ईद पर आ रही भाई की फिल्म ‘रेस 3’ से सभी को उम्मीदें थी। फिल्म बेहतरीन होगी और लोगों की ईद में चार चांद लगाएगी। अफसोस की जब आप थिएटर में जाते हैं, तो फिल्म के शुरुआती 20 मिनट में ही आपको पता चल जाता है कि आपको अपना दिमाग घर छोड़ कर आना चाहिए था। फिल्म में या तो बंदूकें दिखाई दे रही है, या बंदूकों की आवाज़ सुनाई दे रही है। फिल्म में ऐसा कुछ नहीं, जिसे देखने के लिए आप थिएटर तक जाएं, लेकिन हां अगर आपको अपने पैसे बर्बाद करने हैं, तो आप जा सकते हैं और अगर आप सलमान खान के फैन हैं, तब तो आप इस फिल्म के लिए ज़रूर जा सकते हैं।

फिल्म की बचकानी कहानी है ज़िम्मेदार

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फिल्म को खूबसूरत लोकेशन में शूट किया गया है

फिल्म की कहानी शुरू तो इंडिया से होती है, लेकिन फिर अल- शिफा द्वीप पर पहुंच जाती है। यह कहानी है एक ऐसे परिवार की, जो भारत के हंडिया गांव में भारतीय आर्मी के लिए आर्म्स बनाता है और इस परिवार में है शमशेर(अनिल कपूर) और उसका एक बड़ा भाई, लेकिन राजनेताओं से पंगा लेने के बाद, अनिल कपूर के इस भाई को मार दिया जाता है। इसके बाद अनिल कपूर अपने पूरे परिवार को लेकर अल-शिफा आ जाते हैं। उनके इस परिवार में शामिल है, सलमान खान और उनके सौतेले भाई बहन डेज़ी शाह और साक़िब सलीम। यह रेस परिवार वालों के बीच ही आपस की रेस है। फिल्म में कब, कौन, किस से प्यार करने लगता है, कौन किस का सगा भाई और बेटा बन जाता है, कौन कब एक दूसरे से जलने लगता है, यही इस रेस 3 का टर्न और ट्विस्ट हैं। इस फिल्म के निर्देशक रेमो डिसूज़ा एक अच्छे कोरियोग्राफ़र है, लेकिन उन्होंने एक्शन फिल्म में भी कलाकारों को नचा डाला। फिल्म की कहानी इतनी बचकानी है, जिस पर बात ना हीं की जाए तो अच्छा है। फिल्म की हीरोईन यानि जैसिका(जैकलीन) सिकन्दर (सलमान) से मिलती है, फिर गायब होती है और फिर मिलती है, फिल्म के रोमांस का एंगल भी एकदम बचकाना है। ये परिवार है जिसमें आपसे में प्यार नहीं, दोस्ती है लेकिन गहरी नहीं,..फिल्म का एक भी इमोशन दर्शक महसूस नहीं कर पाते, वहीं इस फिल्म की सबसे बड़ी कमी है।

फिर भी खूब बजती है तालियां

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एक्शन और डॉयलॉग पर भी हस रहे हैं लोग

जी हां, यह बात जानकर चौक जाएंगे कि फिल्म की कहानी का कोई सर पर ना होते हुए भी कई बार तालियां बजती है, लेकिन हम आपको बता दें कि यह तालियां फिल्म के बचकानी डायलॉग पर बजती है। फिल्म में विदेश में रहता अनिल कपूर का किरदार अपने गांव और देश की याद आ जाने पर कुछ ऐसी भाषा और डॉयलॉग में बात करता है, जो आपको हंसने पर मजबूर कर देते है। निर्देशक को ये बात समझनी चाहिए कि फिल्म में बंदूकें चला कर, गाड़ियां उड़ा कर और ढेरों एक्शन दिखा कर फिल्म नहीं बनाई जा सकती।

कहीं कहीं तो सलमान खान spider-man का अवतार लेते हैं और वह बिल्डिंग के ऊपर फ्लाइंग सूट पहने उड़ते नजर आते हैं। फिल्म के यह दृश्य भी फिल्म में हास्य का कारण बनते हैं। जैकलीन और डेज़ी की डॉयलॉग डिलीवरी काफी कमज़ोर है। दरअसल सलमान के नाम से बेची जा रही इस फिल्म में यही पता नहीं चलता कि आखिरकार सलमान क्या कर क्या रहे हैं। 3 घंटे की इस फिल्म में आखिर यही समझने में लग जाता है कि यह फिल्म क्यों बनाई गई है।

फिल्म के गीत और एक्शन

अब्बास मस्तान निर्देशीत और सैफ स्टारर रेस, लोगों को आई थी पसंद

फिल्म के गीत जब लॉन्च हुए थे उस दौरान काफी पसंद आ रहे थे, लेकिन जब फिल्म के दौरान इन गीतों को देखा जाता है, तो ‘हीरिए’ गीत को छोड़कर कोई भी गीत आपको पसंद नहीं आता। सभी गीत कहानी को आगे बढ़ाने की जगह आप को बोर ज़रूर करते हैं।

फिल्म की शुरुआत में 20 मिनट का एक्शन और फिल्म के आखिर में लगभग आधे घंटे चलने वाला एक्शन शुरू में तो आपको पसंद आता हैं, लेकिन थोड़ी देर बाद यह भी आपको बोर करने लगता है।

सलमान खान इस फिल्म के एक ऐसी हीरो है, जो हर बार मौत को पछाड़कर आ जाते हैं। ‘जाको राखे साइयां मार सके ना कोई’ लगता है यह इस फिल्म के लिए लिखा गया और वाकई यह इस फिल्म में सलमान पर ही फिट बैठता है। फिल्म के आखिर के एक्शन के सीन के दौरान सलमान और बॉबी दोनों अपनी शर्ट उतारते हैं, हालांकि इस दौरान उनके लिए दर्शक तालियां ज़रुर बजाते हैं, लेकिन तब तक काफी लेट हो चुका होता है । इतनी देर इंतजार करने के बाद या तो दर्शक पक गया होता है या फिर थक गया होता है। जब बहुत अच्छा भी देर से परोसा जाए तो उसका मज़ा नहीं आता, ये बाद निर्देशक को समझनी चाहिए।

लगता है सिर्फ करिबीयों के लिए बनाई फिल्म

सलमान खान को डेज़ी, जैकलीन, बॉबी और साकिब का मेंटर कहा जाता है, लगता है उन्हें सिर्फ काम दिलाने के लिए यह फिल्म बनाई है

यह फिल्म देख कर समझ में आता है कि सलमान खान अपने कुछ करीबियों को प्रमोट करना चाहते थे और शायद उन्होंने बॉबी, साकेब, डेज़ी और जैकलिन को काम दिलाने के लिए इस फिल्म को बनाया। बेसिर-पैर की मारधाड़, गोली बाजी, 16 जितनी गाड़ियों को उड़ाना और मोटर बाइक की रेस में आपको समझ ही नहीं आता कि आप फिल्म देख रहे हैं या किसी वीडियो गेम का हिस्सा है। फिल्म को 3डी के साथ क्यों रिलीज़ किया गया, ये भी समझ नहीं आता। फिल्म में ऐसा कुछ नहीं जिसका मज़ा आप सिर्फ 3D में उठा सके।

इस बार सेल्फिश होने में बुराई नहीं

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सलमान का स्टाइल और स्वैग देखना है तो पैसा डाले

फिल्म की एडिटिंग और सिनेमाटोग्राफी बेहतर है। फिल्म के आखिर में सलमान का परिवार के लिए प्यार और ज्ञान अच्छा है, जो इस फिल्म के सभी लूपहोल को जस्टिफाई करता है। फिल्म देखनी है तो सलमान खान के लिए आप देख सकते हैं। लेकिन यह बात आपको बता देना बेहतर है कि सलमान खान इसमें क्या कर रहे हैं और क्यों कर रहे हैं, यह शायद आपको भी आखिर तक पता न चले। सलमान को देखना पैसा वसूल ज़रूर है क्योंकि इस फिल्म में वह अपने उसी स्वैग और स्टाईल के साथ दिख रहे हैं।

जाते-जाते हॉट फ्राइडे टॉक्स की एक सलाह ज़रूर मान लीजिए। एक बार सेल्फिश हो कर अपने पैसों के बारे में सोचिए और सलमान के लिए अपनी फैनगीरी भूल जाइए, इसी में आपका फायदा है।

HFT हिन्दी की एडिटर, मनमौजी, हठी लेकिन मेहनती..उड़ नही सकती लेकिन मेरी कल्पनाशक्ति को उड़ने से कोई नहीं रोक सकता। अपने महिला होने पर मुझे सबसे ज्यादा गर्व है। लिखना मेरा शौक है। लिखने के अलावा बेटे के साथ गप्पे मारना और खेलना मुझे बेहद पसंद है।