अनिल कपूर 35 साल बाद वहीं काम कर रहे हैं, जो उन्होनें 35 साल पहले अपनी पहली फिल्म ‘वो सात दिन’ में किया था। जी हां, ये एक संयोग ही है कि जहां 35 साल पहले 1983 में अनिल कपूर ने अपनी पहली फिल्म में एक स्ट्रगलिंग संगीतकार की भूमिका निभाई थी, वहीं अपनी आने वाली फिल्म ‘फन्ने खान’ में वह एक ऐसे व्यक्ति की भूमिका निभा रहे हैं, जो संगीतकार बनना तो चाहते है, लेकिन नहीं बन पाते। जहां उस फिल्म के लिए अनिल कपूर ने हारमोनियम बजाने की ट्रेनिंग ली थी , वहीं इस फिल्म के लिए ट्रम्पेट बजाने की।

संगीत और अनिल कपूर

 

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अनिल कपूर ने अपना पहला म्यूज़िकल इंस्ट्रूमेंट सितार सीखा था, वह तब केवल 12 साल के थे

फिल्म ‘फन्ने खान’ में अनिल कपूर और ट्रम्पेट, लगता है बहुत ही अहम हिस्सा है। जहां यह फिल्म के रिलीज़ किए गए पहले पोस्टर में भी शामिल था, वहीं फिल्म के ट्रेलर में भी यह शामिल हैं। आप इस फिल्म में, इसे अनिल कपूर को बजाते हुए देख सकते है। हालांकि इसके लिए अनिल कपूर को कड़ी मेहनत करनी पड़ी। इसे बजाने में माहिर रमेश कुमार गुरुंग से इसे बजाने की ट्रेनिंग लेने वाले अनिल कपूर के मुताबिक, “यह मेरे किरदार का अहम हिस्सा था। मेरे लिए बहुत ज़रुरी था कि मैं इसे बजाना सीखूं। इसे सीखना मेरे लिए काफी कठिन था।”
खास बात है कि इस फिल्म में अनिल कपूर का किरदार ऐसे व्यक्ति का है, जो गायक बनना चाहता है,लेकिन किसी कारण से नहीं बन पाता। अपने सपने को पूरा ना करने वाला यह फन्ने खान एक साधारण टैक्सी ड्राइवर है और अब अपनी बेटी के सिंगर बनने के सपने को पूरा करना चाहता है। अपने जीवन के इस संघर्ष में ये ट्रम्पेट उसके लिए एक अहम भूमिका निभाता है। “ फिल्म में मेरा किरदार जब दुखी है, तब ट्रम्पेट बजाता हैं, जब खुश है, तब भी ट्रम्पेट बजाता हैं। इस बजाते हुए अभिनय करना बेहद चुनौती भरा था, जिसे रियल दिखाना बहुत ज़रुरी था, इसलिए मैंने इसे सीखा। “

खास बात है कि यह पहली बार नहीं जब अनिल कपूर कोई म्यूज़िकल इंस्ट्रूमेंट बजा रहे हो, इससे पहले वह बतौर बाल कलाकार फिल्म ‘तू पायल मैं गीत’ और फिर अपनी पहली फिल्म ‘वो सात दिन’ के लिए हारमोनियम भी सीख चुके हैं।

जब संगीत के लिए तय करते थे लंबा सफर

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फिल्मों के लिए अनिल कपूर ने अर्ध शास्त्रीय संगीत की भी शिक्षा ली है

फिल्म ‘फन्ने खान’ के ट्रम्पेट के लिए कई महीनों की ट्रेनिंग लेने वाले अनिल कपूर के लिए, संगीत की तालीम लेना हमेशा से ही मुश्किल रहा। बाल कलाकार के रुप में फिल्म ‘तू पायल मैं गीत’ के लिए सितार सीखने उन्हें कई किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता था। 12 साल की उम्र में सितार की तालीम लेने वाले अनिल कपूर उस दौरान मुंबई के बांद्रा से चेम्बूर तक का सफर तय करते थे, जो लगभग 20 किलोमीटर है।

वहीं अपनी पहली फिल्म ‘वो सात दिन’ के लिए भी उन्होनें हारमोनियम की तालीम ली और अब ट्रेम्पट की। ज़ाहिर है कि संगीत के साथ अनिल कपूर का पुराना रिश्ता हैं। अनिल बताते हैं, “मैंने उस्ताद इकबाल अहमद खान से हारमोनियम की शिक्षा ग्रहण की थी। संगीत मेरे करियर का एक अभिन्न अंग रहा है। मैंने जो किरदार निभाए है उनके ज़रिये मुझे राग और ताल की समझ आई।”

हालांकि अनिल कपूर के फैंस उन्हें सितार और हारमोनियम के साथ तो बॉक्स ऑफिस पर देख ही चुके है। अब वह अपने ट्रम्पेट के साथ 3 अगस्त को आ रहे है, देखते है इसकी गूंज कहा तक पहुंचती हैं।

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