार की ‘धमाल’ फिल्मों के अगर आप कायल रहे हैं, तो आपको ‘टोटल धमाल’ ज़रूर पसंद आएगी। कॉमेडी से भरपूर इस फ़िल्म को देखने के लिए आपको दिमाग की ज़रूरत नही। इंद्र कुमार की इस धमाल में अजय देवगन, अनिल कपूर, माधुरी दीक्षित ओर बोमन ईरानी जैसे कई नए कलाकारों की एंट्री हुई है, लेकिन ये सितारे इस धमाल की फ्रेंचाइज़ी को और बड़ा बना रहे हैं। ‘टोटल धमाल’ इससे पहले रिलिज़ हुई ‘धमाल’ और ‘डबल धमाल’ जितनी भले ही मज़ेदार न हो, लेकिन फिर भी ये फ़िल्म आपका मनोरंजन करने में कामयाब होगी।

फिल्म की कहानी

फिल्म की कहानी परितोष पेंटर, वेद प्रकाश और बंटी राठौड़ ने मिलकर लिखी है

कॉमेडी से भरपूर इस फ़िल्म में फ़िल्म के सारे किरदार 50 करोड़ पाने के लिए भाग रहे है, जो जनकपुर के एक चिड़ियाघर में छिपा हुआ है। इन पैसों को पाने के लिए राधे (अजय देवगन) अपने साथी जॉनी (संजय मिश्रा) के साथ, अविनाश पटेल(अनिल कपूर) अपनी बीवी बिंदू (माधुरी दीक्षित) के साथ, आदि (अरशद वारसी) अपने साथी मानव ( जावेद जाफरी) के साथ तो ललन (रितेश देशमुख) अपने साथी के साथ मिलकर इन पैसों को पाने में लगे है और इन सब के पीछे लगा है पुलिस कमिश्नर डान (बोमन इरानी)। इन पैसों के पीछे अपनी जान की बाजी तक लगा देने वाले ये सभी किरदार कैसे इन पैसों तक पहुंचते है, यह देखना काफी दिलचस्प है। दरअसल फिल्म की शुरुआत उस दौर से होती है, जब मोदी सरकार ने डिमॉनेटाइजेशन कर सभी पुराने नोट बंद कर दिए थे, ऐसे ही काले पैसों को जब कमीश्नर (बोमन इरानी) अपने कमीशन के साथ सफेद पैसों में तब्दील कर रहा था, तब इस बात की भनक राधे को हो जाती है। वह अपने साथी जॉनी के साथ पैसे उड़ाने में कामयाब हो जाता है, लेकिन इन पैसों के लालच में उनका ड्राइवर ही इन दोनों को अकेला छोड़ पैसा लेकर रफूचक्कर हो जाता है। इन्ही पैसो को पाने के हो रही भागमभाग में होता है ‘टोटल धमाल’।

फिल्म में कॉमेडी और किरदार

साल 2007 में पहली ‘धमाल’ रिलीज़ हुई थी

फिल्म में रितेश देशमुख, अरशद वारसी, जावेद जाफरी , बोमन ईरानी, जॉनी लीवर और अजय देवगन जैसे कई ऐसे कलाकार है जो कॉमेडी में माहिर है। इन सबको जब ‘धमाल’ और ‘डबल धमाल’ जैसी फिल्म बनाने वाले इंद्र कुमार का साथ मिल जाए, तो इन सब को मिला कर जो तैयार हुआ है वो है ‘टोटल धमाल’। फिल्म में सभी किरदारों को जोड़ी में बांटा गया है और यह सभी जोड़ियां एक दूसरे के लिए परफेक्ट है। एक दूसरे से तलाक लेने का फ़ैसला कर चुकी माधुरी और अनिल कपूर लड़ने वाले और फिर फिल्म के आखिर में मिल जाने वाले गुजराती पति पत्नी के किरदार में है। फिल्म में उनके बीच की मराठी और गुजराती में होती नोंक झोंक आपको पसंद आएगी। राधे का पार्टनर जॉनी उसे बुलाता ब्रो है, लेकिन खुद को उससे ज़्यादा स्मार्ट समझता है, वहीं बाकी बची जोड़ियां भी अपने आप में कुछ ना कुछ खास ज़रुर है। फिल्म में भरपूर कॉमेडी है। हंसी हंसी में फिल्म में राजनीति के लेकर फिल्म इंडस्ट्री तक सभी पर मज़ाक बनाया गया है, जो लोगों को गुदगुदाता है।

बिना सिर पैर की फिल्म

‘धमाल’ कड़ी की दूसरी फिल्म ‘डबल धमाल’ साल 2011 में रिलीज़ हुई थी

दरअसल कॉमेडी की ख़ासियत ही यही होती है जब आपको अपने दिमाग का इस्तेमाल ना करना पड़े। फिल्म में घासलेट से उड़ता हेलीकॉप्टर हो या फिर पानी में बह जाने के बाद भी बच चुकी अविनाश और बिंदू की जोड़ी हो या फिर पैसों की खोज में जानवरों के बीच पहुंच जाते यह सितारें हो, अगर आप फिल्म की कहानी के पीछे तर्क ढूढेंगे तो फिल्म की कॉमेडी का मज़ा नहीं ले पाएंगे। यह फिल्म ‘धमाल’ औऱ ‘डबल धमाल’ की कड़ी की तीसरी फिल्म है। इस फिल्म से अगर आप वैसी ही कॉमेडी की उम्मीद के साथ जाएंगे तो निराश नहीं होंगे। हालांकि फिल्म देखते हुए आपको कई बार लगेगा कि इस कड़ी की पहली दो फिल्म इससे ज़्यादा बेहतर थी।

फिल्म में तीन गीत है। जहां ‘पैसा ही पैसा’ फिल्म की एकदम शुरुआत में है और स्टोरी के साथ बहुत ही अच्छे तरीके से जाता है, वहीं फिल्म में सोनाक्षी सिन्हा पर फिल्माया गया गीत ‘मुंगड़ा’ थोपा हुआ लगता है। फिल्म का ‘स्पीकर फाड़ के’ गीत फिल्म के आखिर में आता है। फिल्म के फर्सट हॉफ से बेहतर सेकेंड हॉफ है। इंटरवल से पहले फिल्म के कुछ डायलॉग ऐसे है, जो आपको हंसाने में बिल्कुल कामयाब नहीं हो पाते। फिल्म में रितेश और जॉनी लीवर के बीच के सीन्स या फिर रितेश का बिल्डिंग से बार बार लटक जाना कुछ ऐसे दृश्य है जो फिल्म में जान डाल देते है। इस सभी मल्टी स्टारकास्ट में माधुरी और अनिल की जोड़ी जब-जब परदे पर आती है तो आप इन दोनों के बीच की केमेस्ट्री को देख कर एक बार फिर से इसके कायल हो जाएंगे। हालांकि अभी तक इन दोनों को परदे पर प्यार करते हुए दर्शकों ने देखा था, लेकिन इस फिल्म में इन दोनों की नोंकझोंक भी आपको पसंद आएगी। फिल्म के आखिर में जानवरों की एंट्री और जानवरों के लिए और उनकी वजह से इन किरदारों की नीयत में होता बदलाव आपका दिल छू लेगा।

इस फिल्म में खास बात है कि फिल्म में डबल मीनींग कॉमेडी ना होने के कारण इस फिल्म को परिवार के साथ देखा जा सकता है। इस फिल्म को आवाज़ डॉट कॉम ढाई स्टार देता है।

HFT हिन्दी की एडिटर, मनमौजी, हठी लेकिन मेहनती..उड़ नही सकती लेकिन मेरी कल्पनाशक्ति को उड़ने से कोई नहीं रोक सकता। अपने महिला होने पर मुझे सबसे ज्यादा गर्व है। लिखना मेरा शौक है। लिखने के अलावा बेटे के साथ गप्पे मारना और खेलना मुझे बेहद पसंद है।