कई बेबाक बातों पर अपनी राय रखने वाली सोनम कपूर को लगता है कि भारत में महिलाओं को जितनी चाहिए उतनी इज़्ज़त नही दी जाती। क्रिकेट जैसे विषय पर ‘ज़ोया फैक्टर’ नाम की फिल्म लेकर आ रही सोनम, इस फिल्म में दुलकर सलमान के साथ अभिनय करती नज़र आएंगी। यह फिल्म एक बहुत ही मशहूर किताब पर आधारित है, जिसका निर्देशन अभिषेक शर्मा ने किया है।

नींबू, मिर्ची और काली बिल्ली जैसी बातों में रखती हूं विश्वास

सोनम कपूर की फिल्म पैडमैन को नेशनल अवार्ड मिला है

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खास बात है कि फिल्म ‘ज़ोया फैक्टर’ क्रिकेट जैसे गेम को लेकर हमारे देश में फैले कई तरह के अंधविश्वास को दिखाती है। फिल्म में सोनम ज़ोया नाम की लड़की का किरदार निभा रही है, जिसे क्रिकेट टीम अपना लकी चार्म मान बैठी है। हालांकि फिल्म में वो कई तरह के अंधविश्वास में विश्वास रखती है, लेकिन असली ज़िंदगी में भी सोनम का मानना है कि ऐसी कई बातें है, जिनमें ना चाहते हुए भी बहुत से लोग विश्वास रखते हैं। सोनम के अनुसार, “नींबू -मिर्ची, काली बिल्ली, किसी दिन काले कपड़े नही पहनना, ये सब हमारे नेचर और कल्चर में है। कभी-कभी हम इन बातों को हम बहुत गम्भीरता से ले लेते हैं और कभी-कभी यह सब चीज़े कर भी लेते हैं। दरअसल, हमारी संस्कृति का ही हिस्सा हो गई है, यह सब चीज़े।”

महिलाओं को हमारे समाज में सेकेंड क्लास सिटीज़न समझा जाता है

सोनम कपूर की लास्ट रिलीज़ ‘एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा’ थी

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फिल्म में मैन क्रिकेट टीम का लकी चार्म बनकर आ रही सोनम कपूर मानती है कि रियल लाइफ में महिला क्रिकेट टीम को वो सराहना नहीं मिलती, जिनकी वो हकदार है। कई स्पोर्टस में महिलाओं के बेहतर प्रदर्शन से खुश सोनम कपूर यह भी मानती है कि आज के दौर में भारत के लिए पुरुष से ज़्यादा महिलाएं मैडल जीत कर आ रही हैं। हालांकि सोनम को लगता है कि भारत में महिलाओं के प्रति सेकेंड क्लास सिटीज़न के तौर पर व्यवहार किया जाता है, जिसे बदलने की ज़रुरत है। सोनम की मानें तो, “बैडमिंटन से लेकर टेनिस तक मुझे लगता है कि महिलाओं को भारत मे थोड़ा ज़्यादा इज़्ज़त देनी चाहिये। बहुत सालों से हमे सेकंड क्लास सिटीज़न की तरह ट्रीट किया गया है। इंडियन क्रिकेट टीम है, जो वर्ल्ड की बेस्ट टीम में से एक है।”

यह फिल्म साल 2008 में अनुजा चौहान की इसी नाम से पब्लिश हुई किताब पर आधारित है। फॉक्स के बैनर तले बन कर आ रही यह फिल्म 20 सितम्बर को रिलीज़ होगी

HFT हिन्दी की एडिटर, मनमौजी, हठी लेकिन मेहनती..उड़ नही सकती लेकिन मेरी कल्पनाशक्ति को उड़ने से कोई नहीं रोक सकता। अपने महिला होने पर मुझे सबसे ज्यादा गर्व है। लिखना मेरा शौक है। लिखने के अलावा बेटे के साथ गप्पे मारना और खेलना मुझे बेहद पसंद है।