सैटेलाइट शंकर सूरज पंचोली अभिनीत यह फिल्म कहानी है एक शंकर नाम के फ़ौजी की,जो डिजिटल ( सैटेलाइट) वर्ल्ड के माध्यम से काफी प्रसिद्ध हो जाता है और उसे पता भी नहीं चलता। लगभग 4 साल बाद पर्दे पर आ रहे सूरज पंचोली की इस फिल्म का निर्देशन इरफान कमाल ने किया है। जिया खान मर्डर केस को लेकर चर्चा में रहे सूरज पंचोली की इमेज को इस फिल्म से फायदा होगा इस बात में कोई दो राय नहीं है।

फिल्म की कहानी

फिल्म के निर्देशक इरफान और विशाल विजय ने मिलकर इस फिल्म की कहानी लिखी हैं
फिल्म के निर्देशक इरफान और विशाल विजय ने मिलकर इस फिल्म की कहानी लिखी हैं

फिल्म की कहानी फिल्म के ट्रेलर को देखकर ही साफ हो जाती है। शंकर (सूरज पंचोली) फौजी है और छुट्टियों के लिए अपने घर के लिए निकलता है, लेकिन अपनी इस 8 दिन की छुट्टियों में वह अपने साथी फौजी के परिवार वालों से मिलता हुआ और कई अड़चनों को झेलता और उन्हें सुलझाता हुआ अपने घर अपनी माँ से मिलने तो पहुँचता है, लेकिन चंद घंटों के लिए ही। दरअसल, इस फिल्म को दो लाइन में समेटा जा सकता है। फ़ौजी के लिए देश है और देश के लिए फ़ौजी। दरअसल, शंकर की ख़ासियत है कि उसकी जंग सिर्फ बार्डर पर ही नहीं हैं, बल्कि देश के अंदर की बुराईयों से भी वो लड़ना चाहता है, वो जिससे मिलता है उसे अपना बना लेता हैं। फिल्म की कहानी में डिजिटल वर्ल्ड का भी काफी बड़ा योगदान दिखाया है। जैसे इंटरनेट सभी लोगों को एक दूसरे से जोड़ सकता है, वैसे ही इस डिजीटल वर्ल्ड के कुछ नुकसान भी है, तो कुछ फायदे भी हैं, जिसे इस फिल्म में दिखाने की कोशिश निर्देशक ने की है।

फिल्म देखे या नहीं

जितान हरमीत सिंह की सिनेमाटोग्राफी अच्छी हैं
जितान हरमीत सिंह की सिनेमाटोग्राफी अच्छी हैं

सूरज के लिए यह फिल्म खास साबित होगी। दरअसल, जिया खान के केस के बाद उनकी इमेज को सुधारने की जो ज़रुरत थी , वो यह फिल्म पूरा करती हैं। फिल्म में शंकर एक नेक और सभी की मदद के लिए अक्सर तैयार रहते फौजी का किरदार निभा रहे हैं। उनके चेहरे की मासूमियत उनके इस किरदार के लिए एकदम परफेक्ट है। इस किरदार के लिए सूरज ने मेहनत की है, जैसे कई हिन्दुस्तानी भाषाओं में बोलना, एक्शन सीखना, हर चीज़ में सूरज की मेहनत दिखी हैं। इस बात में कोई दो राय नहीं है कि जिस सूरज को साल 2015 में फिल्म हीरो में देखा था, उस सूरज से यह सूरज बहुत अलग है। फिल्म में बतौर हीरोइन मेघा आकाश है। वह फिल्म में बहुत खूबसूरत दिखी हैं। उन्हें देखकर जेनेलिया डिसूजा की याद दर्शकों को आ जाएगी। वह कैमरा के सामने काफी सहज है और उनकी एक्टिंग में भी नयापन है। फिल्म में पालोमी घोष ने पत्रकार की भूमिका निभाई है। वह अपने डिजीटल ब्लॉग के ज़रिए शंकर को हीरो बना देती हैं। अपने किरदार के लिए वो एकदम परफेक्ट है।

फिल्म में कई किरदार है, जिनका रोल भले ही छोटा हो, लेकिन फिल्म को प्रभावी बनाता है।

फिल्म देखे या नहीं

फिल्म 182 मिनट की हैं
फिल्म 182 मिनट की हैं

फिल्म का फ़र्स्ट हाफ बोर करता है, लेकिन सेकेंड हाफ में फिल्म आपको बांधे रखती है। फिल्म का म्यूज़िक काफी कमज़ोर है, लेकिन फिल्म की सिनेमाटोग्राफी काफी बेहतरीन है। दावा किया जा रहा है कि यह पहली ऐसी बॉलीवुड फिल्म है ,जिसे 10 राज्यों में शूट किया गया है। फिल्म की फ़र्स्ट हॉफ अगर थोड़ा छोटा करा दिया जाता, तो बेहतर होता। फिल्म में कई इमोशन्ल प्वाइंट है और साथ ही डायलॉग भी आपको पसंद आएँगे। लेकिन फिल्म में सूरज को हीरो बनाने की कोशिश में कई ऐसी परिस्थितियां निर्माण की गई है, जो कहानी के फ्लो में नहीं जाती और वो आर्टिफिशयल लगती है। इस सभी के साथ इस फिल्म की टक्कर आयुष्मान खुराना की फिल्म ‘बाला’ से है, ऐसे में कितने दर्शक इस फिल्म की टिकट बुक करवाएंगे, कितने लोग आयुष्मान की फिल्म छोड़ सूरज पंचोली की फिल्म देखा चाहेंगे, यह बहुत बड़ा सवाल है। हालांकि यह फिल्म माउथ पब्लिसीटी से चल सकती है।

आवाज़ डाट कॉम इस फिल्म को ढाई स्टार देता हैं।

HFT हिन्दी की एडिटर, मनमौजी, हठी लेकिन मेहनती..उड़ नही सकती लेकिन मेरी कल्पनाशक्ति को उड़ने से कोई नहीं रोक सकता। अपने महिला होने पर मुझे सबसे ज्यादा गर्व है। लिखना मेरा शौक है। लिखने के अलावा बेटे के साथ गप्पे मारना और खेलना मुझे बेहद पसंद है।