सूफी संगीत में अपनी अलग पहचान बनाने वाली रूहानी सिस्टर्स आज सूफी संगीत का पर्यायवाची बन गई है। रूहानी सिस्टर्स की सबसे खास बात है कि वह अपनी सूफी संगीत, बुलंद आवाज़, ताल और अपनी रुहानी आवाज़ से लोगों की रूह को छू लेती है। जागृति लूथरा प्रसन्ना और नीता पांडे नेगी यह दोनों भले ही सगी बहनें ना हो, लेकिन सूफी संगीत के लिए उनके प्यार ने उन्हें एक साथ रुह से जोड़ दिया है और एक साथ एक मंच पर लाकर खड़ा कर दिया है। इसीलिए ये रूहानी सिस्टर्स – द फीमेल व्यास ऑफ सूफिज़्म हैं।

इन दोनों के लिए ही सूफी संगीत का चयन करना आसान काम नहीं था। दरअसल सूफी संगीत को हमेशा मर्दों की आवाज़ और आदमियों से जोड़कर देखा जाता है, वहीं इस संगीत का चयन करने से पहले इन दोनों ने काफी मशक्कत करनी पड़ी। जागृति बताती हैंं, “हमें यही डर था कि लोग हमें पसंद भी करेंगे या नहीं, लेकिन हम दोनों में जुनून था। हम दोनों सूफी संगीत में ही कुछ करना चाहती थी, हमें लगा कि अगर हमें कुछ करना है, तो यही करना है और आज 3 साल बाद लोग हमें पसंद कर रहे हैं।”

सूफी संगीत में कई बदलाव करने वाली रूहानी सिस्टर्स ने आज सूफी संगीत को आम लोगों से जोड़ दिया है। उनका मानना है कि केवल ख़ुदा और मौला लग जाने से कोई भी संगीत सूफी नहीं हो जाता। सूफी का मतलब क्या है और सूफी क्या है यह लोगों तक पहुंचाना आसान काम है, जिसके लिए हमने छोटी-छोटी कोशिशें की। नीता बताती है, “लोगों को सूफी कविताओं की भाषा आसानी से समझ नहीं आती। हमें सूफी संगीत को आम लोगों तक पहुंचाना था। हमने भाषा को साधारण कर दिया, साथ ही क्लासिकल संगीत को भी, जिससे लोगों को यह ना लगे कि सूफी और क्लासिकल समझना बेहद मुश्किल है।”

10 साल पहले कॉलेज में 5 लड़कियों से शुरुआत होने वाले इस सफर में आगे चलकर केवल जागृति और नीता ही रह गई और इन दोनों ने फैसला किया कि हम अपने संगीत को लोगों तक ज़रूर पंहुचाएंगे। यूं तो 10 साल पहले ही शुरूआत हुई, लेकिन शादी , बच्चे और कई ज़िम्मेदारियों को बखूबी निभाते निभाते, पिछले 3 सालों से यह दोनों कई शो कर चुकी है और लोगों को रूहानी सिस्टर्स का संगीत काफी पसंद आ रहा है।

दोनों ने ही शास्त्रीय संगीत की तालीम ली है। जहां नीता दिल्ली घराने से है, वहीं जागृति बनारस घराने से है। यह दोनों नुसरत फतेह अली खान साहब को अपनी प्रेरणा मानते हैं। जागृति का मानना है “सूफी म्यूजिक को ग्लोबलाइज़ करने का श्रेय नुसरत जी को जाता है। उन्होंने तबला और हारमोनियम से शुरुआत की और कई वाद्य यंत्रों को अपनी गायकी में शामिल करते रहे, लेकिन खास बात ये है कि उनकी गायकी कहीं भी इससे प्रभावित नहीं हुई।”

रूहानी सिस्टर्स बॉलीवुड में अपनी किस्मत आज़माना चाहती है। सूफी को नए और मॉडर्न अंदाज में पेश करने वाली रुहानी सिस्टर्स को लोगों से तो बहुत अच्छा रिस्पोंस मिल ही रहा है, हो सकता है कि बहुत जल्द हम उन्हें बॉलीवुड में भी सुन पाए।