जेल से छूटकर आने के बाद संजय दत्त ने मीडिया से मुलाकात की थी। उस प्रेस कॉन्फ़्रेंस का हिस्सा मैं भी थी। मुझे अच्छे से याद है संजय दत्त बार बार यह कह रहे थे कि मुझ पर आर्मस एक्ट का आरोप लगा है, लेकिन मैं टाडा से बरी हूं यानि मैं टेररिस्ट नहीं हूं। उस बात को कई साल गुज़र गए, लेकिन उसके इतने सालों बाद आज फिर फिल्म ‘संजू’ को देख कर उस दिन की याद आ गई। हालांकि ये बात सभी को पता है कि संजय दत्त बुरे हो सकते है, बुरी आदतों का शिकार हो सकते हैं, लेकिन आतंकवादी नहीं। जब कोई इंसान अपनी एक ही बात को बार बार ठोक बजा कर कहता है, कई सालों तक कहता है, तो महसूस होता कि शायद उसे इस बात का कितना दर्द होगा। इस फिल्म को भी इसी बात का ख्याल रखते हुए राजू हिरानी और फिल्म के राइटर अभिजात जोषी ने पेश किया है कि संजय दत्त बुरे ज़रुर है, लेकिन देश के लिए कोई गद्दारी नहीं की।

संजय दत्त की कहानी को राजू हिरानी और अभिजात जोशी ने कुछ इस तरह लिखा है कि जब आप थियेटर से बाहर निकलेंगे, तो संजय दत्त के साथ आपको सहानुभूति होगी, लेकिन ज़रा संभल जाइए, संजय दत्त ने अपनी ज़िंदगी में कुछ और भी ऐसे काम किए है, जो सही नही। जैसे ड्रग्स लेना, बहुत सी लड़कियों के साथ रिश्ते रखना और सबसे बड़ी गलती बंदूक रखना,

फिल्म की कहानी

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मुन्नाभाई छोड़ कर राजू हिरानी ने ये फिल्म बनाई क्योंकि उन्हे ‘संजू’ की कहानी बहुत दिलचस्प लगी

बापू और बाबा इन दोनों में आपको कोई समानता शायद ही नज़र ना आए, लेकिन फिल्म की कहानी बापू और बाबा से ही शुरु होती है। बाबा (संजय दत्त जिसका किरदार रणबीर निभा रहे हैं) खुद पर एक किताब लिखवाना चाहता है, लेकिन उस किताब को लिख रहा लेखक उनकी तुलना बापू से करता है। बाबा को इस बात से ऐतराज है, क्योंकि वह खुद को सीधा और अहिंसावादी नहीं मानता और लेखक की पिटाई शुरु कर देता है। कुछ इस तरह के कॉमेडी सीन से फिल्म की शुरुआत होती है और समझ में आ जाता है कि संजय दत्त की ज़िंदगी पर बनी इस फिल्म में आपको उनकी बुराईयों से सीधे सीधे रुबरु कराया जाएगा। हालांकि तभी एंट्री होती है फिल्म में विन्नी (अनुष्का शर्मा) की, जो लंदन की एक राइटर है और जीवनी लिखने के लिए मशहूर है,जिसे बाबा अपनी ज़िंदगी की कहानी सुनाना चाहते हैं। जिससे वह लोगों तक इस बात तो पहुंचा सके कि जैसा उनके बारे में मीडिया में दिखाया गया है, या जो लोगों से सुना है, वह वैसे है भी या नहीं। वह इस लेखक से सामने अपनी ज़िंदगी की पहली फिल्म, पहली गर्लफ्रेंड, पहली बार ड्रग्स , लड़कियों के साथ रिश्ते के साथ साथ बंदूक लेने की ग़लतियों का भी ज़िक्र करते है।

बाप-बेटे और दोस्त संजय की कहानी है संजू

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संजू अपमी मां के बेहद करीबी थे

राजकुमार हिरानी ने उनकी पहली फिल्म सें लेकर जेल से बाहर आने तक की उनकी ज़िंदगी के दो इमोशन को पेश किया है। एक बाप और बेटे का रिश्ता और दूसरा दोस्ती का रिश्ता। एक दोस्त (जिम सर्भ) की संगत जो उसे बिगाड़ती है और एक दोस्त (विक्की कोशल) की संगत उसे सुधारती है। पिता की डॉट ड्रग्स लेने पर मजबूर करती है, तो पिता का प्यार ही जीवन में हर कठिनाई में लड़ने के लिए हिम्मत भी देता है। खास बात है कि संजय दत्त ने अपने जीवन की सभी गलतियों को बिंदास तरीके से सबसे सामने पेश कर दिया है। इस बात की वाकई तारीफ करनी होगी कि कोई भी अपनी गलतियों को इस तरह से कबूल कभी नहीं करता। हालांकि संजय दत्त की इन सभी गलतियों के पीछे राजू हिरानी ने हर बार कोई ना कोई ऐसा कारण ज़रुर बताया, जिसकी वजह से आपको इस किरदार से सहानुभूति हो जाए। पिता ने डॉट लगाई और मां बीमारी थी, तो ड्रग्स ले ली, लड़कियों के साथ रिश्ते के बारे में वह बिंदास थे, उनका किरदार ऐसा दिखाया है, जो अपनी दोस्त की गर्लफ्रेंड को भी नहीं छोड़ता। ट्रेलर में आपने सुना ही होगा लगभग 350 लड़कियों का जिक्र संजय दत्त ने किया है। उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी गलती थी बंदूक रख लेना, वह भी उन्होंने इसलिए रखी क्योंकि उनके पिता को धमकी भरे फोन आ रहे थे और वह पिता और अपने परिवार की सुरक्षा चाहते थे।

ज़ाहिर है कि हर गलती के पीछे का एक कारण फिल्मकार ने जस्टिफाई किया है। संजय के जेल में काटे हुए दिन, उनके केस, लोगों के लिए बदलती उनकी सोच, पिता का संघर्ष सब कुछ इस फिल्म में दिखाया है।

रणबीर कपूर है या संजय दत्त

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रणबीर को इस फिल्म से है बेहद उम्मीद

रणबीर कपूर की बात की जाए, तो वह एक ब्रिलियंट एक्टर है। राजू हिरानी एक ऐसे निर्देशक है, जो हीरा तराशना जानते हैं। इस फिल्म में रणबीर कपूर की एक्टिंग इतनी खूबसूरत है कि आप को यह लगेगा कि रणबीर कपूर नहीं आप संजय दत्त को ही स्क्रीन पर देख रहे हैं। इस बात का एहसास नहीं होता कि संजय खुद नहीं, बल्कि रणबीर संजय दत्त का किरदार निभा रहे हैं। रणबीर के बाद फिल्म में विक्की कौशल का किरदार बहुत ही बेहतरीन है। वह संजय दत्त की रियल लाइफ के करीबी दोस्त परेश का किरदार निभा रहे है, जो विदेश में रहते है। विक्की कौशल हर फिल्म के साथ बेहतर होते जा रहे है। संजय दत्त के एन आर आई गुजराती दोस्त के किरदार को विक्की ने खूबसूरती से निभाया है। संजय दत्त के पिता का किरदार परेश रावल ने किया है। सुनील दत्त का किरदार निभा रहे परेश रावल ने बेहतरीन एक्टिंग की है। फिल्म में रणबीर और उनके बीच फिल्माए गये सीन बहुत खूबसूरत है। पुराने गीतों मे छिपे मैसेज को अपना उस्ताद मानने वाले सुनील दत्त ने अपने बेटे के लिए कितनी कुर्बानीयां दी है, यह देख कर आंखें नम हो जाती हैं। संजय दत्त का अपनी मां नरगिस दत्त (मनीषा कोइराला) से रिश्ते को बहुत ही खूबसूरती से दिखाया है।

फिल्म की कमियां

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फिल्म में संजय दत्त की लव लाइफ के बारे में ज़्यादा नहीं दिखाया गया

राजू हिरानी फिल्मों मे कमी निकालना मुश्किल काम होता है। इस फिल्म में कमी कुछ नहीं, लेकिन फिर भी कुछ अधूरा लगता है। पिता ने डॉट लगाई तो ड्रग्स ले लो, धमकी भरा फोन आया तो बंदूक रख लो। गलतियां सिर्फ गलतियां होती है, उसके पीछे के कारणों से गलतियों को जस्टिफॉय नहीं किया जा सकता। कहीं कहीं जगह ऐसा लगता है कि संजय दत्त को ग्लोरिफाई किया जा रहा है। लेकिन एक बात माननी होगी कि संजय दत्त ने अपनी ज़िंदगी की हर बुराइयों , गलतियों को मान कर बड़े परदे पर दिखाने की जो हिम्मत की है वह काबिले तारीफ है।

संजय दत्त को टेररिस्ट बनाने का, उनकी इमेज को बिगाड़ने की पूरी ज़िम्मेदारी मीडिया पर डाल दी गई है। ऐसा लगता है कि मानो मीडिया के सूत्र और हेडलॉइन ही संजय दत्त को बुरा बनाने और उनके रिश्ते तोड़ने में ज़िम्मेदार हो, जो सही नहीं।

फिल्म के अंत में दर्शकों के लिए एक सरप्राईज़ भी है। फिल्म के आखिर में संजय दत्त और रणबीर पर एक गाना फिल्माया गया है “ बाबा बोलता है बस हो गया” । इस गीत में दरअसल संजय दत्त, मीडिया को बस करने की बात कर रहे है। इस गीत में संजय और रणबीर को एक साथ देखना मजेदार है। खास बात ये है कि इस गीत में संजय दत्त, रणबीर से ज़्यादा स्टाइलिश और हैंडसम लग रहे है। इस गीत को अभी तक सरप्राईज़ रखा गया था।

हालांकि एक बात तो तय है कि जो भी दर्शक इस फिल्म को देखकर निकलेगा, वो यह तो सीख ले ही लेगा कि ज़िंदगी में की गई गलतियों की सजा भुगतनी भी पड़ती है और उसका पश्चाताप भी करना पड़ता है। संजय ने भी अपनी ज़िंदगी की इन गलतियों से बहुत कुछ सीखा है। हालांकि ये बात कोर्ट में साबित हो ही गई थी संजय टेररिस्ट नहीं है। इस फिल्म को देखने के बाद दर्शक मान कर ही बाहर निकलेगा कि संजय दत्त ने देश के खिलाफ कोई काम नहीं किया।

ग़ौरतलब है कि यह फिल्म संजय और रणबीर दोनों के लिए महत्वपूर्ण थी। जहां लगातार फ्लॉप फिल्मों के बाद रणबीर को एक हिट फिल्म की ज़रुरत थी, वहीं संजय के लिए भी अहम था कि वह अपनी खराब हुई छवि को लोगों के बीच सुधार सके। कहां जाए तो राजू हिरानी की इस एक फिल्म ने दो सितारों की ज़िंदगी में एक अध्याय की शुरुआत कर दी।

हॉट फ्राइ़डे टॉक्स इस फिल्म को साढे तीन स्टार देता हैं।

HFT हिन्दी की एडिटर, मनमौजी, हठी लेकिन मेहनती..उड़ नही सकती लेकिन मेरी कल्पनाशक्ति को उड़ने से कोई नहीं रोक सकता। अपने महिला होने पर मुझे सबसे ज्यादा गर्व है। लिखना मेरा शौक है। लिखने के अलावा बेटे के साथ गप्पे मारना और खेलना मुझे बेहद पसंद है।